
उत्तर भारत इस समय भीषण ठंड और शीतलहर की चपेट में है। पहाड़ी राज्यों में हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है। दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है। सुबह और रात के समय घना कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है, वहीं ठंड के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
शीतलहर और कोहरे से बिगड़ी स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में तेज शीतलहर चल रही है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात पर भी असर पड़ रहा है। सुबह के समय सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आ रहे हैं और कई ट्रेनें देरी से चल रही हैं।
बच्चों की सेहत को देखते हुए स्कूल बंद
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों की सरकारों ने स्कूलों को 15 जनवरी तक बंद रखने का फैसला किया है। यह फैसला खासतौर पर छोटे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अत्यधिक ठंड और कोहरे के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही थी, साथ ही बीमार पड़ने का खतरा भी बढ़ गया था।
दिल्ली-NCR में बढ़ी सख्ती
दिल्ली और आसपास के इलाकों में ठंड के साथ-साथ प्रदूषण की समस्या भी बनी हुई है। सुबह के समय ठंडी हवाओं और कोहरे के कारण हालात और गंभीर हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश बढ़ाने का निर्णय लिया है। कई निजी और सरकारी स्कूलों ने अभिभावकों को नोटिस जारी कर छुट्टियों की जानकारी दे दी है।
अन्य राज्यों में भी हालात गंभीर
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई जिलों में भी स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। कुछ राज्यों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए छुट्टियां घोषित की गई हैं, जबकि कुछ जगहों पर समय में बदलाव कर स्कूलों को देर से खोलने के निर्देश दिए गए हैं। बिहार और झारखंड में भी ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर फैसले लिए हैं।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने की संभावना कम जताई है। विभाग के अनुसार उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से पहाड़ों में बर्फबारी जारी है, जिसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान पर पड़ रहा है। कई राज्यों में येलो और ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है।
आम जनजीवन पर असर
ठंड का असर केवल स्कूलों तक सीमित नहीं है। दिहाड़ी मजदूरों, बुजुर्गों और बेघर लोगों के लिए यह मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। कई जगहों पर प्रशासन की ओर से रैन बसेरे, अलाव और कंबल वितरण की व्यवस्था की गई है। अस्पतालों में सर्दी-जुकाम, बुखार और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है।
अभिभावकों में राहत, छात्रों में खुशी
स्कूल बंद होने की खबर से जहां अभिभावकों ने राहत की सांस ली है, वहीं छात्रों में भी खुशी का माहौल है। अभिभावकों का कहना है कि इस भीषण ठंड में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा था। वहीं स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हालात सामान्य होने पर ही कक्षाएं दोबारा शुरू की जाएंगी।
आगे क्या हो सकता है फैसला
हालांकि फिलहाल स्कूल 15 जनवरी तक बंद रखने की घोषणा की गई है, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए छुट्टियों की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे भी निर्णय लिए जाएंगे।
उत्तर भारत में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। दिल्ली-NCR समेत कई राज्यों में स्कूलों का 15 जनवरी तक बंद रहना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम माना जा रहा है। जब तक मौसम में सुधार नहीं होता, तब तक सतर्कता और सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।









