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इंदौर में ‘सायबर वेलनेस केंद्र’ का भव्य शुभारंभ, महिलाओं और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा

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साइबर सुरक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल; तकनीकी मार्गदर्शन के साथ मानसिक एवं भावनात्मक सहयोग पर भी जोर
इंदौर। महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक कार्यालय, इंदौर में ‘सायबर वेलनेस केंद्र’ का भव्य शुभारंभ किया गया। डिजिटल युग में महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित, सजग और जिम्मेदार तरीके से इंटरनेट एवं ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग करने के लिए सक्षम बनाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह केंद्र अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म’ तथा कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित किया जाएगा। केंद्र के माध्यम से साइबर सुरक्षा के साथ-साथ डिजिटल स्वास्थ्य, ऑनलाइन जोखिमों और इंटरनेट के संतुलित उपयोग से जुड़े विषयों पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। वर्तमान समय में इंटरनेट, स्मार्टफोन और सामाजिक माध्यम बच्चों, महिलाओं तथा परिवारों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। शिक्षा, संवाद, बैंकिंग, मनोरंजन और जानकारी प्राप्त करने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे वातावरण में ऑनलाइन सुरक्षा से संबंधित जानकारी प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक हो गया है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए साइबर वेलनेस केंद्र को जागरूकता, मार्गदर्शन और परामर्श की दिशा में उपयोगी मंच के रूप में विकसित करने की योजना है।
महिलाओं और बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों से बचाने के लिए जागरूकता को प्राथमिकता दी जाएगी। डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी संदेश, संदिग्ध संपर्क, सामाजिक माध्यमों के दुरुपयोग और व्यक्तिगत जानकारी के अनुचित उपयोग जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। कई बार बच्चे और महिलाएं ऐसी परिस्थितियों का सामना करने के बाद यह समझ नहीं पाते कि उन्हें किससे सहायता लेनी चाहिए या समस्या का समाधान किस प्रकार किया जाए। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी जानकारी पर्याप्त नहीं होती, बल्कि प्रभावित व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता हो सकती है। साइबर वेलनेस केंद्र इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ डिजिटल सुरक्षा और कल्याण से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगा। इसका उद्देश्य लोगों को भयभीत करना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए सक्षम बनाना है। बच्चों को विशेष रूप से यह समझाने की आवश्यकता है कि इंटरनेट पर किसी अनजान व्यक्ति से संपर्क करते समय सावधानी क्यों जरूरी है, व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से क्या जोखिम हो सकते हैं और ऑनलाइन किसी परेशानी की स्थिति में माता-पिता, शिक्षक या विश्वसनीय व्यक्ति से सहायता लेना क्यों आवश्यक है।
साइबर सुरक्षा को तकनीकी विषय के साथ सामाजिक और मानवीय विषय के रूप में देखने पर जोर दिया गया। डिजिटल दुनिया में सुरक्षा केवल पासवर्ड या तकनीकी उपायों तक सीमित नहीं है। सुरक्षित व्यवहार, जागरूकता, सही जानकारी और किसी घटना की स्थिति में समय पर सहायता प्राप्त करना भी साइबर सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी उद्देश्य से केंद्र के माध्यम से इंटरनेट के सुरक्षित एवं संतुलित उपयोग के संबंध में तकनीकी मार्गदर्शन और परामर्श उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। महिलाओं के लिए ऑनलाइन उत्पीड़न, धोखाधड़ी और सामाजिक माध्यमों से जुड़े जोखिमों की जानकारी महत्वपूर्ण है, वहीं बच्चों के मामले में साइबर बुलिंग, अनुचित ऑनलाइन सामग्री, अनजान लोगों से संपर्क और अत्यधिक इंटरनेट उपयोग जैसी चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। डिजिटल माध्यमों का उपयोग पूरी तरह बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि सुरक्षित और संतुलित तरीके से उसका उपयोग करना अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण है। इस दिशा में परिवार, विद्यालय, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय की संयुक्त भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। जब बच्चों और महिलाओं को डिजिटल अधिकारों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी होगी, तो वे ऑनलाइन वातावरण में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकेंगे।
स्कूलों, आंगनवाड़ियों और समुदायों तक डिजिटल वेलनेस का संदेश पहुंचाने की योजना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चों तक जागरूकता पहुंचाने के लिए विद्यालय महत्वपूर्ण माध्यम हैं, जबकि छोटे बच्चों और परिवारों से जुड़े विषयों में आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसी प्रकार समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से अभिभावकों और अन्य नागरिकों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग किया जा सकता है। डिजिटल वेलनेस का अर्थ केवल साइबर अपराध से बचाव नहीं है, बल्कि इंटरनेट के संतुलित उपयोग, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, ऑनलाइन व्यवहार में जिम्मेदारी और डिजिटल माध्यमों के मानसिक प्रभावों को समझना भी है। बच्चों के लिए यह जरूरी है कि वे इंटरनेट का उपयोग शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों के लिए करें तथा किसी भी असहज ऑनलाइन अनुभव को छिपाने के बजाय विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से साझा करें। महिलाओं के लिए भी डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग, संदिग्ध संदेशों और संपर्कों की पहचान तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है। केंद्र के माध्यम से इस प्रकार की जागरूकता को व्यापक स्तर पर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि डिजिटल दुनिया में सुरक्षा और जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित हो सके।
सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय के समन्वय से साइबर सुरक्षा अभियान को व्यापक बनाने पर बल दिया गया। महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े विषयों में विभागीय प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं की विशेषज्ञता और समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म’ प्रोजेक्ट तथा कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस केंद्र का संचालन किया जाना डिजिटल जागरूकता को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर इंदौर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अमरेंद्र सिंह, अहान फाउंडेशन एवं ‘रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोनाली पाटणकर, सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी उमेश जोशी तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक संस्थाओं, विद्यालयों, अभिभावकों और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय से साइबर जागरूकता को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों में समय पर सहायता, सही मार्गदर्शन और संवेदनशील व्यवहार महत्वपूर्ण है।
‘सायबर वेलनेस केंद्र’ का उद्देश्य सुरक्षित डिजिटल समाज की दिशा में जागरूकता और सहयोग का वातावरण तैयार करना है। डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, रोजगार, संचार और सामाजिक संपर्क के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इन अवसरों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक नागरिक न केवल स्वयं को ऑनलाइन जोखिमों से बचा सकता है, बल्कि परिवार और समुदाय के अन्य लोगों को भी सजग कर सकता है। महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष जागरूकता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल दुनिया में उनके अनुभव और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं। केंद्र के माध्यम से तकनीकी जानकारी के साथ परामर्श और डिजिटल व्यवहार से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास इस पहल को व्यापक स्वरूप देता है। आने वाले समय में यदि स्कूलों, आंगनवाड़ियों और सामुदायिक स्तर पर जागरूकता गतिविधियों को नियमित रूप से आगे बढ़ाया जाता है, तो साइबर सुरक्षा के प्रति समझ और जिम्मेदारी को और मजबूत किया जा सकता है। इस पहल का मूल संदेश यही है कि डिजिटल दुनिया का उपयोग आधुनिक विकास का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसका सुरक्षित, संतुलित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना सरकार, संस्थाओं, परिवार और समाज की साझा जिम्मेदारी है।
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