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लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में सेतु निर्माण परियोजनाओं की प्रगति पर मंथन

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HQ Report
समय-सीमा, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ निर्माण कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश, नए सेतुओं में रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगी अनिवार्य
भोपाल, 24 जुलाई। मध्यप्रदेश में सड़क एवं सेतु अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा संचालित सेतु निर्माण परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए वल्लभ भवन में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय मंत्री ने प्रदेश में निर्माणाधीन विभिन्न सेतु परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की तथा अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों को समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित निर्माण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन सेतु परियोजनाओं की जिलेवार एवं परियोजनावार प्रगति का विस्तार से अवलोकन किया गया। प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्य की गति, तकनीकी प्रगति, वित्तीय स्थिति तथा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्यों के निष्पादन की समीक्षा की गई। जिन परियोजनाओं में कार्य संतोषजनक गति से चल रहे हैं, उनकी सराहना की गई, वहीं जिन परियोजनाओं में विलंब या अन्य प्रकार की कठिनाइयाँ सामने आई हैं, उनके शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए। समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में निर्माणाधीन सभी सेतु परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। अधिकारियों से कहा गया कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए प्रत्येक चरण की प्रगति पर सतत निगरानी रखी जाए, ताकि नागरिकों को समय पर बेहतर अधोसंरचना का लाभ मिल सके। बैठक के दौरान भविष्य की सेतु परियोजनाओं को अधिक टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने पर भी विशेष बल दिया गया। निर्देश दिए गए कि नए सेतु निर्माण कार्यों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। इससे वर्षा जल का संरक्षण होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सेतु निर्माण की डिजाइन तैयार करते समय जल संरक्षण संबंधी प्रावधानों को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में निर्माण कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी परियोजनाओं की प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नियमित रूप से अपडेट की जाए, जिससे कार्यों की पारदर्शिता बढ़े और किसी भी प्रकार की देरी या तकनीकी समस्या की समय रहते पहचान कर उसका समाधान किया जा सके। आधुनिक तकनीक के उपयोग से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों एवं ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार प्रणाली को प्रभावी बनाया जाएगा। वहीं, निर्माण कार्यों में लापरवाही, गुणवत्ता से समझौता अथवा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में स्पष्ट किया गया कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्यों के दौरान भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) तथा अन्य निर्धारित तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा उपायों तथा नियमित निरीक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। कहा गया कि मजबूत एवं टिकाऊ सेतु केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर तैयार किए जाने चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को बेहतर सड़क और सेतु नेटवर्क से जोड़ना राज्य सरकार की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मजबूत सेतु अधोसंरचना से ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क बेहतर होगा, परिवहन लागत कम होगी, व्यापार एवं उद्योग को गति मिलेगी तथा नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी।
समीक्षा के दौरान विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी एवं प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों के दौरान आने वाली चुनौतियों, भूमि संबंधी मामलों, सामग्री की उपलब्धता, मौसम के प्रभाव तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्रस्तुत की। संबंधित अधिकारियों को सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अनेक महत्वपूर्ण सेतु परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलेगा, यात्रा का समय कम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही आपातकालीन सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। समीक्षा बैठक में यह भी कहा गया कि प्रदेश के विकास की गति को बनाए रखने के लिए अधोसंरचना परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है। मजबूत सड़क एवं सेतु नेटवर्क न केवल आर्थिक विकास का आधार बनता है, बल्कि निवेश, औद्योगिक विस्तार, पर्यटन और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा प्रदान करता है। बैठक में लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश के सभी सेतु संभागों के मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, तकनीकी विशेषज्ञ, ठेकेदार एवं निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों के अनुरूप परियोजनाओं को पूर्ण करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। बैठक के समापन पर यह दोहराया गया कि प्रदेश में चल रहे प्रत्येक सेतु निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य ऐसी आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ अधोसंरचना का निर्माण करना है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्रदान करे। समयबद्ध निर्माण, पारदर्शी कार्यप्रणाली, आधुनिक तकनीक का उपयोग, जल संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता तथा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान—इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर मध्यप्रदेश में सेतु निर्माण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि नागरिकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर आवागमन की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध हो सके।
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