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HQ Report
संस्कार भारती एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त आयोजन में राष्ट्र निर्माण, सेवा और समर्पण के संदेश को किया गया प्रस्तुत
सतना। विट्स महाविद्यालय सभागार, सतना में संस्कार भारती एवं संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं आद्य सरसंघचालक परम पूज्य डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित महानाट्य का मंचन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों, संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता की।
महानाट्य के माध्यम से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, उनके सामाजिक कार्यों तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण को नाट्य रूपांतरण के जरिए प्रस्तुत किया गया। मंचन में उनके जीवन के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाते हुए राष्ट्र निर्माण, संगठन, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को कलात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों के माध्यम से समाज में संगठन, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना के महत्व पर बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति सकारात्मक योगदान देने की भावना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
महानाट्य के मंचन के दौरान कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय और प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को डॉ. हेडगेवार के जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित कराया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक बताया।

इस अवसर पर मध्य प्रदेश शासन की मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सतना सांसद श्री गणेश सिंह, सतना महापौर श्री योगेश ताम्रकार, दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय सचिव श्री अभय महाजन, महाकौशल प्रांत के कार्यवाह श्री उत्तम बनर्जी, श्री संतकुंज आश्रम के महंत परम पूज्य स्वामी श्री साकेत बिहारी शरण जी महाराज, सतना के चेयरमैन श्री सुनील सेनानी, श्री मणिकांत महेश्वरी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को भी अभिव्यक्त किया गया। उपस्थित अतिथियों ने संस्कृति और कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक मूल्यों के प्रसार के ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया तथा कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम नई पीढ़ी को इतिहास, संस्कृति और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।










