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HQ Report
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘साइबर तहसील परियोजना’ को पूरे प्रदेश में लागू किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से नामांतरण, बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व प्रकरणों का ऑनलाइन एवं केंद्रीकृत निराकरण किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को तहसीलों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिली है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में यह परियोजना लागू की जा चुकी है और इसे सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

साइबर तहसील परियोजना के अंतर्गत भूमि संबंधी मामलों के निपटारे की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। जून 2026 तक प्रदेश में 5.60 लाख से अधिक ऑनलाइन नामांतरण प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। परियोजना के तहत अधिकांश नामांतरण प्रकरणों का समाधान 25 दिनों के भीतर किया जा रहा है, जिससे वर्षों तक लंबित रहने वाले मामलों का समयबद्ध निपटारा संभव हुआ है। इससे राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनी है तथा नागरिकों का शासन पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।
नई व्यवस्था में नागरिकों को व्हाट्सएप, ई-मेल और एसएमएस के माध्यम से आवेदन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। दावा-आपत्ति संबंधी लिंक ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाते हैं तथा आदेश की प्रति भी डिजिटल माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त अद्यतन खसरा, नक्शे एवं अन्य भूमि अभिलेखों की प्रतियां भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे न केवल समय और धन की बचत हो रही है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप में भी कमी आई है। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण अभिलेखों की सुरक्षा और पारदर्शिता भी बढ़ी है।










