
विशेष साक्षात्कार में साझा किए सेवा जीवन के अनुभव, कहा—वर्दी अधिकार नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक है
भोपाल। लगभग तीन दशकों तक पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने के बाद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी अमित सब्बरवाल ने गरिमापूर्ण ढंग से अपनी सेवा यात्रा पूरी की। 28 वर्षों के लंबे कार्यकाल में उन्होंने केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनसहभागिता, संवेदनशील पुलिसिंग, प्रशासनिक नवाचार और मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से पुलिस सेवा को समाज के अधिक निकट लाने का सतत प्रयास किया। सेवा निवृत्ति के अवसर पर दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने अनुभव, संघर्ष, उपलब्धियों और जीवन मूल्यों को साझा करते हुए स्पष्ट कहा कि वर्दी व्यक्ति को अधिकार अवश्य देती है, लेकिन उससे कहीं अधिक जिम्मेदारी भी सौंपती है। अमित सब्बरवाल ने कहा कि सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि समाज में विश्वास, सुरक्षा और न्याय की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में यही प्रयास किया कि पुलिस और आमजन के बीच संवाद और विश्वास का रिश्ता विकसित हो। उनका मानना है कि किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार या पद नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और सम्मान होता है। उन्होंने अपनी सेवा यात्रा को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्ति मिली और पहली बार वर्दी पहनने का अवसर मिला, तब वह क्षण जीवन के सबसे भावुक और प्रेरणादायक पलों में से एक था। उस समय उन्हें अपने माता-पिता, शिक्षकों, प्रशिक्षण संस्थानों और उन सभी लोगों का स्मरण हुआ जिन्होंने जीवन के हर मोड़ पर उनका मार्गदर्शन किया। उनके अनुसार वर्दी पहनना केवल एक प्रशासनिक दायित्व स्वीकार करना नहीं, बल्कि संविधान और समाज के प्रति आजीवन समर्पण का संकल्प लेना है। सेवा के दौरान मिले अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक पदस्थापना ने उन्हें कुछ नया सिखाया। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर बड़े शहरों तक कार्य करते हुए उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं को निकट से समझा। उनके अनुसार एक पुलिस अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण संवेदनशीलता है। यदि अधिकारी लोगों की बात धैर्यपूर्वक सुनता है और निष्पक्ष निर्णय लेता है, तो पुलिस व्यवस्था के प्रति नागरिकों का विश्वास स्वतः बढ़ता है।
अमित सब्बरवाल ने अपने प्रारंभिक जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि इंजीनियरिंग की शिक्षा ने उन्हें तकनीकी सोच और विश्लेषण की क्षमता दी, जबकि सैनिक स्कूल ने अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संस्कार दिया। इन्हीं मूल्यों ने उन्हें पुलिस सेवा की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समाज के बीच रहकर लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना हमेशा उनका सबसे बड़ा उद्देश्य रहा। उन्होंने अपने सेवा जीवन की अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया। विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षक तथा अन्य प्रशासनिक पदों पर रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा दिया। उनका मानना है कि पुलिस तभी प्रभावी बन सकती है जब वह समाज के सहयोग से कार्य करे। उन्होंने कई स्थानों पर जनभागीदारी से नवाचार किए, जिनका उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण नहीं बल्कि नागरिकों के साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत करना था। साक्षात्कार में उन्होंने अपनी पहली पदस्थापना को विशेष रूप से याद किया। उनके अनुसार शुरुआती वर्षों ने उन्हें यह सिखाया कि किसी भी अधिकारी को निर्णय लेने से पहले परिस्थितियों को गहराई से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुभव के साथ प्रशासनिक क्षमता बढ़ती है, लेकिन ईमानदारी और संवेदनशीलता जैसे गुण शुरुआत से ही व्यक्ति के भीतर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में अनेक चुनौतियां आती हैं। कई बार ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो कठिन होते हैं, लेकिन यदि निर्णय निष्पक्ष और कानून के अनुरूप हो तो अंततः समाज उसका सम्मान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में ईमानदारी से समझौता नहीं करना चाहिए, क्योंकि यही एक अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी होती है। जनसहभागिता आधारित कार्यों का उल्लेख करते हुए अमित सब्बरवाल ने बताया कि कुछ स्थानों पर उन्होंने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियान भी चलाए। इन अभियानों का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्य करना नहीं, बल्कि समाज को विकास की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाना था। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन और नागरिक मिलकर कार्य करते हैं, तब स्थायी परिवर्तन संभव होता है। तकनीक आधारित पुलिसिंग के बारे में उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में डिजिटल तकनीक पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। डायल-100 जैसी आपातकालीन सेवाओं ने पुलिस की कार्यक्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाना पुलिस सेवा की सबसे बड़ी सफलता है।
युवाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जीवन में लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और धैर्य आवश्यक है। उन्होंने कहा कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। ईमानदारी, परिश्रम और आत्मविश्वास ही व्यक्ति को दीर्घकालीन सफलता दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा उनके माता-पिता रहे हैं। उनसे मिले संस्कारों ने उन्हें हर परिस्थिति में सही मार्ग पर चलने की शक्ति दी। उनके अनुसार परिवार के सहयोग और नैतिक मूल्यों के बिना कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सफल नहीं हो सकता। अपने सेवा जीवन का सबसे यादगार क्षण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब किसी पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है या किसी परिवार की समय पर सहायता की जा सके, वही किसी पुलिस अधिकारी के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। उन्होंने कहा कि सम्मान, पदक और प्रशस्तियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जनता का विश्वास और आशीर्वाद सबसे बड़ी उपलब्धि है। जब उनसे पूछा गया कि यदि आज उन्हें अपने 1998 वाले युवा स्वरूप से मिलने का अवसर मिले तो वे क्या सलाह देंगे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि रास्ता आसान नहीं होगा। कई कठिन परिस्थितियां आएंगी, निराशा भी मिलेगी, लेकिन कभी भी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का साथ नहीं छोड़ना। उन्होंने कहा कि अंत में व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कार्यों से होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही का भी प्रतीक है। इसलिए प्रत्येक पुलिस अधिकारी को अपने पद की गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्षता, संवेदनशीलता और मानवता के साथ कार्य करना चाहिए। पुलिस और जनता के बीच विश्वास का संबंध ही प्रभावी कानून-व्यवस्था की सबसे मजबूत नींव है।
सेवा निवृत्ति के अवसर पर उन्होंने अपने सभी वरिष्ठ अधिकारियों, सहयोगियों, अधीनस्थ कर्मचारियों तथा परिवार के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम होती है। उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल का श्रेय उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उनका साथ दिया। अमित सब्बरवाल की यह सेवा यात्रा इस बात का उदाहरण है कि ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना के साथ किया गया कार्य व्यक्ति को केवल एक सफल अधिकारी ही नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा भी बनाता है। लगभग 28 वर्षों तक पुलिस सेवा में रहते हुए उन्होंने जिस समर्पण और निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, वह आने वाले पुलिस अधिकारियों और युवाओं के लिए एक प्रेरक विरासत के रूप में याद किया जाएगा।