Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

“घर बना खण्डहर” – सफलता की दौड़ में स्वास्थ्य की अनदेखी से उजड़ रहे हजारों घर

Author Image
Written by
HQ Report

पहला पैरा: सफलता का शिखर और खालीपन का एहसास

देश की आर्थिक राजधानी से लेकर छोटे कस्बों तक आज हर व्यक्ति के मन में एक ही सपना है – सबसे आगे निकलना, सबसे अमीर बनना, सबसे बड़ा घर बनाना। इसी दौड़ में हमारा समाज पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व तरक्की भी कर चुका है। स्टार्टअप, बिजनेस, नौकरी, प्रॉपर्टी हर क्षेत्र में नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। मध्यप्रदेश के भिंड जिले के सबलगढ़ कस्बे के एक सेठ जी की कहानी इसी सफलता की जीती जागती मिसाल है। दिन रात मेहनत, बिना छुट्टी, बिना आराम। परिवार से दूर, नींद से दूर, स्वास्थ्य से दूर। और आखिरकार एक दिन वे शहर के सबसे धनी व्यक्ति बन गए। उनकी इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए उन्होंने करोड़ों रुपये खर्च करके एक आलीशान बंगला बनवाया। संगमरमरी फर्श, विदेशी फर्नीचर, झूमर, स्विमिंग पूल, हर सुख सुविधा। गृह प्रवेश की पार्टी में पूरा शहर आया। तालियां बजीं, बधाइयां मिलीं। रात को जब मेहमान चले गए और सेठ जी थकान से चूर अपने नए बिस्तर पर लेटे, तो उन्हें लगा अब जीवन सेट है। अब बस भोगना है। लेकिन ठीक उसी रात उनके कानों में एक आवाज गूंजी – “मैं तुम्हारी आत्मा हूं, और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़कर जा रही हूं।” ये शब्द किसी खौफनाक फिल्म के डायलॉग नहीं थे, ये सच्चाई थी। सेठ जी घबरा गए। उन्होंने कहा कि मैंने ये सब तुम्हारे लिए ही तो किया है। ये घर, ये पैसा, ये नाम। लेकिन आत्मा का जवाब समाज के आईने जैसा था। उसने कहा ये मेरा घर नहीं है। मेरा असली घर तुम्हारा शरीर था। और तुमने करोड़ों कमाने के चक्कर में उस घर की नींव ही खोखली कर दी। आज वो शरीर ब्लड प्रेशर, शुगर, मोटापा, कमर दर्द, नींद न आना और तनाव जैसी बीमारियों का अड्डा बन चुका है। जिस तरह एक जर्जर मकान में कोई नहीं रहना चाहता, उसी तरह मैं भी अब इस बीमार शरीर में नहीं रह सकती। और फिर आत्मा निकल गई। सेठ जी का करोड़ों का बंगला रह गया, पर उसमें रहने वाला कोई नहीं बचा।

Advertisement Box

दूसरा पैरा: आंकड़े चीख रहे हैं, हम बहरे बने हैं

सेठ जी की कहानी कोई अपवाद नहीं है। ये आज के भारत की सबसे बड़ी सच्चाई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण और ICMR के ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में 40 साल से कम उम्र के लोगों में हृदय रोग, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामले 300 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। महानगरों के कॉरपोरेट अस्पतालों में सुबह 6 बजे से OPD में लाइन लग जाती है। कारण एक ही है – लाइफस्टाइल। डॉक्टर बताते हैं कि मरीज अब शिकायत लेकर नहीं, रिपोर्ट लेकर आते हैं। 32 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर, 28 साल की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, 35 साल का व्यापारी – सभी की एक ही कहानी। 12-14 घंटे काम, डिलीवरी का प्रेशर, टार्गेट का तनाव, बाहर का खाना, 5 घंटे की नींद, और व्यायाम के लिए समय ही नहीं। मनोवैज्ञानिक इसे “Success Burnout Syndrome” कहते हैं। हम मकान को मजबूत बनाने के लिए सीमेंट, सरिया, इंजीनियर पर लाखों खर्च कर देते हैं। लेकिन उस मकान में रहने वाले शरीर के लिए 30 मिनट टहलने का समय नहीं निकाल पाते। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि आज लोग महीने में एक बार कार का सर्विस कराते हैं, लेकिन साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप नहीं कराते। हम EMI पर फ्रिज, AC, कार ले आते हैं, लेकिन अपनी प्लेट में हरी सब्जी और दाल रखना बोझ लगने लगता है। सबलगढ़ के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.के. शर्मा कहते हैं कि पिछले 5 साल में उनके पास आने वाले मरीजों की औसत उम्र 15 साल कम हो गई है। पहले 55 की उम्र में जो बीमारियां आती थीं, वो अब 35 में दस्तक दे रही हैं। कारण साफ है – हमने शरीर को मशीन समझ लिया और उससे लगातार काम लिया, बिना सर्विसिंग के।

तीसरा पैरा: परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था पर असर

इस “खण्डहर शरीर” की कीमत सिर्फ व्यक्ति को नहीं चुकानी पड़ रही। इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ रहा है। जब घर का कमाने वाला ही बीमार पड़ जाए तो उस आलीशान घर की किश्त कौन भरेगा? बच्चों की फीस कौन देगा? मध्यप्रदेश के कई जिलों में बीमा कंपनियों का डेटा बताता है कि 30 से 45 आयु वर्ग में क्लेम सबसे ज्यादा बढ़े हैं। हार्ट अटैक और स्ट्रोक अब बुढ़ापे की बीमारी नहीं रहे। सामाजिक स्तर पर देखें तो रिश्ते टूट रहे हैं। पति पत्नी के पास एक दूसरे के लिए समय नहीं। माता पिता बच्चों से बात नहीं कर पा रहे क्योंकि सब अपने फोन और काम में व्यस्त हैं। हमने भौतिक सुख के सारे संसाधन जुटा लिए, पर शांति, नींद और संतोष गायब हो गया। अर्थशास्त्री इसे “Unhealthy Growth” कहते हैं। देश की GDP बढ़ रही है, लेकिन “Health GDP” गिर रही है। कंपनियां कर्मचारियों पर मेडिकल खर्च बढ़ा रही हैं। सरकार को अस्पतालों और दवाओं पर सब्सिडी देनी पड़ रही है। एक तरफ हम “Fit India” की बात करते हैं, दूसरी तरफ कॉरपोरेट कल्चर में 10 बजे रात तक मीटिंग नॉर्मल मानी जाती है। स्कूलों में बच्चे 6 घंटे पढ़ते हैं, फिर 4 घंटे ट्यूशन। खेल का मैदान खाली पड़ा है। हमने अपने बच्चों को भी वही सेठ बना दिया है जो सफलता के लिए स्वास्थ्य की बलि दे रहे हैं। सबलगढ़ के एक स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि बच्चों में मोटापा, चश्मा और तनाव के केस अब आम हो गए हैं। हमने शिक्षा तो दी, पर सेहत की शिक्षा नहीं दी।

चौथा पैरा: समाधान क्या है – आत्मा को रोकने का तरीका

क्या इसका मतलब है कि मेहनत न करें, सफल न बनें? बिल्कुल नहीं। सेठ जी की आत्मा ने भी यही कहा कि घर गलत नहीं था, घर बनाने का तरीका गलत था। विशेषज्ञों का मानना है कि सफलता और स्वास्थ्य दोनों साथ चल सकते हैं, बशर्ते प्राथमिकता तय हो। पहला नियम है – शरीर को “असेट” मानिए, “खर्च” नहीं। रोज 30 मिनट शरीर के लिए निकालिए। चाहे वॉक हो, योग हो या घर का काम। दूसरा नियम है – नींद से समझौता मत कीजिए। 6 से 7 घंटे की नींद दिमाग और दिल दोनों के लिए जरूरी है। तीसरा – खाना समय पर और घर का खाना। बाहर का तला भुना खाना सुविधा है, आदत नहीं बननी चाहिए। चौथा – मानसिक स्वास्थ्य। हफ्ते में एक दिन परिवार के साथ, मोबाइल से दूर। तनाव हो तो बात कीजिए, डॉक्टर से मिलिए। पंचायत स्तर पर भी अब योग शिविर, स्वास्थ्य मेलों की जरूरत है। सरकार ने आयुष्मान योजना दी है, लेकिन असली आयुष्मान तो रोकथाम है। कई कंपनियां अब “Work from Home” के साथ “Workout from Home” को भी बढ़ावा दे रही हैं। मध्यप्रदेश पुलिस का “नशे से दूरी” अभियान भी इसी दिशा में एक कदम है। क्योंकि नशा भी शरीर रूपी घर को खण्डहर बनाने का सबसे तेज तरीका है। सबलगढ़ के कई व्यापारियों ने अब “स्वस्थ व्यापारी संघ” बनाया है जो हर महीने फ्री हेल्थ चेकअप कराता है। ये छोटे कदम ही बड़े बदलाव लाएंगे।

पांचवां पैरा: नई परिभाषा गढ़नी होगी

सेठ जी के जाने के बाद उनका बंगला आज भी खड़ा है। लोग उसे देखकर कहते हैं “कितना बड़ा घर था”। लेकिन उस घर में रौनक नहीं है। ये दृश्य हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम किसके लिए कमा रहे हैं? किसके लिए बना रहे हैं? अगर उस घर में रहने वाले ही नहीं बचेंगे तो दीवारों का क्या करेंगे? आज जरूरत है सफलता की परिभाषा बदलने की। सफल वो नहीं जिसके पास सबसे बड़ा घर है। सफल वो है जो उस घर में स्वस्थ होकर, अपनों के साथ, चैन की नींद सो सके। सफल वो समाज है जहां अस्पतालों से ज्यादा पार्क भरे हों, जहां डॉक्टर से ज्यादा कोच हों। हमें अपने बच्चों को ये सिखाना होगा कि पहले शरीर, फिर करियर। पहले स्वास्थ्य, फिर धन। क्योंकि धन आता जाता रहेगा, पर स्वास्थ्य गया तो सब गया। आत्मा एक बार चली जाए तो करोड़ों का घर भी उसे वापस नहीं ला सकता।

छठा पैरा: जागिए, इससे पहले कि देर हो जाए

“घर बना खण्डहर” सिर्फ एक कहानी नहीं है। ये चेतावनी है। ये हर उस व्यक्ति के लिए है जो सुबह 9 से रात 9 काम करता है। हर उस छात्र के लिए है जो नींद काटकर पढ़ता है। हर उस गृहणी के लिए है जो परिवार के लिए खुद को भूल जाती है। मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में अब इस संदेश को घर-घर पहुंचाने की जरूरत है। पंचायत, स्कूल, मंदिर, क्लब हर जगह इस पर चर्चा हो। मीडिया, डॉक्टर और समाजसेवी मिलकर “स्वस्थ शरीर, समृद्ध घर” का अभियान चलाएं। सेठ जी का बंगला हमें विरासत में खाली दीवारें नहीं, एक सबक दे गया है। मंजिल तक पहुंचना जरूरी है, पर वहां पहुंचकर गिर जाना सबसे बड़ी हार है। तो आइए संकल्प लें। आज से अपने शरीर रूपी घर की मरम्मत शुरू करते हैं। सही खाना, सही नींद, थोड़ा व्यायाम और ढेर सारा सुकून। क्योंकि अंत में यादें काम आएंगी, बैंक बैलेंस नहीं। रिश्ते काम आएंगे, प्रॉपर्टी नहीं। और सबसे जरूरी – आपकी सांसें काम आएंगी। उन्हें बचाकर रखिए।

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू
आज फोकस में

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत
आज फोकस में

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
आज फोकस में

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान
आज फोकस में

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर
आज फोकस में

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान
आज फोकस में

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान

आज का राशिफल

वोट करें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें