
झगरौंहा। पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से हाईस्कूल झगरौंहा परिसर में शनिवार को एक प्रेरणादायी वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विद्यालय परिसर एवं आसपास विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे। इस अवसर पर सभी ने केवल पौधारोपण ही नहीं किया, बल्कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पौधारोपण के साथ हुआ। अतिथियों ने विद्यालय परिसर में छायादार, फलदार तथा पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी पौधों का रोपण किया। इसके बाद विद्यार्थियों को पौधों के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि आज लगाया गया एक छोटा पौधा आने वाले वर्षों में हजारों लोगों को शुद्ध वायु, छाया और बेहतर पर्यावरण प्रदान करेगा। इस अवसर पर संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ जीवन का आधार भी प्रदान करते हैं। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और तापमान में लगातार हो रही वृद्धि के बीच वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमें जल, वायु और वन जैसे अनमोल संसाधन दिए हैं। इन संसाधनों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। केवल सरकारी योजनाओं या अभियानों से पर्यावरण की रक्षा संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है। समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों को इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पौधों की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्हें समझाया गया कि वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं, कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर प्रदूषण कम करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। इसके साथ ही वृक्ष अनेक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी होते हैं। विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि पर्यावरण शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का नियमित आयोजन आवश्यक है। जब बच्चे स्वयं पौधे लगाते हैं और उनकी देखभाल करते हैं, तब उनके मन में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया और संकल्प लिया कि वे अपने घरों, विद्यालय तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे। कई विद्यार्थियों ने यह भी कहा कि वे लगाए गए पौधों की नियमित सिंचाई और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे ताकि वे बड़े होकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
स्थानीय नागरिकों ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की आवश्यकता है। बढ़ते शहरीकरण और वनों की कटाई के कारण पर्यावरण असंतुलन की समस्या गंभीर होती जा रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि पौधारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधे जीवित रहें और उनका समुचित संरक्षण किया जाए। इसलिए प्रत्येक पौधे को एक जिम्मेदार व्यक्ति से जोड़ने तथा नियमित निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया गया। उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे वर्षा ऋतु का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने घरों, खेतों, सार्वजनिक स्थानों और विद्यालय परिसरों में पौधे अवश्य लगाएं। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने एक स्वर में पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी देखभाल करने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम सकारात्मक संदेश और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। यह वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और हरित, स्वच्छ एवं स्वस्थ भविष्य के निर्माण का प्रेरक संदेश देने में भी सफल रहा। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के जनसहभागिता आधारित अभियान भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे, ताकि प्रकृति संरक्षण का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।









