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HQ Report
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने जिला न्यायपालिका के संबंध में महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए गुरुवार 27 अगस्त 2026 को अवकाश घोषित किया है। उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक A/3162 एक-7-3/2025 भाग-एक, दिनांक 25 अगस्त 2026 के अनुसार पूर्व में जारी रजिस्ट्री अधिसूचना क्रमांक बी/518, जबलपुर दिनांक 21 जनवरी 2026 में आंशिक संशोधन किया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत 27 अगस्त 2026 को जिला न्यायपालिका के लिए अवकाश रहेगा और इसके एवज में शनिवार 19 सितंबर 2026 को कार्यदिवस घोषित किया गया है। यह निर्णय माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति के आदेशानुसार जारी किया गया है। अधिसूचना पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (सतर्कता) राजेन्द्र कुमार शर्मा के हस्ताक्षर हैं। उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार 27 अगस्त को सूचीबद्ध मामलों के संबंध में भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। ऐसे मामलों को आगामी तारीख के लिए औपचारिक रूप से आदेशार्थ नियत नहीं किया जाएगा, बल्कि उनकी सुनवाई उसी प्रक्रम यानी Stage पर सुनिश्चित की जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक औपचारिकता और प्रक्रिया संबंधी विलंब को कम करना तथा सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना है। अधिसूचना जिला न्यायपालिका के प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों से जुड़े सभी संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के लिए प्रभावी होगी। उच्च न्यायालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार संबंधित न्यायालयों को अवकाश एवं वैकल्पिक कार्यदिवस की व्यवस्था के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करनी होगी। 27 अगस्त के अवकाश के बदले 19 सितंबर को कार्यदिवस रखे जाने से न्यायिक कार्यदिवसों की निर्धारित संख्या में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। न्यायालयों से जुड़े अधिवक्ताओं, पक्षकारों और अन्य संबंधित लोगों के लिए भी यह सूचना महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी सुनवाई एवं न्यायालयीन कार्य से संबंधित कार्यक्रमों को संशोधित व्यवस्था के अनुसार निर्धारित कर सकें। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि 27 अगस्त को सूचीबद्ध प्रकरणों को केवल अगली तारीख के लिए औपचारिक रूप से स्थगित करने के बजाय उनकी कार्यवाही उसी स्तर पर आगे बढ़ाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
27 अगस्त को सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई को लेकर उच्च न्यायालय ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिसूचना में कहा गया है कि 27 अगस्त 2026 को जो प्रकरण न्यायालयीन सूची में निर्धारित हैं, उन्हें आगामी दिनांक के लिए औपचारिक रूप से आदेशार्थ नियत न करते हुए उनकी सुनवाई उसी प्रक्रम पर सुनिश्चित की जाए। इसका आशय यह है कि अवकाश के कारण सूचीबद्ध मामलों की प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो और संबंधित प्रकरणों को उनके वर्तमान चरण से ही आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाए। न्यायालयीन कार्यवाही में किसी मामले का Stage महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्रत्येक प्रकरण अलग-अलग प्रक्रियात्मक चरणों से गुजरता है। ऐसे में उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि 27 अगस्त की सूची में शामिल प्रकरणों की सुनवाई को आगामी तारीख के लिए औपचारिक आदेश के रूप में दर्ज करने के बजाय उसी स्तर से आगे की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। संबंधित जिला न्यायालयों और न्यायिक अधिकारियों के लिए यह निर्देश प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण है। अधिवक्ताओं और पक्षकारों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे अपने-अपने प्रकरणों की स्थिति के संबंध में संबंधित न्यायालय या न्यायालयीन सूचना प्रणाली से अद्यतन जानकारी प्राप्त करते रहें। अधिसूचना के माध्यम से उच्च न्यायालय ने अवकाश की स्थिति में न्यायिक प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाए रखने का प्रयास किया है। सामान्यतः न्यायालयीन कैलेंडर में अवकाश के कारण निर्धारित मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है, लेकिन इस निर्देश के माध्यम से सूचीबद्ध मामलों की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से नियंत्रित करने का प्रयास किया गया है। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक रिकॉर्ड में भी प्रकरणों की स्थिति को लेकर स्पष्टता बनी रहेगी। संबंधित न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों को अधिसूचना के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही अधिवक्ताओं को भी अपने मामलों की अगली कार्यवाही से संबंधित जानकारी समय पर प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। उच्च न्यायालय का यह निर्देश न्यायिक प्रक्रिया की निरंतरता और प्रशासनिक स्पष्टता बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अवकाश के एवज में 19 सितंबर को कार्यदिवस घोषित किए जाने से न्यायपालिका के कार्यदिवसों में संतुलन कायम रहेगा। उच्च न्यायालय की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि गुरुवार 27 अगस्त 2026 के अवकाश के बदले शनिवार 19 सितंबर 2026 को कार्यदिवस रहेगा। इस व्यवस्था के तहत जिला न्यायपालिका में 19 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस के अनुरूप न्यायिक एवं प्रशासनिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। संबंधित न्यायालयों, अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संशोधित कैलेंडर के अनुसार अपनी उपस्थिति एवं कार्ययोजना सुनिश्चित करनी होगी। न्यायालयों की कार्यप्रणाली निर्धारित कैलेंडर और अधिसूचनाओं के आधार पर संचालित होती है, इसलिए अवकाश में परिवर्तन की जानकारी सभी संबंधित पक्षों तक पहुंचना आवश्यक है। अधिवक्ताओं के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्हें अपने मामलों की सुनवाई, दस्तावेजों की तैयारी और न्यायालय में उपस्थिति से संबंधित कार्यक्रम उसी के अनुसार तय करने होंगे। पक्षकारों को भी अपने प्रकरणों की तारीख और स्थिति की जानकारी संबंधित न्यायालय से प्राप्त करनी होगी। जिला न्यायपालिका में न्यायिक कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए अवकाश के बदले वैकल्पिक कार्यदिवस घोषित करने की व्यवस्था अपनाई जाती है। इससे न्यायिक कैलेंडर में कार्यदिवसों की संख्या को संतुलित रखने में मदद मिलती है। 19 सितंबर को कार्यदिवस घोषित होने से न्यायालयीन कर्मचारियों और अधिकारियों को भी अपनी व्यक्तिगत तथा प्रशासनिक योजनाओं में आवश्यक समायोजन करना होगा। संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा अन्य न्यायिक अधिकारियों को उच्च न्यायालय की अधिसूचना के अनुरूप आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उच्च न्यायालय द्वारा जारी यह आदेश पूरे जिला न्यायपालिका तंत्र के लिए प्रशासनिक रूप से प्रभावी है और इसे संबंधित स्तरों पर प्रसारित किया गया है।










