
मंडला में आयोजित छात्र चौपाल में जनजातीय गौरव, रोजगार, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत पर हुआ व्यापक संवाद
मंडला। जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) नगर इकाई, मंडला के तत्वावधान में रानी दुर्गावती शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जनजाति छात्र चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा अभाविप पदाधिकारियों ने सहभागिता कर जनजातीय समाज के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश शासन की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास गौरवशाली, प्रेरणादायी और प्रकृति के प्रति समर्पण की भावना से परिपूर्ण रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, भाषा, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सदैव प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सामुदायिक जीवन का प्रतीक रहा है। वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि युवा अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से नए अवसरों का लाभ उठाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षित और जागरूक युवा समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य माधवन शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते समय में केवल शैक्षणिक डिग्री ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कौशल विकास, तकनीकी दक्षता और व्यवहारिक ज्ञान भी सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक शिक्षा के साथ डिजिटल तकनीक, नवाचार और स्वरोजगार के अवसरों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अभाविप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। संगठन शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का आग्रह किया। चौपाल के दौरान जनजातीय समाज के महानायकों, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती, टंट्या भील सहित अनेक जनजातीय वीरों ने देश की संस्कृति, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में आगे आना चाहिए। कार्यक्रम में शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण, स्टार्टअप, उद्यमिता तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में तकनीकी शिक्षा, डिजिटल सेवाएँ, कृषि आधारित उद्योग, वन उत्पादों का मूल्य संवर्धन, हस्तशिल्प तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, छात्रावास सुविधाओं को मजबूत करने, छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा उच्च शिक्षा तक विद्यार्थियों की पहुँच सुनिश्चित करने पर भी विचार व्यक्त किए गए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा समाज में समान अवसर प्रदान करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसके माध्यम से आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति मिलती है। कार्यक्रम के दौरान जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जनजातीय जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहा है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच जनजातीय समाज की पारंपरिक जीवनशैली पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती है। युवाओं से पौधरोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। संवाद सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति, डिजिटल शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण तथा करियर से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों और अतिथियों ने विस्तार से उत्तर दिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा शैक्षणिक अवसरों की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम में अभाविप के जिला संगठन मंत्री जितेंद्र यादव, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य वागीश पटेल, जिला संयोजक प्रिंस सिंह, नगर मंत्री उमंग राय सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने जनजातीय समाज के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और जनजातीय समाज इस विरासत का महत्वपूर्ण आधार है। यदि युवा अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हुए आधुनिक शिक्षा, तकनीकी दक्षता और कौशल विकास को अपनाएँ, तो वे न केवल अपने समाज बल्कि पूरे राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान तथा जनजातीय समाज के गौरव, शिक्षा के प्रसार, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।