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नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का अद्भुत संयोग: सात वर्षों बाद एक साथ मनाया जाएगा महापर्व, उज्जैन में 10 से 15 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

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उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन एक बार फिर आस्था के महासागर का साक्षी बनने जा रही है। आगामी 17 अगस्त 2026 को सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग सात वर्षों बाद एक साथ बन रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में यह संयोग बना था, जब सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी एक ही दिन मनाए गए थे। इस बार भी इस विशेष अवसर पर भगवान महाकालेश्वर और वर्ष में केवल एक दिन दर्शन देने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की संभावना है। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार इस अवसर पर 10 से 15 लाख श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस, श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति और विभिन्न विभागों ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।
महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन मास का प्रत्येक सोमवार विशेष महत्व रखता है, लेकिन जब सावन सोमवार और नाग पंचमी एक साथ पड़ते हैं तो इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। नाग पंचमी के दिन महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर के कपाट वर्ष में केवल एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। यही कारण है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर भगवान के दुर्लभ दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े रहते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा विश्व की अद्वितीय प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। इसमें भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी नागराज तक्षक पर विराजमान हैं। पूरे वर्ष मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और केवल नाग पंचमी पर 24 घंटे के लिए दर्शन का अवसर मिलता है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु इस दिन उज्जैन पहुंचते हैं।
वर्ष 2019 में भी जब नाग पंचमी और सावन सोमवार का संयोग बना था, तब लाखों श्रद्धालुओं ने महाकाल और नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन किए थे। प्रशासन ने उस समय विशेष सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की थी। अब सात वर्षों बाद एक बार फिर ऐसा ही संयोग बनने से श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है।
इस बार श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रारंभिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। बताया जा रहा है कि शीघ्र ही कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, विद्युत कंपनी, नगर सुरक्षा समिति तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की संयुक्त बैठक आयोजित होगी। बैठक में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था, पार्किंग, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा के विस्तृत इंतजामों पर चर्चा की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस विशेष पर्व की तैयारियों की समीक्षा कर सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री उज्जैन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों तथा मंदिर प्रबंध समिति के साथ विशेष बैठक लेकर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करेंगे और आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति भी दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुगम बनाने की योजना पर काम कर रही है। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, कतार प्रबंधन, चिकित्सा सहायता केंद्र, पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थल और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा सकते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने तथा ड्रोन कैमरों से निगरानी की भी तैयारी की जा रही है।
रेलवे और सड़क परिवहन विभाग भी अतिरिक्त यात्रियों को देखते हुए अपनी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटेंगे। रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनों अथवा अतिरिक्त कोचों की व्यवस्था तथा बसों के अतिरिक्त संचालन पर भी विचार किया जा सकता है ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा में परेशानी न हो।
पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। हजारों पुलिसकर्मियों, होमगार्ड और स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली तथा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिस बल की विशेष तैनाती भी की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्थायी चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, आपातकालीन चिकित्सा दल तथा प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मानसून के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मोबाइल शौचालय, प्रकाश व्यवस्था तथा कचरा प्रबंधन के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रमुख मार्गों और मंदिर क्षेत्र में लगातार सफाई व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर रहेगा।
व्यापारिक संगठनों, होटल संचालकों और धर्मशालाओं ने भी श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए शहर के होटल, धर्मशालाएं और आश्रम पहले से बुक होने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों को भी इस धार्मिक आयोजन से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की उम्मीद है।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह संयुक्त पर्व भगवान शिव तथा नाग देवता की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, नाग देवता की पूजा और शिव आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हैं।
महाकाल की भस्म आरती, सावन की विशेष सवारी और नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन उज्जैन की धार्मिक परंपरा की अनूठी पहचान हैं। इस बार सात वर्षों बाद बन रहे इस विशेष संयोग ने श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह को कई गुना बढ़ा दिया है। देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और शीघ्र ही सभी विभागों के साथ विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का यह दुर्लभ संगम न केवल उज्जैन बल्कि पूरे देश के लिए धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 17 अगस्त को महाकाल की नगरी एक बार फिर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंजेगी और लाखों श्रद्धालु भगवान महाकाल तथा नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करेंगे।
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