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सूरजपुर में ई-मेडलीएपीआर के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग की समन्वय बैठक, एमएलसी-पीएम रिपोर्ट के समयबद्ध ऑनलाइन निराकरण पर जोर

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सूरजपुर। स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, मेडिको-लीगल मामलों से संबंधित खिलाड़ियों को अधिक सुरक्षा एवं समयबद्धता बनाने और ई-मेडलीपीआर (मेडिको-लीगल इन्वेस्टिगेशन एंड पोस्टमॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम) के प्रभावी सहयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को जिला पंचायत सूरजपुर के सदन में महत्वपूर्ण सहयोग बैठक आयोजित की गई। यह बैठक पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशाधिकारी सूरजपुर श्री योगेश कुमार पटेल (भापुसे) ने आयोजित की। बैठक में ई-मेडलीपीआर सिस्टम के माध्यम से मेडिको-लीगल केस या मियासी और सेलेब्रिटी से रिलेटेड फोएव एवं रिपोर्ट की ऑनलाइन प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सिस्टम के संचालन के दौरान सामने आने वाली वैधिक एवं तकनीकी कर्मियों की जानकारी साझा की और उनके तत्काल आवश्यकता के लिए आवश्यक समन्वय पर चर्चा की। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच मेडिको-लीगल प्रकरणों से संबंधित जानकारी, फ़ोर्क, क्लिनिकल परीक्षण और नियुक्ति की प्रक्रिया में एस्थिमिअल न हो और डिजिटल माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का अधिकतम उपयोग किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि ई-मेडलीपीआर व्यवस्था केवल तकनीकी प्रणाली के रूप में न सहयोगी संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और कर्मचारियों के बीच प्रभावी कार्यप्रवाह का माध्यम बने। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर विश्लेषण की स्पष्टता, नियमित समीक्षा, तकनीकी सहायता और संवाद संवाद को महत्वपूर्ण माना गया है। पुलिस अधीक्षक ने बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों से सिस्टम के उपयोग की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली, जिसमें कहा गया कि डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी संचालन से संबंधित प्रकरणों में आवश्यक दस्तावेज और सहायक उपकरण की अधिकता हो सकती है। इस तरह के प्रकरणों की निगरानी, ​​सहायक मामलों की पहचान और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने में भी सहायता की आवश्यकता होती है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसी भी तकनीकी या प्रक्रियागत समस्या का कारण प्रकरण के रूप में से कोई नहीं रह रहा है और समस्या सामने आने पर संबंधित विभाग, समन्वय, समन्वय से उसका समाधान किया जा सकता है।

पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने बैठक में ई-मेडलीपीआर से संबंधित जमीनी स्तर पर प्रभावकारिता और स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच नियमित समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल सिस्टम की सफलता उसकी नियमित और निर्धारित प्रक्रिया के संरचनात्मक उपयोग पर निर्भर है। संबंधित अभिलेखों में ई-मेडलीपीआर के लिए नियुक्त या निर्धारित निलंबित अधिकारियों की भूमिका को प्रभावी बनाना आवश्यक है। पोर्टफोलियो अधिकारी अपने-अपने समकक्षों में सिस्टम के संचालन, प्रकरणों की निगरानी और आवश्यक दस्तावेजों पर संबद्धता के साथ समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बैठक में सी.सी.टी. शियाओस एवं ई-मेडली पीआर के माध्यम से प्राप्त सिससी और पीएटी रिक्वेस्ट की स्थिति की समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्राप्त दस्तावेजों का समय पर परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई की जाए और एलोकेशन की आवश्यकता है, सिलिकॉन सी रिपोर्ट द्वारा ऑनलाइन जनरेट की गई प्रक्रिया को निर्धारित किया जाए, व्यवस्था के ढांचे को आगे बढ़ाया जाए। बैठक में अवकाश की छुट्टियों और रिपोर्ट के एपिसोडों को प्राथमिकता के आधार पर देखने और उनकी शीघ्रता से जांच करने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि एपिसोडों की सीटों के पहलुओं की नियमित समीक्षा की जाए और यदि किसी मामले में तकनीकी समस्या, एनालॉग एसोसिएटेड बैच, डेटा संकलन, दस्तावेज़ अपलोड करना या किसी अन्य प्रक्रिया से संबंधित बाधा आती है तो स्तर पर संबद्ध सहयोग स्थापित कर उसका समाधान किया जाए। स्वास्थ्य पेशेवरों में कर्मचारियों और कर्मचारियों को ई-मेडलीपीआर की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि समय-समय पर तैयार करना और संबंधित प्रक्रिया में निर्धारित माध्यम से संबंधित दस्तावेजों के समय-परीक्षण निष्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। डिजिटल सिस्टम में एपिसोड दर्ज करने के बाद उसके विभिन्न स्टेज की निगरानी अधिक सुरक्षा तरीकों से की जा सकती है। इसलिए अधिकारियों से कहा गया है कि वे सिस्टम में प्राप्त आवेदकों को नियमित रूप से देखें, अपराधियों के प्रकरणों की पहचान करें और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनकी पहचान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करें। इस व्यवस्था के माध्यम से पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है और संबंधित प्रकरणों में आवश्यक दस्तावेज एवं कानूनी दस्तावेजों की साख में समय की बचत भी संभव है। पुलिस अधीक्षक ने किसी भी अधिकारी से नियमित संवाद बनाए रखने और स्तर पर उत्पन्न होने वाली समस्या को लेकर अवकाश कक्ष के स्थान पर संबंधित अधिकारियों के नोट्स में भी जोर दिया, ताकि सिस्टम का ऑपरेशन जारी रखा जा सके।
ई-मेडली पीआर व्यवस्था के माध्यम से मिकसी एवं अध्ययन से संबंधित प्रक्रिया को अधिकतम स्तर तक ऑनलाइन और समयबद्धता के साथ बैठक में महत्वपूर्ण एवं प्रक्रियागत आवश्यकता के रूप में विभाजित किया गया है। मेडिको-लीगल प्रकरणों में पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग दोनों की अहम भूमिका है। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है, जिसके बाद कैंची परीक्षण, मिस्त्री रिपोर्ट और अध्ययन से संबंधित दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में शामिल होने के बीच समय की सूचना में शामिल होने वाले-तहसील और अहम शख्सियतों की अहम भूमिका है। डिजिटल सिस्टम के माध्यम से इस कार्यप्रवाह को और अधिक सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में अधिकारियों ने माना कि ऑनलाइन प्रक्रिया के नियमित उपयोग से आवश्यक योग्यताएं और अवकाश के संप्रेषण में कमी और गति शामिल हो सकती है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को किसी भी प्रकरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त करने और प्रकरणों की समीक्षा करने में भी सुविधा मिल सकती है। ई-मेडलीएपीआर के सशक्त रसायन शास्त्र एवं छात्र-छात्राओं को आवश्यक दस्तावेज समय की दिशा में उपलब्ध कराना भी उपयोगी हो सकता है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद प्रत्येक एपिसोड में निर्धारित स्थान और शराब का पालन आवश्यक रूप से किया जाए। किसी भी स्तर पर, आवश्यक जानकारी की पूर्णता और संबंधित पुलिस अभिलेखों पर विशेष ध्यान दिया जाए। अधिकारियों ने इस बात पर भी चर्चा की कि यदि किसी प्रकरण में तकनीकी पहलू से प्रक्रिया प्रभावित होती है तो उसे तुरंत संबंधित तकनीकी या डिप्लॉयमेंट अधिकारी को सूचित किया जाए। इस प्रकरण को फार्मासिस्ट के रूप में अपार्टमेन्ट होने से बचने में मदद मिल सकती है। बैठक में फ्लोटीज़ और रिपोर्ट की नियमित समीक्षा के लिए एक सतत पर्यवेक्षण व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। संबंधित अधिकारी समय-समय पर सामग्री प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं और आवश्यकता के अनुसार संबंधित स्वास्थ्य संस्थान या पुलिस से समन्वय कर कार्रवाई को आगे बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार ई-मेडलीपीआर प्रणाली को स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच डिजिटल समन्वय का प्रभावशाली माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है। इसका व्यापक उद्देश्य प्रकरणों की प्रक्रिया को स्थिर, स्थिर, समयबद्ध और निर्धारित आधारभूत संरचना संचालित करना है। अधिकारियों ने यह भी माना कि तकनीकी व्यवस्था के साथ-साथ मानव संसाधन का प्रशिक्षण और नियमित मार्गदर्शन भी आवश्यक है। कर्मचारियों, पुलिस अधिकारियों, सीसीटी क्रूज़ कर्मचारियों और संबंधित कर्मचारियों को सिस्टम के विभिन्न चरण की जानकारी होने से लेकर एपिसोड के संचालन में सुविधा होगी और छोटे तकनीकी या प्रक्रिया समूह का स्थानीय स्तर पर समाधान किया जाएगा।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ई-मेडलीपीआर के संचालन के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के संबंधित अधिकारी समन्वय समन्वय से तत्काल कार्रवाई की जाएगी। किसी प्रकरण में तकनीकी समस्या उत्पन्न होने पर संबंधित स्तर पर इसकी जानकारी साझा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उपन्यास प्रकरणों की नियमित समीक्षा के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि नए प्राप्त जासूस एवं रिक्वेस्ट निर्धारित समय में संबंधित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ें। अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करायी गयी है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ई-मेडलीपीआर के प्रभावी ऑपरेशन के लिए केवल सिस्टम उपलब्ध होना जरूरी नहीं है, बल्कि उसका नियमित उपयोग, समय पर डेटा प्रबंधन, आवश्यक योग्यता का ऑनलाइन संप्रेषण और एपिसोड की निरंतर निगरानी भी जरूरी है। संबंधित अभिलेखागार में फिल्मी अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने वाले पात्र और उनके स्तर पर आने वाली स्टाक की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए अधिकृत की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रयोगशाला एवं संबंधित कर्मचारियों की ऑनलाइन फिजिक्स रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। इसी प्रकार पुलिस विभाग की ओर से सीसीटी कजाकिस्तान और ई-मेडलीपीआर के माध्यम से पुलिस अधिकारियों की नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में अधिकारियों का मानना ​​है कि प्रौद्योगिकी और प्रक्रियागत समस्याओं के समाधान में अधिक तेजी लाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से भविष्य में भी आवश्यकता के अनुरूप समन्वय बैठक का आयोजन कर सिस्टम के वास्तुशिल्प की समीक्षा की गई और शिक्षा के आधार पर व्यवस्था को और अधिक प्रभावशाली बनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि डिजिटल सिस्टम में प्रत्येक प्रकरण की स्थिति दर्ज करें, नजर स्तर से संबंधित मामलों को समय पर लागू किया जाए और संबंधित पर आवश्यक कार्रवाई की जानकारी दी जाए। बैठक के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य एवं पुलिस इकाइयों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए और ई-मेडलीपीआर के अंतिम ऑपरेशन के लिए आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की। इस संवाद से जमीनी स्तर पर आने वाली स्केल स्केल को समझने और उनके समाधान के लिए समन्वित दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता मिली। बैठक में यह भावना भी सामने आई कि स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच बेहतर स्थिति के साथ मेडिको-लीगल प्रकरणों से संबंधित परीक्षाओं को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है और निर्धारित समय सीमा में पूरी प्रक्रिया करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सहयोग समिति में संयोजनपी सैमसंगपुर अभिषेक पैंकरा , मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से संबंधित अधिकारी कर्मचारी, सहयोगी स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य परामर्श के अधिकारी-कर्मचारी, जिलों के विभिन्न विभाग एवं कर्मचारी कर्मचारी, जिले के विभिन्न विभाग एवं कर्मचारी कर्मचारी रह रहे हैं। बैठक में सभी संबंधित इकाइयों की प्रशंसा से ई-मेडली पीआर के प्रभावशाली स्टूडियो को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने नियमित समन्वय, सतत पर्यवेक्षण और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि स्वास्थ्य और पुलिस इकाइयों के बीच प्रकरणों से संबंधित आवश्यक जानकारी के साथ-साथ स्पष्टता बनी रही और ऑनलाइन प्रणाली में प्राप्त जानकारी और रिपोर्टों को निर्धारित प्रक्रिया के समय पर आगे बढ़ाया जाए। ई-मेडलीपीआर के प्रभावी उपयोग से सिटजी और संबंधित एपिसोड की प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने के कारण निगरानी और समीक्षा को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही डिवाइस लेवल पर जिम्मेदारी तय करने, अपार्टमेंट प्रकरणों की पहचान करने और उनके ठिकानों की दिशा में समयबद्ध कार्रवाई करने का अवसर भी मिलता है। बैठक में अधिकारियों ने इस व्यवस्था को नियमित रूप से मजबूत करने के लिए संवाद संवाद कायम रखने पर जोर दिया। स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग की संयुक्त बटालियन में किसी भी समय आने वाले ब्योरे स्तर पर उनके समाधान के बारे में बताया जाना आवश्यक है। जिला स्तर पर इस प्रकार की समन्वय बैठक का आयोजन के बीच कार्य प्रवाह को समझना और प्रासंगिक मुद्दों पर एक साथ चर्चा करना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल के निर्देशन में आयोजित बैठक के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को यह संदेश दिया गया कि सिलसी और अन्य संबंधित प्रकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के सिद्धांतों से लिया जाए और ऑनलाइन प्रणाली का सबसे प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने ई-मेडलीपीआर के संचालन को बेहतर बनाने के लिए अपने-अपने स्तर पर कदम बढ़ाने की सहमति दी। साथ ही समयबद्ध मामलों की स्थिति की समीक्षा करते हुए समयबद्धता की प्रक्रिया को गति देने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करने से भविष्य में मेडिको-लीगल प्रकरणों के दस्तावेजीकरण और निष्कर्ष प्रक्रिया के लिए और अधिक सुरक्षा बनाने में उपयोगी हो सकता है। जिला प्रशासन एवं संबंधित सूची का उद्देश्य यह है कि तकनीकी सहायकों का प्रभावी उपयोग करते हुए पुराने छात्रों का पालन सुनिश्चित किया जाए और नागरिकों से संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई समय पर पूरी हो। इस दिशा में नियमित पर्यवेक्षक, अधिकारियों के बीच बेहतर संवाद, तकनीकी सहयोग और कर्मचारियों का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सूरजपुर में इस समन्वय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापक उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास किया गया, जिसमें स्वास्थ्य एवं पुलिस विभाग ने ई-मेडलीपीआर की ऑनलाइन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, समयबद्ध और सुदृढ़ बनाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने की योजना बनाई।

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