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साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सक्षम बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर शिक्षा और जागरूकता का संदेश
8 सितंबर, अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर शिक्षा के महत्व और समाज में साक्षरता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया। साक्षरता किसी भी व्यक्ति के जीवन में ज्ञान और आत्मविश्वास का आधार तैयार करती है। पढ़ने-लिखने की क्षमता व्यक्ति को दैनिक जीवन के अनेक कार्यों को स्वयं समझने और पूरा करने में सक्षम बनाती है। शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति अपने आसपास की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ पाता है तथा सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता विकसित करता है। इसी कारण साक्षरता को सामाजिक विकास की आधारशिला माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समाज के प्रत्येक वर्ग तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने और उन लोगों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में जागरूकता पैदा करने का अवसर भी प्रदान करता है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं।
साक्षर व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को अधिक प्रभावी ढंग से समझ सकता है। आज के डिजिटल युग में साक्षरता का अर्थ केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं रह गया है। मोबाइल फोन, डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग, ऑनलाइन जानकारी और विभिन्न सरकारी सेवाओं के बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल समझ भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। शिक्षा व्यक्ति को नई तकनीकों को समझने और उनका सुरक्षित एवं जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने में सहायता करती है। इसी के साथ पढ़ने की आदत व्यक्ति के ज्ञान का विस्तार करती है और उसे समाज, देश तथा दुनिया में होने वाले बदलावों से परिचित कराती है। बच्चों के लिए शिक्षा उनके भविष्य की नींव तैयार करती है, जबकि वयस्कों के लिए साक्षरता आत्मनिर्भरता और बेहतर जीवन के अवसर बढ़ाने का माध्यम बन सकती है।
साक्षरता का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। शिक्षित और जागरूक माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर अधिक सजग भूमिका निभा सकते हैं। परिवार में पढ़ाई का वातावरण बनने से बच्चों में भी सीखने की रुचि विकसित होती है। इसी प्रकार समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ने से जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलता है। महिलाओं की साक्षरता विशेष रूप से परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब महिलाएं शिक्षित और जागरूक होती हैं तो वे अपने परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए साक्षरता अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस यह संदेश देता है कि शिक्षा किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक बच्चे, युवा और वयस्क को सीखने के अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण जो लोग शिक्षा से दूर रह गए हैं, उन्हें भी सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है। विद्यालयों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों और जागरूक नागरिकों की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। एक व्यक्ति यदि किसी निरक्षर व्यक्ति को पढ़ना-लिखना सीखने में सहायता करता है तो यह भी साक्षरता के विस्तार में एक महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति में समझ, विवेक, आत्मविश्वास, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर समाज में यह संकल्प मजबूत करने की आवश्यकता है कि शिक्षा और ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए। बच्चों को विद्यालय से जोड़ने, वयस्कों को साक्षर बनाने, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा डिजिटल जानकारी के प्रति जागरूकता विकसित करने के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए। पुस्तकें, विद्यालय, पुस्तकालय, शिक्षण संस्थान और आधुनिक डिजिटल माध्यम ज्ञान प्राप्त करने के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनका सही उपयोग व्यक्ति के जीवन में व्यापक बदलाव ला सकता है। साक्षरता व्यक्ति को केवल शब्द पढ़ना नहीं सिखाती, बल्कि उसे जीवन की परिस्थितियों को समझने, निर्णय लेने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की क्षमता भी प्रदान करती है।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर समाजसेवी एवं एंकर हरी गुप्ता की ओर से भी शिक्षा और जागरूकता के महत्व का संदेश दिया गया। अवसर से जुड़ा संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि साक्षरता सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव है और प्रत्येक व्यक्ति तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। आज जब दुनिया तेजी से ज्ञान और तकनीक आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, ऐसे समय में साक्षरता का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस केवल शुभकामना देने का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता को मजबूत करने का अवसर भी है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ने और ज्ञान के अवसरों को व्यापक बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास ही एक अधिक जागरूक, आत्मनिर्भर और सक्षम समाज के निर्माण का आधार बन सकते हैं।
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