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शांति निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय धींगपुर में 120 विद्यार्थियों ने लिया विधिक जागरूकता कार्यक्रम में भाग, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर हुई चर्चा

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सीकर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर के निर्देशानुसार राज्यव्यापी फ्लैगशिप कार्यक्रम के अंतर्गत स्कूली किशोरों को उनके विधिक अधिकारों, कर्तव्यों तथा समसामयिक कानूनी मुद्दों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी क्रम में 18 अगस्त 2026 को दांतारामगढ़ क्षेत्र के धींगपुर स्थित शांति निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अधिकार मित्र श्री झाबरमल सेवदा ने विद्यालय के किशोर विद्यार्थियों को बच्चों की सुरक्षा, उनके कानूनी अधिकारों तथा स्वयं को सुरक्षित रखने के आवश्यक उपायों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘‘शोषण के खिलाफ आवाज उठाओः स्वयं अपने रक्षक बनो, अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्शः फर्क समझो, सुरक्षित रहो’’ रखा गया। इस विषय के माध्यम से विद्यार्थियों को यौन दुर्व्यवहार की पहचान, उससे बचाव तथा किसी भी असहज अथवा अनुचित परिस्थिति में सजग रहने के महत्व के बारे में समझाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों में कानूनी जानकारी के साथ-साथ आत्मसुरक्षा, जागरूकता और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने की समझ विकसित करना रहा। विद्यालय में आयोजित इस शिविर में कुल 120 विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिनमें 65 छात्र और 55 छात्राएं शामिल थीं। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता से कार्यक्रम के प्रति विद्यालय स्तर पर जागरूकता और रुचि का पता चला। विधिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि कानून केवल न्यायालय और कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन में सुरक्षा, अधिकारों और जिम्मेदारियों से भी उसका सीधा संबंध है।
शिविर के दौरान अधिकार मित्र श्री झाबरमल सेवदा ने विद्यार्थियों के साथ यौन दुर्व्यवहार से संबंधित विषयों पर सरल एवं समझने योग्य तरीके से चर्चा की। विद्यार्थियों को अच्छे स्पर्श और बुरे स्पर्श के बीच अंतर समझने, असहज व्यवहार को पहचानने तथा ऐसी किसी भी स्थिति में चुप न रहने के संबंध में जागरूक किया गया। किशोरावस्था जीवन का ऐसा महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें बच्चों को अपने व्यक्तिगत अधिकारों, शारीरिक सुरक्षा और सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर की जानकारी होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि यदि उन्हें किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार, दबाव या असुरक्षित स्थिति महसूस होती है तो वे विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से सहायता प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थियों में यह समझ विकसित करना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा कि अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना किसी भय का विषय नहीं, बल्कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी और अधिकार का हिस्सा है। बच्चों को उनके साथ होने वाले अनुचित व्यवहार को पहचानने और आवश्यकता पड़ने पर उसकी जानकारी उचित माध्यम तक पहुंचाने के महत्व के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में यौन दुर्व्यवहार से सुरक्षा से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाले पॉक्सो अधिनियम यानी Protection of Children from Sexual Offences Act तथा किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को कानून के उद्देश्य और बच्चों के संरक्षण के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्था के बारे में सामान्य जानकारी प्रदान की गई। इस प्रकार कार्यक्रम में कानूनी जानकारी को बच्चों की दैनिक सुरक्षा और व्यवहारिक जागरूकता से जोड़कर प्रस्तुत किया गया, जिससे विद्यार्थी विषय को सहज रूप से समझ सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने के प्रति जागरूक रहें।
विधिक जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। विधिक जागरूकता का उद्देश्य केवल कानून की धाराओं और प्रावधानों की जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों और किशोरों में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की समझ विकसित करना भी है। विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता करते हैं कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। अपने साथ-साथ दूसरों की गरिमा और सुरक्षा का सम्मान करना, किसी अनुचित व्यवहार की स्थिति में उचित व्यक्ति से सहायता लेना तथा कानून द्वारा निर्धारित व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक रहना जिम्मेदार नागरिकता का हिस्सा है। कार्यक्रम में समसामयिक कानूनी मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। किशोरों के लिए कानून की मूलभूत जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जागरूक विद्यार्थी अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझने के साथ-साथ अपने आसपास के वातावरण में भी सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण केंद्र है और शिक्षा के साथ सुरक्षा एवं कानूनी जागरूकता भी उनके विकास का आवश्यक हिस्सा है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों से जुड़े मामलों में समय रहते जागरूकता पैदा करने से उन्हें संभावित जोखिमों को पहचानने और उचित सहायता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असहज स्थिति को नजरअंदाज न करने तथा आवश्यकता पड़ने पर अपने माता-पिता, अभिभावक, शिक्षक या भरोसेमंद वयस्क से बात करने के महत्व को समझाया गया। इस तरह शिविर ने विद्यार्थियों को कानूनी जानकारी के साथ संवाद और सहायता प्राप्त करने की सकारात्मक सोच से भी जोड़ा। विद्यालय में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम के दौरान दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना और बाल सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य कानून को आमजन, विशेषकर बच्चों और किशोरों तक सरल भाषा में पहुंचाना है। न्याय व्यवस्था की जानकारी तभी व्यापक रूप से उपयोगी बन सकती है, जब नागरिक अपने अधिकारों और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जागरूक हों। विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने से विद्यार्थियों को कम उम्र में ही कानून और नागरिक जिम्मेदारियों की बुनियादी समझ प्राप्त होती है। बाल सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूकता कार्यक्रमों का विशेष महत्व है, क्योंकि बच्चों को अपने अधिकारों और सुरक्षा उपायों की जानकारी मिलने से वे असामान्य या अनुचित परिस्थितियों को पहचानने में अधिक सक्षम हो सकते हैं। कार्यक्रम में पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम जैसे कानूनों के बारे में दी गई जानकारी इसी उद्देश्य की दिशा में महत्वपूर्ण रही। पॉक्सो कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण देने के लिए कानूनी व्यवस्था प्रदान करता है, जबकि किशोर न्याय से संबंधित कानून बच्चों की देखभाल, संरक्षण और उनसे जुड़े मामलों के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराता है। विद्यार्थियों को इन कानूनों की मूल भावना और उनके महत्व से परिचित कराया गया। इस प्रकार के कार्यक्रमों में कानून को कठिन कानूनी भाषा के बजाय विद्यार्थियों की समझ के अनुरूप सरल तरीके से प्रस्तुत करना जागरूकता के प्रभाव को बढ़ा सकता है। साथ ही विद्यालय प्रशासन, शिक्षक और अभिभावक भी बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चे यदि अपने आसपास के जिम्मेदार वयस्कों से बिना झिझक अपनी समस्या साझा कर सकें तो उन्हें समय पर सहायता मिल सकती है। इसलिए बाल सुरक्षा को लेकर विद्यालय, परिवार और समाज के बीच निरंतर संवाद और जागरूकता आवश्यक है। विधिक जागरूकता शिविर इसी संवाद को मजबूत करने का एक उपयोगी माध्यम है।
शांति निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, धींगपुर में आयोजित शिविर में कुल 120 विद्यार्थियों की सहभागिता रही, जिसमें 65 छात्र और 55 छात्राएं शामिल थीं। छात्र-छात्राओं की समान रूप से भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक स्वरूप दिया। किशोरों को यौन दुर्व्यवहार से बचाव, अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, सुरक्षा के उपाय तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या असुरक्षित परिस्थिति में जागरूक रहना और समय पर सहायता लेना आवश्यक है। बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में कानून के साथ परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यवहार और उनकी समस्याओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जबकि अभिभावकों का सहयोग बच्चों में विश्वास और सुरक्षा की भावना मजबूत कर सकता है। इसी प्रकार बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी देने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आवश्यकता पड़ने पर अपनी बात उचित व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्षम होते हैं। विधिक जागरूकता कार्यक्रम इस प्रक्रिया को मजबूत करने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि कानून का उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और सुरक्षा की भावना विकसित करना भी है। बच्चों और किशोरों को कानून की बुनियादी जानकारी मिलने से वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग बन सकते हैं और दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करना सीख सकते हैं। विद्यालय में आयोजित यह शिविर इसी व्यापक उद्देश्य के साथ संपन्न हुआ, जिसमें कानूनी जागरूकता को बाल सुरक्षा और जिम्मेदार नागरिकता से जोड़ा गया।
समग्र रूप से शांति निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, धींगपुर में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर स्कूली किशोरों को कानून, अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की दिशा में उपयोगी पहल रहा। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सीकर के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकार मित्र श्री झाबरमल सेवदा ने विद्यार्थियों को ‘‘शोषण के खिलाफ आवाज उठाओः स्वयं अपने रक्षक बनो, अच्छा स्पर्श-बुरा स्पर्शः फर्क समझो, सुरक्षित रहो’’ विषय के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम में यौन दुर्व्यवहार की पहचान, उससे बचाव, बच्चों की सुरक्षा तथा पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई। कुल 120 विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिनमें 65 छात्र और 55 छात्राएं शामिल रहीं। ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता इस बात में है कि विद्यार्थी कम उम्र में ही अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा से जुड़े विषयों को समझ सकें। कानून की जानकारी बच्चों में जागरूकता, आत्मविश्वास और उचित समय पर सहायता प्राप्त करने की क्षमता विकसित करने में सहायक हो सकती है। बाल सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि बच्चे स्वयं जागरूक हों, अभिभावक और शिक्षक उनके साथ संवाद बनाए रखें तथा समाज बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारी को समझे। विद्यालयों में नियमित रूप से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने से कानून और नागरिक जीवन के बीच संबंध को विद्यार्थियों तक सरल भाषा में पहुंचाया जा सकता है। इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों को न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करती है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और सजग नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। शांति निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित शिविर ने बाल सुरक्षा, कानूनी जागरूकता और आत्मसुरक्षा के महत्वपूर्ण विषयों को विद्यार्थियों के बीच पहुंचाने का कार्य किया। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि जागरूकता, संवाद और सही कानूनी जानकारी बच्चों की सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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