
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को भोपाल स्थित विधानसभा परिसर में सारंगपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मंडलों के पदाधिकारियों से आत्मीय भेंट एवं विस्तृत चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ। इस दौरान सभी पदाधिकारी मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित होने के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इस अवसर को लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक समानता और राष्ट्रहित के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए सभी ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया।
बैठक के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों के साथ प्रदेश के विकास, संगठन की मजबूती, जनसेवा, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आकांक्षाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विकास और सुशासन की दिशा में निरंतर कार्य करना प्रत्येक जनप्रतिनिधि और संगठन की साझा जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित पदाधिकारियों ने इसे मध्यप्रदेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण विधायी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह निर्णय संविधान में निहित समानता, न्याय और समान अधिकारों की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला है। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता प्रत्येक नागरिक के लिए समान कानूनी व्यवस्था, समान अवसर और समान न्याय की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बैठक में यह भी कहा गया कि सामाजिक समरसता किसी भी सशक्त समाज की आधारशिला होती है। समान नागरिक संहिता के माध्यम से समाज में समानता और न्याय की भावना को और अधिक बल मिलेगा तथा नागरिकों के बीच विश्वास एवं सामाजिक एकता मजबूत होगी। उपस्थित पदाधिकारियों ने इसे विकसित और समावेशी मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में भी विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान कहा गया कि महिलाओं को सम्मान, समान अवसर और न्याय उपलब्ध कराना किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्राथमिक जिम्मेदारी है। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समान अधिकारों की भावना को और अधिक मजबूत करना है।

राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द के विषय पर भी विस्तृत चर्चा हुई। उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि संविधान की मूल भावना सभी नागरिकों के प्रति समान व्यवहार, समान अवसर और न्याय सुनिश्चित करना है। इसी भावना के अनुरूप समाज में समरसता, पारस्परिक सम्मान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
बैठक में संगठनात्मक विषयों पर भी व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न मंडलों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में चल रहे संगठनात्मक कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों, सदस्यता विस्तार, बूथ स्तर की गतिविधियों तथा जनभागीदारी से जुड़े अनुभव साझा किए। संगठन को और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने, कार्यकर्ताओं के नियमित प्रशिक्षण, समाज के प्रत्येक वर्ग तक संवाद बढ़ाने तथा जनसेवा आधारित गतिविधियों को विस्तार देने पर विशेष बल दिया गया।
पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित कार्यकर्ता होते हैं। प्रत्येक कार्यकर्ता यदि समाज के बीच रहकर सेवा, संवाद और विकास के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाए तो संगठन की विचारधारा और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी रूप से जनता तक पहुंचाया जा सकता है।
बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की भी चर्चा हुई। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, पेयजल, महिला एवं बाल विकास, युवाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा औद्योगिक निवेश जैसे विषयों पर विचार साझा किए गए। इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचे।
जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूत करने का विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग की अपेक्षाओं को समझते हुए विकास कार्यों को गति देना तथा जनता के बीच निरंतर संवाद बनाए रखना संगठन की प्राथमिकता है। जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही सुशासन का आधार है।
बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश के विकास, सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही संगठन को और अधिक सशक्त बनाने, जनसेवा की भावना के साथ कार्य करने तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास में सक्रिय योगदान देने का सामूहिक संकल्प लिया।
भोपाल विधानसभा में आयोजित यह आत्मीय संवाद केवल संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक समानता, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय एकता और जनकल्याण के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। सभी उपस्थित पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि विकास, सुशासन और जनसेवा के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश प्रगति के नए आयाम स्थापित करता रहेगा।









