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शिक्षक राष्ट्र निर्माण की आधारशिला, उनके ज्ञान और संस्कारों से आकार लेता है देश का भविष्य : मंत्री नारायण सिंह कुशवाह

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शिक्षक दिवस पर ग्वालियर के शासकीय गोरखी उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षकों को प्रमाण-पत्र देकर किया सम्मानित; ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
ग्वालियर। शिक्षक दिवस एवं भारत रत्न, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के शासकीय गोरखी उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक सम्मान समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने सहभागिता करते हुए विद्यालय के शिक्षकों का सम्मान किया और शिक्षा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री कुशवाह ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। शिक्षक के ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण होता है और इन्हीं विद्यार्थियों के माध्यम से भविष्य के सशक्त राष्ट्र की नींव तैयार होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा प्राप्त करने का स्थान नहीं है, बल्कि बच्चों के जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी, नैतिकता, संवेदनशीलता और सामाजिक मूल्यों के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा देने का कार्य करते हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास भी प्रदान करते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में विद्यालय के समस्त सम्मानित शिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। मंत्री कुशवाह ने शिक्षा और समाज के प्रति शिक्षकों के समर्पण की सराहना करते हुए उनका अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक का योगदान कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव विद्यार्थी के पूरे जीवन और उसके माध्यम से समाज पर पड़ता है। शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों से परिचित कराते हैं। जब विद्यार्थी जिम्मेदार, संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनते हैं तो उसमें परिवार के साथ शिक्षक द्वारा दिए गए मार्गदर्शन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। शिक्षक दिवस का अवसर इसी योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और शिक्षा के प्रति उनके समर्पण को स्मरण करते हुए समारोह में शिक्षक की गरिमा और उसके सामाजिक दायित्व को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के दौरान विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शिक्षा को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम बताया गया। मंत्री कुशवाह ने शिक्षकों से भी विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ भारतीय जीवन मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना से जोड़ने का आह्वान किया।
शिक्षक केवल शिक्षा नहीं देते, जिम्मेदार नागरिक के निर्माण में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका: शिक्षक सम्मान समारोह में मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध को समाज के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं देता, बल्कि उनके भीतर अच्छे विचार, संस्कार और अनुशासन विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थी अपने जीवन का एक बड़ा समय विद्यालय में व्यतीत करते हैं और इस दौरान शिक्षक के व्यवहार, मार्गदर्शन और शिक्षा का उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि शिक्षक को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला कहा जाता है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आने वाली पीढ़ी होती है और नई पीढ़ी को ज्ञानवान, आत्मनिर्भर, जिम्मेदार तथा संवेदनशील बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। बदलते समय के साथ शिक्षा के स्वरूप में भी व्यापक परिवर्तन आया है। तकनीक और डिजिटल माध्यमों ने विद्यार्थियों के लिए ज्ञान के अनेक नए स्रोत उपलब्ध कराए हैं, लेकिन इन सभी साधनों के बीच शिक्षक की भूमिका समाप्त होने के बजाय और अधिक व्यापक हुई है। विद्यार्थियों के सामने उपलब्ध विशाल जानकारी में सही और उपयोगी ज्ञान का चयन करने, तार्किक सोच विकसित करने तथा शिक्षा को जीवन में उपयोगी बनाने के लिए शिक्षक का मार्गदर्शन आवश्यक है। विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के लिए तैयार करने के साथ उनके व्यक्तित्व विकास, संवाद क्षमता, सामाजिक व्यवहार और जिम्मेदार नागरिकता की भावना पर भी ध्यान देना आवश्यक है। मंत्री कुशवाह ने कहा कि शिक्षक इन सभी क्षेत्रों में विद्यार्थी को दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षक दिवस इसी योगदान के सम्मान का अवसर है। इस दौरान विद्यालय के शिक्षकों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाना उनके कार्य के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक रहा। शिक्षकों का सम्मान करते हुए उनके द्वारा वर्षों से विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। समारोह में यह संदेश भी सामने आया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल संसाधनों से संभव नहीं होती, बल्कि समर्पित शिक्षकों की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। शिक्षक अपनी मेहनत, अनुभव और संवेदनशीलता से अलग-अलग पारिवारिक एवं सामाजिक परिस्थितियों से आने वाले विद्यार्थियों को समान रूप से आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं। कई बार शिक्षक ही विद्यार्थी की छिपी हुई प्रतिभा को सबसे पहले पहचानते हैं और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ऐसे मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना और कठिन परिस्थितियों में निरंतर प्रयास करना सीखते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों के सम्मान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समाज को शिक्षकों के योगदान का सम्मान करते हुए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सहयोग करना चाहिए। अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक है। जब विद्यालय और परिवार मिलकर विद्यार्थी के विकास की दिशा में काम करते हैं तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर शिक्षा और शिक्षक की भूमिका का स्मरण: शिक्षक दिवस भारत के पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। गोरखी विद्यालय में आयोजित समारोह में उनके शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में योगदान को स्मरण करते हुए शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। डॉ. राधाकृष्णन एक प्रतिष्ठित शिक्षक, दार्शनिक और शिक्षाविद के रूप में जाने जाते हैं और उनके जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाना देश में शिक्षक के प्रति सम्मान की भावना को अभिव्यक्त करता है। समारोह में इस अवसर को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए शिक्षकों के वास्तविक योगदान को सम्मानित करने पर विशेष जोर रहा। मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने विद्यालय के शिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया। इस दौरान शिक्षा एवं समाज के प्रति उनके समर्पण की प्रशंसा की गई। शिक्षक दिवस विद्यार्थियों के लिए भी अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। विद्यालय में प्राप्त ज्ञान जीवन के विभिन्न चरणों में व्यक्ति का मार्गदर्शन करता है। शिक्षक विद्यार्थियों को सफलता के लिए परिश्रम करना सिखाते हैं, असफलता की स्थिति में निराश न होकर पुनः प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं और उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने में सहायता करते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं बल्कि जीवन की परिस्थितियों को समझने, सही निर्णय लेने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने की क्षमता विकसित करना भी है। इस व्यापक उद्देश्य की प्राप्ति में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक होता है। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वर्तमान पीढ़ी को ज्ञान और कौशल के साथ मानवीय मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। तकनीकी प्रगति के वर्तमान दौर में विद्यार्थियों को विज्ञान, नवाचार और आधुनिक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाना भी जरूरी है। शिक्षक इस संतुलन को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालयों में शिक्षा का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां विद्यार्थी प्रश्न पूछने, नई चीजें सीखने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित हों। शिक्षक का स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा पैदा करता है। शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह ने इसी संबंध को और मजबूत करने का अवसर प्रदान किया। समारोह में विद्यालय परिवार की सहभागिता ने इसे आत्मीय स्वरूप दिया। शिक्षकों के सम्मान के साथ यह संदेश भी सामने आया कि समाज में शिक्षा और शिक्षकों के प्रति सम्मान की परंपरा को निरंतर मजबूत किया जाना चाहिए। एक शिक्षित और संवेदनशील समाज के निर्माण के लिए विद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और विद्यालय की आत्मा उसके शिक्षक होते हैं। इसलिए शिक्षक दिवस पर उनका सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं बल्कि उनके निरंतर योगदान के प्रति समाज की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत पौधारोपण, विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का संदेश: शिक्षक सम्मान समारोह के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने पौधारोपण किया और उपस्थित लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। पौधारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विद्यालय परिसर में पौधारोपण का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश व्यवहारिक रूप में मिलता है। बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव सिखाया जाए तो वे भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील नागरिक बन सकते हैं। पौधा लगाना पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत है, लेकिन उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना और उसकी नियमित देखभाल करना उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी कारण कार्यक्रम में पौधारोपण के साथ पौधों की देखभाल का संदेश भी दिया गया। पर्यावरण संरक्षण आज समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बढ़ते शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच हरित क्षेत्र का संरक्षण आवश्यक है। विद्यालय इस दिशा में विद्यार्थियों को जागरूक करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। विद्यालयों में पौधारोपण, जल संरक्षण, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और प्रकृति संरक्षण जैसी गतिविधियों से बच्चों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी का व्यवहारिक अनुभव मिलता है। शिक्षक स्वयं इन गतिविधियों में सहभागी बनकर विद्यार्थियों के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षक सम्मान और पौधारोपण का एक साथ आयोजन शिक्षा तथा पर्यावरण के बीच इसी व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। एक ओर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर पौधारोपण के माध्यम से भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण के महत्व का संदेश दिया गया। मंत्री कुशवाह ने नागरिकों से पौधारोपण को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। पौधों के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर नागरिकों, विद्यार्थियों और संस्थाओं की सहभागिता उपयोगी हो सकती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करे तो सामूहिक प्रयासों से हरित वातावरण को मजबूत किया जा सकता है। विद्यालय में आयोजित इस गतिविधि ने विद्यार्थियों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। बच्चे जब अपने शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठ लोगों को पौधारोपण करते देखते हैं तो उनमें भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित होता है। इस तरह शिक्षक दिवस का कार्यक्रम शिक्षा के सम्मान के साथ पर्यावरणीय चेतना का संदेश देने वाला भी बना।
विद्यालय परिवार एवं गणमान्य नागरिकों की रही सहभागिता: गोरखी विद्यालय में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में विद्यालय परिवार के साथ विभिन्न जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता राजेन्द्र दंडोतिया, मंडल अध्यक्ष अमर कुटे, विद्यालय की प्राचार्य राजबाला माथुर, अर्पणा कुशवाहा, संजू तोमर, अर्चना वाजपेयी, मनोज उपाध्याय, अश्वनी परमार, पुष्पा शर्मा, गिरीश शर्मा और उपेन्द्र पाण्डे सहित विद्यालय परिवार एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त सम्मानित शिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान का अभिनंदन किया गया। शिक्षकों के लिए यह सम्मान उनके निरंतर प्रयासों और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के प्रति समर्पण को प्रोत्साहित करने वाला रहा। समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं साझा कीं और शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। विद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम को गरिमामय स्वरूप मिला। शिक्षक सम्मान के साथ पौधारोपण गतिविधि ने समारोह में सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी का एक अतिरिक्त आयाम जोड़ा। इस अवसर पर विद्यार्थियों को भी यह संदेश मिला कि अपने शिक्षकों का सम्मान करना और उनके मार्गदर्शन से जीवन में आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है। शिक्षकों के अनुभव और ज्ञान का लाभ विद्यार्थियों को तभी पूर्ण रूप से मिलता है जब विद्यार्थी अनुशासन, जिज्ञासा और परिश्रम के साथ शिक्षा ग्रहण करें। इसी प्रकार शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय शिक्षा के स्तर को और मजबूत कर सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों की सहभागिता ने शिक्षा को सामुदायिक जिम्मेदारी के रूप में देखने का संदेश दिया। विद्यालय केवल शिक्षक और विद्यार्थी तक सीमित संस्था नहीं है, बल्कि अभिभावकों और पूरे समाज का सहयोग भी उसकी प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्थानीय समुदाय विद्यालयों के विकास और विद्यार्थियों के प्रोत्साहन में सहयोग कर सकता है। शिक्षक दिवस के अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों का विद्यालय में एकत्र होकर शिक्षकों का सम्मान करना शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करता है। कार्यक्रम में शिक्षकों के सम्मान के साथ उनके दायित्व और उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया। यह भावना व्यक्त की गई कि शिक्षकों द्वारा दिया गया ज्ञान अनेक पीढ़ियों तक समाज को दिशा देता है। एक विद्यार्थी आगे चलकर जिस भी क्षेत्र में कार्य करे, उसकी प्रारंभिक शिक्षा और शिक्षक से प्राप्त संस्कार उसके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शिक्षक का सम्मान वास्तव में ज्ञान, संस्कार और शिक्षा का सम्मान है।
राष्ट्र के सशक्त भविष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कार दोनों जरूरी: शिक्षक दिवस पर आयोजित इस समारोह का समापन शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के सकारात्मक संदेश के साथ हुआ। सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने शिक्षक को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को जीवन की दिशा प्रदान करते हैं और यही विद्यार्थी आगे चलकर समाज एवं राष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाते हैं। इस दृष्टि से शिक्षक का कार्य वर्तमान पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। भारत जैसे युवा देश के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का महत्व और भी अधिक है। विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और कौशल से जोड़ने के साथ उनमें संस्कार, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी विकसित करना आवश्यक है। शिक्षक इन दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण सेतु हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के साथ सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व भी समझाते हैं। यही संतुलित शिक्षा विद्यार्थी को सफल व्यक्ति के साथ अच्छा नागरिक बनाने में सहायक होती है। शिक्षक दिवस हमें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को स्मरण करने का अवसर देता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम ने शिक्षा के महत्व और शिक्षक की गरिमा को रेखांकित किया। शिक्षकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित करने से उनके कार्य के प्रति सार्वजनिक सम्मान व्यक्त हुआ, जबकि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण ने भविष्य की पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस प्रकार समारोह में शिक्षा और प्रकृति दोनों के संरक्षण की भावना दिखाई दी। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, विद्यालय परिवार और गणमान्य नागरिकों ने शिक्षकों का अभिनंदन करते हुए शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
गोरखी विद्यालय का शिक्षक सम्मान समारोह इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि ज्ञानवान, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिकों से होता है और ऐसे नागरिकों के निर्माण में शिक्षक की भूमिका आधारशिला के समान है।
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