
सीहोर। प्रदेश में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेशव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने की। इस दौरान उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन तथा स्वच्छता संबंधी कार्यों में तेजी लाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।
सीहोर कलेक्टर कार्यालय स्थित राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के वीडियो कॉन्फ्रेंस कक्ष से कलेक्टर श्री बालागुरू के., जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती सर्जना यादव सहित नगरीय निकायों एवं संबंधित विभागों के अधिकारी इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए। बैठक में प्रदेशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का निर्माण तभी संभव है जब ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन, प्रसंस्करण और सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 केवल प्रशासनिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए सभी नगरीय निकायों, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को गंभीरता एवं समन्वय के साथ इन नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
वीडियो कॉन्फ्रेंस में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा भी की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक निकाय को अपने क्षेत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था स्थापित करनी होगी।
बैठक में स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण (सेग्रिगेशन) को विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक घर, संस्थान, बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में गीले एवं सूखे कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने, नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने तथा स्वच्छता मित्रों और स्थानीय निकायों की क्षमता विकसित करने पर भी बल दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि कचरे का वैज्ञानिक संग्रहण एवं परिवहन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा संग्रहित अपशिष्ट को निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के अनुसार प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाकर उसका सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही खुले में कचरा फेंकने, जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से निस्तारण की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में नगर निकायों को आधुनिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाने, कम्पोस्टिंग, रीसाइक्लिंग, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ), जैविक कचरे के प्रबंधन तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के पृथक संग्रहण और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों से कहा गया कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग कर कचरे के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान जिला प्रशासन और नगरीय निकायों के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्वच्छता गतिविधियों, कचरा संग्रहण व्यवस्था, प्रसंस्करण सुविधाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना की जानकारी भी साझा की। इस दौरान विभिन्न जिलों में सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार-विमर्श किया गया।
वीडियो कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद सीहोर कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य शासन द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए तथा जिले में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उस पर तत्काल अमल किया जाए।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के सभी नगरीय निकायों में स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाए तथा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, स्रोत पर पृथक्करण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमित निरीक्षण, मॉनिटरिंग और जनजागरूकता गतिविधियों को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, नगर पालिका, नगर परिषद, ग्राम पंचायत, जिला पंचायत तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जा सके। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों का समयबद्ध निर्वहन करे तथा स्वच्छता अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना स्वच्छता अभियान को पूरी सफलता नहीं मिल सकती। इसलिए लोगों को घरों में कचरे का पृथक्करण, प्लास्टिक के कम उपयोग, सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाए। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिले में संचालित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा जिन क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, वहां प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जाए। साथ ही स्वच्छता मित्रों के प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता तथा आधुनिक मशीनों के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्य सचिव द्वारा आयोजित यह वीडियो कॉन्फ्रेंस प्रदेश में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि शासन के निर्देशों का प्रभावी पालन करते हुए सीहोर जिले में स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे नागरिकों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध होगा और सतत विकास के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।









