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विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने लिया साइबर सुरक्षा का संकल्प; सेल्फी के माध्यम से दिया जागरूकता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार का संदेश

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राजनांदगांव में साइबर जागृति अभियान, स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर पहुंची पुलिस
राजनांदगांव। साइबर अपराधों से बचाव और आम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राजनांदगांव पुलिस द्वारा जिले के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों एवं सार्वजनिक स्थानों पर “साइबर जागृति अभियान” चलाया गया। अभियान के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के महत्व की जानकारी दी गई तथा उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार तरीके से डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रमों में शामिल लोगों ने साइबर सुरक्षा को लेकर संकल्प भी लिया। बदलते दौर में मोबाइल फोन, इंटरनेट, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल माध्यमों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। शिक्षा, बैंकिंग, खरीदारी, संवाद और अनेक दैनिक गतिविधियां अब डिजिटल माध्यमों से संचालित हो रही हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता प्रत्येक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राजनांदगांव पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर लोगों के बीच साइबर जागरूकता का संदेश पहुंचाया। अभियान के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद करते हुए उन्हें डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। आम नागरिकों को भी साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता बरतने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में यह भावना प्रमुख रही कि साइबर अपराधों की रोकथाम में पुलिस की भूमिका के साथ नागरिकों की जागरूकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि लोग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें और संदिग्ध गतिविधियों के प्रति सजग रहें तो साइबर अपराधों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। अभियान के दौरान साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता को केवल जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि लोगों को संकल्प के माध्यम से इसे अपनी दैनिक आदतों का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। सार्वजनिक स्थानों पर भी आम नागरिकों से संवाद कर उन्हें डिजिटल दुनिया में सावधानी बरतने की आवश्यकता समझाई गई। अभियान की एक विशेष गतिविधि के रूप में साइबर जागरूकता के साथ सेल्फी लेकर सुरक्षा का संदेश भी दिया गया। सेल्फी के माध्यम से युवाओं और आम नागरिकों ने साइबर सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस पहल ने जागरूकता अभियान को युवाओं के बीच सहज और आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। साइबर सुरक्षा के संदेश को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए इस प्रकार की जनभागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। अभियान के दौरान लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग सुविधाजनक होने के साथ जिम्मेदारी भी मांगता है। किसी भी अनजान डिजिटल संपर्क, संदिग्ध संदेश अथवा असामान्य गतिविधि के प्रति सावधान रहना आवश्यक है। अपनी निजी जानकारी और डिजिटल पहचान की सुरक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों के बीच साइबर जागरूकता का विशेष महत्व है, क्योंकि युवा वर्ग डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग करता है। वहीं शिक्षक विद्यार्थियों के साथ-साथ अपने परिवार और समाज में भी जागरूकता का संदेश आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस प्रकार राजनांदगांव पुलिस का यह अभियान केवल एक कार्यक्रम न होकर सामूहिक साइबर सुरक्षा की दिशा में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास रहा।
स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को किया जागरूक: साइबर जागृति अभियान के अंतर्गत राजनांदगांव पुलिस द्वारा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पहुंचकर विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद किया गया। विद्यालय और महाविद्यालय युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। विद्यार्थी प्रतिदिन मोबाइल फोन, इंटरनेट और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। ऐसे में उन्हें साइबर सुरक्षा के सामान्य नियमों और सावधानियों की जानकारी होना आवश्यक है। अभियान के दौरान विद्यार्थियों को जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें यह समझने का संदेश दिया गया कि इंटरनेट पर उपलब्ध प्रत्येक जानकारी या प्रत्येक डिजिटल संपर्क विश्वसनीय हो, यह आवश्यक नहीं है। इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि के प्रति सावधानी बरतना जरूरी है। शिक्षकों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया, ताकि वे विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग के संबंध में मार्गदर्शन दे सकें। शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं और उनके माध्यम से साइबर सुरक्षा की जानकारी बड़ी संख्या में युवाओं तक पहुंचाई जा सकती है। विद्यार्थियों को जागरूक करने से इसका प्रभाव उनके परिवारों तक भी पहुंच सकता है। बच्चे और युवा घर पर अपने माता-पिता तथा अन्य सदस्यों के साथ डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हैं। यदि वे साइबर सुरक्षा के सामान्य नियमों को समझते हैं तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी सावधान कर सकते हैं। इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ अभियान को शैक्षणिक संस्थानों से जोड़ा गया। कार्यक्रमों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया। संकल्प का उद्देश्य लोगों में साइबर सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। केवल किसी कार्यक्रम में जानकारी प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे दैनिक जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाना भी आवश्यक है। डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय सावधानी, अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जैसी आदतें साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं। अभियान के दौरान युवाओं को सकारात्मक डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों ने भी जागरूकता गतिविधियों में उत्साह के साथ सहभागिता की। साइबर सुरक्षा को लेकर आयोजित गतिविधियों ने उन्हें अपने डिजिटल व्यवहार पर विचार करने का अवसर दिया। शिक्षकों की सहभागिता ने अभियान को शैक्षणिक वातावरण से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालयों और महाविद्यालयों में साइबर जागरूकता को निरंतर गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है, जिससे विद्यार्थियों में डिजिटल सुरक्षा की समझ मजबूत हो। पुलिस द्वारा शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा। इससे पुलिस और शिक्षा संस्थानों के बीच जनजागरूकता आधारित सहयोग को भी बढ़ावा मिलता है। विद्यार्थियों को जागरूक करने के साथ शिक्षकों को भी इस अभियान का सहभागी बनाया गया। इस प्रकार साइबर सुरक्षा का संदेश कक्षा से परिवार और परिवार से समाज तक पहुंचाने की संभावनाएं बनीं।
आम नागरिकों ने भी लिया साइबर सुरक्षा का संकल्प: साइबर जागृति अभियान को केवल स्कूल और कॉलेज तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर भी आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस द्वारा लोगों से संवाद करते हुए डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल की आवश्यकता बताई गई। आज लगभग हर वर्ग के लोग किसी न किसी रूप में मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग करते हैं। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहना भी जरूरी है। अभियान के दौरान आम लोगों को जागरूक किया गया कि डिजिटल दुनिया में सावधानी बरतना उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी अनजान व्यक्ति, संदेश या डिजिटल संपर्क पर तत्काल भरोसा करने के बजाय उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। व्यक्तिगत और महत्वपूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। लोगों को जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता को प्राथमिक उपायों में से एक माना जा सकता है। यदि नागरिकों को संभावित जोखिमों की जानकारी हो तो वे संदिग्ध परिस्थितियों में अधिक सतर्क रह सकते हैं। इसी उद्देश्य से पुलिस ने लोगों के बीच पहुंचकर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया। आम नागरिकों ने भी अभियान में सहभागिता करते हुए साइबर सुरक्षा का संकल्प लिया। संकल्प के माध्यम से लोगों ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति अपनी जिम्मेदारी व्यक्त की। साइबर सुरक्षा के प्रति जनभागीदारी अभियान की महत्वपूर्ण विशेषता रही। पुलिस द्वारा जानकारी देने के साथ नागरिकों को भी अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया गया। इस प्रकार जागरूकता केवल एकतरफा संदेश न रहकर सहभागिता आधारित गतिविधि बनी। सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों से संवाद करने से विभिन्न आयु वर्ग और सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। इसमें युवाओं के साथ वरिष्ठ नागरिक और अन्य डिजिटल उपयोगकर्ता भी शामिल हो सकते हैं। प्रत्येक वर्ग के लिए डिजिटल सुरक्षा की अपनी आवश्यकता होती है। इसलिए व्यापक जनजागरूकता अभियान साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं। लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि यदि वे किसी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि का सामना करें तो घबराने के बजाय उचित माध्यम से सहायता प्राप्त करें। समय पर जानकारी और जागरूकता साइबर अपराधों के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकती है। अभियान के दौरान नागरिकों को डिजिटल माध्यमों के उपयोग में सावधानी बरतने और जिम्मेदारी के साथ ऑनलाइन गतिविधियां करने के लिए प्रेरित किया गया। इस प्रकार राजनांदगांव पुलिस ने साइबर सुरक्षा को आम नागरिकों के दैनिक जीवन से जोड़ने का प्रयास किया।
सेल्फी के माध्यम से साइबर सुरक्षा का संदेश, युवाओं में दिखा उत्साह: साइबर जागृति अभियान के दौरान जागरूकता के साथ सेल्फी लेकर साइबर सुरक्षा का संदेश देने की पहल भी की गई। सेल्फी आज विशेषकर युवाओं के बीच संवाद और संदेश प्रसारित करने का लोकप्रिय माध्यम है। इसी माध्यम को साइबर जागरूकता से जोड़कर लोगों को अभियान का सहभागी बनाया गया। साइबर जागरूकता के साथ सेल्फी लेने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों ने सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया। इस गतिविधि से साइबर सुरक्षा का संदेश सकारात्मक और सहज तरीके से लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिला। जागरूकता अभियान में रचनात्मक गतिविधियों को शामिल करने से युवाओं की सहभागिता बढ़ सकती है। युवा वर्ग सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग करता है, इसलिए साइबर सुरक्षा का संदेश भी ऐसे माध्यमों के अनुरूप प्रस्तुत करना उपयोगी हो सकता है। सेल्फी गतिविधि इसी सोच का हिस्सा रही। लोगों ने जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होकर साइबर सुरक्षा के संदेश के साथ अपनी तस्वीरें साझा कीं और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की आवश्यकता को सामने रखा। इस प्रकार जागरूकता का संदेश व्यक्तिगत अनुभव से आगे बढ़कर सामाजिक संदेश का रूप ले सकता है। हालांकि डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय स्वयं की गोपनीयता का ध्यान रखना भी जरूरी है। किसी भी फोटो या जानकारी को सार्वजनिक करने से पहले उसके संभावित प्रभावों को समझना आवश्यक है। साइबर सुरक्षा केवल वित्तीय जानकारी की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और ऑनलाइन व्यवहार से भी जुड़ी हुई है। अभियान में सेल्फी गतिविधि के माध्यम से लोगों को इसी व्यापक साइबर जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों और युवाओं ने इसमें उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षकों और आम नागरिकों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस गतिविधि ने पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद का सहज माध्यम तैयार किया। साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर विषयों को सरल और सहभागितापूर्ण तरीके से प्रस्तुत करने से जागरूकता का संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है। राजनांदगांव पुलिस के अभियान में सेल्फी के माध्यम से सुरक्षा संदेश देना इसी प्रयास का हिस्सा रहा। लोगों ने साइबर सुरक्षा के संकल्प के साथ जागरूकता का संदेश दिया। इससे यह भावना सामने आई कि डिजिटल सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है और हर व्यक्ति अपनी भूमिका निभाकर साइबर अपराधों से बचाव के प्रयासों को मजबूत कर सकता है।
साइबर सुरक्षा में नागरिकों की भूमिका महत्वपूर्ण, जागरूकता को बनाया गया अभियान का आधार: राजनांदगांव पुलिस के साइबर जागृति अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना रहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या किसी तकनीकी विशेषज्ञ की जिम्मेदारी नहीं है। प्रत्येक डिजिटल उपयोगकर्ता को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क रहना आवश्यक है। आज मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से अनेक आवश्यक कार्य किए जाते हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को दैनिक जीवन की आदतों का हिस्सा बनाना जरूरी है। अभियान के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को जागरूक करते हुए उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। लोगों को यह संदेश दिया गया कि किसी भी अनजान या संदिग्ध डिजिटल संपर्क को लेकर सावधानी बरतें और बिना पुष्टि के कोई महत्वपूर्ण जानकारी साझा न करें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखना आवश्यक है। इसी तरह डिजिटल माध्यमों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि के प्रति सजग रहना चाहिए। साइबर अपराधों की रोकथाम में जागरूक नागरिक पुलिस की मदद भी कर सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि दिखाई देती है तो उचित माध्यम से उसकी जानकारी देना आवश्यक है। समय पर सूचना मिलने से संबंधित एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई में सहायता मिल सकती है। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है। तकनीक में बदलाव के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल सकते हैं। इसलिए नागरिकों को समय-समय पर नए जोखिमों और सुरक्षा उपायों की जानकारी प्राप्त करते रहना चाहिए। स्कूल और कॉलेज इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को नियमित रूप से साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जा सकती है। विद्यार्थी अपने परिवार और मित्रों के बीच भी इस संदेश को आगे बढ़ा सकते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उन नागरिकों तक भी जानकारी पहुंचाई जा सकती है जो शैक्षणिक संस्थानों से सीधे जुड़े नहीं हैं। इस प्रकार व्यापक जनभागीदारी से साइबर सुरक्षा का संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाया जा सकता है। राजनांदगांव पुलिस का अभियान इसी सामूहिक दृष्टिकोण को सामने लाता है। अभियान के दौरान साइबर सुरक्षा का संकल्प लेना और सेल्फी के माध्यम से सुरक्षा संदेश देना लोगों की सहभागिता को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां रहीं। इन गतिविधियों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि सुरक्षित डिजिटल समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। जागरूकता, सावधानी और जिम्मेदार व्यवहार साइबर सुरक्षा के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। यदि नागरिक इन बातों को अपनी दैनिक डिजिटल गतिविधियों में अपनाएं तो साइबर जोखिमों से बचाव की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
साइबर जागृति अभियान ने दिया सुरक्षित डिजिटल समाज का संदेश: राजनांदगांव पुलिस द्वारा विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर चलाया गया “साइबर जागृति अभियान” साइबर सुरक्षा को जनभागीदारी से जोड़ने वाला जागरूकता कार्यक्रम रहा। अभियान में विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों ने सहभागिता की तथा साइबर सुरक्षा का संकल्प लिया। लोगों को डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। अभियान के दौरान सेल्फी लेकर भी साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया, जिससे विशेष रूप से युवाओं को जागरूकता गतिविधि से जोड़ने का प्रयास हुआ। कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्क करना और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ संवाद ने नई पीढ़ी को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का अवसर दिया, जबकि सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिकों से संपर्क के माध्यम से अभियान का दायरा व्यापक हुआ। साइबर सुरक्षा आज के डिजिटल जीवन का आवश्यक हिस्सा है। इंटरनेट और मोबाइल तकनीक ने लोगों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। नागरिकों को अपनी निजी जानकारी की सुरक्षा, संदिग्ध डिजिटल संपर्कों से सावधानी और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। राजनांदगांव पुलिस के अभियान ने इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया। “साइबर सुरक्षा का संकल्प” केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर दैनिक जीवन में सुरक्षित डिजिटल आदतों को अपनाने की प्रेरणा बने, यही इस अभियान की मूल भावना रही। विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों की सहभागिता ने अभियान को जनजागरूकता का स्वरूप प्रदान किया। सेल्फी के माध्यम से सुरक्षा संदेश ने अभियान को रचनात्मक और सहभागितापूर्ण बनाया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए पुलिस की सतर्कता के साथ नागरिकों की जागरूकता भी आवश्यक है।
जागरूक नागरिक, सावधान डिजिटल उपयोगकर्ता और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार ही सुरक्षित डिजिटल समाज की मजबूत नींव बन सकते हैं। राजनांदगांव में चलाए गए साइबर जागृति अभियान ने इसी सामूहिक जिम्मेदारी और जागरूकता का संदेश दिया।
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