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जशपुर के ऐतिहासिक दोकड़ा श्री जगन्नाथ मंदिर में भक्ति और उल्लास के साथ निकली भव्य रथयात्रा, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निभाई गजपति महाराजा की परंपरागत भूमिका

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जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में भगवान श्री जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा इस वर्ष भी श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकली इस भव्य रथयात्रा में धार्मिक उल्लास, सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
रथयात्रा के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं पारंपरिक गजपति महाराजा की भूमिका में शामिल हुए। उन्होंने सपत्नीक विधि-विधान से भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न होने के बाद भगवान के रथ को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

दोकड़ा का श्री जगन्नाथ मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष निकलने वाली रथयात्रा में प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल होने और रथ की रस्सी खींचने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे, सेवा और समानता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं राज्य की अमूल्य धरोहर हैं और राज्य सरकार इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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पूजा-अर्चना के पश्चात भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं को भव्य रथ पर विराजमान किया गया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, भजन-कीर्तन, शंखनाद और धार्मिक जयघोष के बीच रथयात्रा प्रारंभ हुई। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ की रस्सी खींची तथा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर भगवान की आरती और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
रथयात्रा के दौरान सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए थे। प्रशासन द्वारा यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस, प्रशासन और स्वयंसेवकों ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धार्मिक विद्वानों ने बताया कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह उत्सव भगवान के भक्तों के बीच आने और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान रूप से अपने आशीर्वाद से जोड़ने का प्रतीक माना जाता है। रथयात्रा सामाजिक समरसता, सेवा, श्रद्धा और मानवता के मूल्यों को भी मजबूत करती है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने भगवान श्री जगन्नाथ से प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की प्रार्थना की।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की कृपा सभी पर बनी रहे तथा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक गौरव के पथ पर आगे बढ़ता रहे। उन्होंने लोगों से सामाजिक सद्भाव, सेवा और लोककल्याण की भावना को जीवन में अपनाने का आह्वान भी किया।
दोकड़ा की यह ऐतिहासिक रथयात्रा एक बार फिर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और जनआस्था का भव्य प्रतीक बनकर सामने आई, जिसमें श्रद्धा, उत्साह और लोकसंस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ इस महापर्व में भाग लेकर भगवान श्री जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेश की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
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