Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

संजीव जैन की संवेदनशील रचना में रिश्तों की दूरी, बिछड़ने का खालीपन, यादों की परछाइयों और जीवन की स्वाभाविक गति को स्वीकार करने का भाव

Author Image
Written by
HQ Report
स्मृतियों के पन्नों से कभी भुलाए नहीं जा सकते अपने लोग
मनुष्य का जीवन केवल वर्तमान में घटने वाली घटनाओं का नाम नहीं है, बल्कि उसमें अतीत की स्मृतियां, रिश्तों की गर्माहट, बिछड़ने का दर्द, सपनों की उम्मीद और बीते हुए समय की अनगिनत तस्वीरें भी शामिल रहती हैं। संजीव जैन की रचना “स्मृतियों के पन्नों से” इसी भावनात्मक संसार को शब्द देती है। कविता उन रिश्तों और व्यक्तियों की स्मृतियों को केंद्र में रखती है जो कभी जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे, लेकिन समय, परिस्थितियों या किसी दूरी के कारण पीछे छूट गए। कवि का मूल प्रश्न बेहद सहज होते हुए भी गहरा है—यदि कोई अपना रूठ जाए, बहुत पीछे छूट जाए या दुनिया की नजर में कोई रिश्ता समाप्त हो जाए, तो क्या उससे जुड़ी स्मृतियां भी समाप्त की जा सकती हैं? रचना का उत्तर स्पष्ट है कि इतिहास को प्रमाण मिटाकर समाप्त नहीं किया जा सकता और उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में गहराई से अंकित स्मृतियों को भी केवल इच्छा से भुलाना संभव नहीं होता। यादें मन के भीतर अपना एक संसार बनाती हैं। वे कभी किसी पुराने संवाद के रूप में लौटती हैं, कभी किसी स्थान, वस्तु या आवाज के माध्यम से सामने आती हैं और कभी बिना किसी स्पष्ट कारण के मन को अतीत की ओर ले जाती हैं। कविता इसी मानवीय अनुभव को स्वीकार करती है कि जीवन में कुछ रिश्ते वर्तमान से भले दूर हो जाएं, लेकिन उनकी स्मृतियां मन की यात्रा का हिस्सा बनी रह सकती हैं। इसलिए उन्हें मिटाने की कोशिश करने के बजाय उन्हें समझना और उनके साथ सहज होना अधिक स्वाभाविक रास्ता हो सकता है।
रिश्ते टूट सकते हैं, लेकिन उनसे जुड़ा इतिहास हमेशा समाप्त नहीं होता। कविता की शुरुआत अपने किसी व्यक्ति के रूठ जाने और बहुत पीछे छूट जाने की स्थिति से होती है। दुनिया की दृष्टि में भले ही कोई रिश्ता टूट गया हो, लेकिन उससे जुड़े अनुभव, संवाद और भावनाएं मनुष्य के भीतर अपनी जगह बनाए रख सकते हैं। कवि ‘प्रमाण जलाने’ और ‘इतिहास मिटाने’ के प्रतीक के माध्यम से यह समझाता है कि किसी घटना के बाहरी प्रमाण नष्ट कर देने से उसका अस्तित्व मनुष्य की स्मृति से समाप्त नहीं हो जाता। जीवन में कुछ रिश्ते इतने गहरे प्रभाव छोड़ते हैं कि उनका अतीत व्यक्ति के व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाता है। किसी के साथ बिताया हुआ समय, साथ देखे गए सपने, साझा की गई खुशियां और कठिन परिस्थितियों में मिला साथ केवल कागज या तस्वीरों में दर्ज नहीं रहते, बल्कि मन की स्मृति में भी अंकित होते हैं। यही कारण है कि किसी रिश्ते के समाप्त होने के बाद भी उसकी याद कई बार लंबे समय तक बनी रहती है। कविता स्मृतियों को कमजोरी नहीं मानती, बल्कि उन्हें जीवन के इतिहास के रूप में स्वीकार करती है। किसी व्यक्ति को भूल जाना और उसके साथ जुड़े अनुभवों से मुक्त हो जाना दो अलग बातें हैं। समय के साथ यादों की तीव्रता कम हो सकती है, उनके साथ जुड़ा दर्द बदल सकता है और व्यक्ति आगे बढ़ सकता है, लेकिन बीते हुए जीवन को पूरी तरह मिटा देना संभव नहीं होता। रचना इसी वास्तविकता को संवेदनशीलता के साथ स्वीकार करने की प्रेरणा देती है।
मिलना और बिछड़ना जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, फिर भी हर बिछड़ना अपने पीछे एक खालीपन छोड़ जाता है। कविता में कहा गया है कि जीवन में मिलना और बिछड़ना कोई अपवाद नहीं है। मनुष्य का जीवन निरंतर परिवर्तन से गुजरता है। बचपन के साथी अलग हो जाते हैं, शिक्षा और रोजगार के कारण लोग अलग-अलग स्थानों पर चले जाते हैं, परिस्थितियां रिश्तों के स्वरूप को बदल देती हैं और कभी-कभी जीवन की अपनी गति लोगों को एक-दूसरे से दूर कर देती है। लेकिन किसी व्यक्ति के चले जाने से पैदा हुआ भावनात्मक खालीपन केवल बाहरी परिस्थितियों के बदल जाने से हमेशा समाप्त नहीं होता। समय के साथ व्यक्ति अपने जीवन में आगे बढ़ता है, नई जिम्मेदारियां निभाता है और नए संबंध बनाता है, फिर भी अतीत की कुछ जगहें भीतर बनी रह सकती हैं। कविता में इस खालीपन को स्वीकार करने की बात है। हर रिक्तता को तुरंत भर देना आवश्यक नहीं होता। कुछ खाली स्थान स्मृतियों के लिए बने रहते हैं और वे मनुष्य को उसके अतीत से जोड़े रखते हैं। इस दृष्टि से स्मृति केवल दुख का कारण नहीं, बल्कि जीवन की निरंतरता का प्रमाण भी है। जिस व्यक्ति ने हमारे जीवन को किसी समय प्रभावित किया, उसके चले जाने के बाद भी उसका प्रभाव हमारी सोच, व्यवहार और अनुभवों में दिखाई दे सकता है। इसलिए बिछड़ने के बाद मन को यह समझाना कि सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, हमेशा संभव नहीं होता। कई बार मन को नए जीवन की वास्तविकता स्वीकार करनी पड़ती है और उसी के साथ पुरानी स्मृतियों को भी अपने भीतर सम्मानपूर्वक स्थान देना पड़ता है।
यादें पीछे चलती हैं और सपने आगे की ओर ले जाते हैं—मनुष्य का जीवन इन दोनों के बीच आगे बढ़ता रहता है। कविता का यह भाव अत्यंत सुंदर है कि एक ओर अतीत की यादें व्यक्ति के पीछे-पीछे चलती हैं, जबकि दूसरी ओर भविष्य के सपने उसे आगे की ओर बुलाते रहते हैं। वर्तमान इन दोनों के बीच खड़ा हुआ जीवन का वह क्षण है जहां मनुष्य रोज अपनी उम्र के सूरज को ढलते हुए महसूस करता है। अतीत को पूरी तरह छोड़ देना संभव नहीं और भविष्य की ओर देखे बिना आगे बढ़ना भी कठिन है। मनुष्य इन्हीं दोनों के बीच अपना वर्तमान बनाता है। बीती यादें उसे अनुभव देती हैं, जबकि सपने उसे उम्मीद देते हैं। यदि व्यक्ति केवल अतीत में ही अटका रहे तो वर्तमान की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, लेकिन यदि वह अपने अतीत को पूरी तरह नकार दे तो उसके अनुभवों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी उससे दूर हो सकता है। इसलिए कविता का भाव इन दोनों के बीच संतुलन बनाने की ओर संकेत करता है। यादों को साथ लेकर चलना और सपनों की ओर बढ़ते रहना जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया हो सकती है। बीते समय से सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाना और भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित करना इसी संतुलन का हिस्सा है। उम्र लगातार आगे बढ़ती रहती है और समय किसी के लिए रुकता नहीं। इसलिए स्मृतियों का सम्मान करते हुए वर्तमान में जीना और भविष्य के लिए सपने देखना जीवन को अर्थपूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
धुंधली यादें कई बार सपनों का हिस्सा बनकर लौटती हैं और मन के भीतर अपनी परछाइयां छोड़ जाती हैं। समय बीतने के साथ स्मृतियों की तस्वीरें स्पष्ट नहीं रहतीं। कुछ घटनाएं पूरी तरह याद रहती हैं, जबकि कुछ के केवल छोटे-छोटे दृश्य, आवाजें या भाव मन में बचे रहते हैं। कविता इन धुंधली स्मृतियों को सपनों का हिस्सा बनने वाली परछाइयों के रूप में प्रस्तुत करती है। कई बार कोई पुरानी घटना अचानक नींद में दिखाई दे सकती है, कोई भूली हुई जगह सपने में लौट सकती है या कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के मन में उपस्थित हो सकता है। ऐसी स्मृतियां एक भूलभुलैया जैसी प्रतीत हो सकती हैं, जिनका कोई स्पष्ट आरंभ या अंत दिखाई नहीं देता। कविता पूछती है कि ऐसी संकेतों से भरी भूलभुलैया का छोर क्या हमेशा बताया जा सकता है? यह प्रश्न मनुष्य के अंतर्मन की जटिलता को सामने लाता है। हर स्मृति का अर्थ तुरंत समझ में आए, यह आवश्यक नहीं। मन में संचित अनुभव अलग-अलग समय पर अलग रूप में सामने आ सकते हैं। कुछ यादें खुशी देती हैं, कुछ भावुक करती हैं और कुछ हमें अपने जीवन के किसी पुराने दौर की ओर वापस ले जाती हैं। इन सबको जबरन समझने या मिटाने के बजाय कभी-कभी उन्हें सहज रूप से स्वीकार करना बेहतर होता है। समय के साथ उनकी तीव्रता और अर्थ दोनों बदल सकते हैं। मनुष्य को यह समझना होता है कि स्मृतियां उसके जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन वे उसके वर्तमान और भविष्य की पूरी दिशा तय नहीं करतीं। यही समझ व्यक्ति को अतीत के साथ संतुलित संबंध बनाने में सहायता करती है।
जब भुलाना संभव नहीं तो स्मृतियों से संघर्ष करने के बजाय उन्हें स्वीकार करना अधिक सहज रास्ता हो सकता है। कविता के अंतिम हिस्से में यही विचार सबसे स्पष्ट रूप में सामने आता है। यदि किसी स्मृति को पूरी तरह भुलाना संभव नहीं है तो उसे बार-बार मिटाने की कोशिश क्यों की जाए? व्यर्थ प्रश्नों और उत्तरों में उलझकर मन को और अधिक परेशान करने की आवश्यकता नहीं। जीवन में कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिनका कोई पूर्ण उत्तर नहीं मिलता। किसी रिश्ते के टूटने का कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता, किसी व्यक्ति के दूर चले जाने का कारण हमारे नियंत्रण में नहीं होता और बीते हुए समय को वापस लाना भी संभव नहीं। ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य के सामने दो रास्ते हो सकते हैं—वह लगातार अतीत से लड़ता रहे या फिर उसे जीवन की एक वास्तविकता के रूप में स्वीकार कर आगे बढ़े। कविता दूसरा रास्ता सुझाती है। इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति अपने भावनात्मक अनुभवों को दबा दे या उन्हें महत्वहीन मान ले। बल्कि इसका अर्थ है कि स्मृतियों को स्वीकार करते हुए स्वयं को वर्तमान में स्थापित किया जाए। कुछ यादें हमेशा हमारे साथ रह सकती हैं, लेकिन उनके साथ जीने का तरीका बदला जा सकता है। जो स्मृति कभी केवल पीड़ा देती थी, वही समय के साथ अनुभव और सीख का स्रोत बन सकती है। मनुष्य अपने अतीत को बदल नहीं सकता, लेकिन उसके प्रति अपना दृष्टिकोण बदल सकता है। यही स्वीकार्यता धीरे-धीरे मन को शांति की ओर ले जा सकती है।
“स्मृतियों के पन्नों से” मूलतः अतीत को मिटाने की नहीं, उसे समझकर जीवन में आगे बढ़ने की रचना है। कविता में बिछड़े रिश्ते, खालीपन, यादें, सपने, धुंधली परछाइयां और अंततः स्वीकार्यता—ये सभी भाव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रचना यह बताती है कि जीवन में मिलने वाले हर व्यक्ति और हर संबंध का प्रभाव हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कुछ लोग लंबे समय तक साथ रहते हैं, कुछ थोड़े समय के लिए आते हैं और कुछ समय के साथ बहुत दूर चले जाते हैं। लेकिन उनके साथ बिताया गया समय हमारे जीवन की कहानी में अपना एक अध्याय जोड़ देता है। उस अध्याय को फाड़कर पूरी पुस्तक को बदल देना संभव नहीं। स्मृतियों के पन्ने जीवन की उसी पुस्तक के हिस्से हैं। इसलिए अतीत को मिटाने के बजाय उससे सीख लेना और वर्तमान को बेहतर बनाना अधिक सार्थक हो सकता है। कविता पाठक को यह भी समझाती है कि खालीपन हमेशा कमजोरी नहीं होता; कभी-कभी वही खाली स्थान हमें अपनी भावनाओं को समझने और नए सपनों के लिए जगह बनाने का अवसर देता है। बीते रिश्तों की स्मृतियां मन में रहें और साथ ही जीवन नए रास्तों पर आगे बढ़ता रहे—यह दोनों बातें एक साथ संभव हैं। अंततः समय मनुष्य को सिखाता है कि हर स्मृति को भूलना जरूरी नहीं और हर स्मृति में हमेशा डूबे रहना भी जरूरी नहीं। कुछ यादों को बस मन के एक शांत कोने में सम्मान के साथ रहने देना होता है। क्योंकि जीवन आगे बढ़ता रहता है, लेकिन उसके सफर में लिखे स्मृतियों के कुछ पन्ने कभी पूरी तरह मिटते नहीं—वे समय-समय पर खुलते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि हम कौन थे, किन रिश्तों से गुजरे और किन अनुभवों ने हमें आज का इंसान बनाया।
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू
आज फोकस में

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत
आज फोकस में

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
आज फोकस में

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान
आज फोकस में

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर
आज फोकस में

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान
आज फोकस में

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान

आज का राशिफल

वोट करें

आमिर की अगली फिल्म 'सितारे जमीन पर' का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ। क्या यह फिल्म आमिर को बॉक्स ऑफिस पर सफलता दिला पाएगी?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें