Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

‘उम्मीद है ऐसा नहीं होगा…’ भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर रूसी मंत्री का बड़ा बयान, ट्रंप की नीतियों पर टिप्पणी

Author Image
Written by
HQ Report

वैश्विक व्यापार संतुलन, रणनीतिक साझेदारियों और बहुध्रुवीय व्यवस्था पर रूस की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली/मॉस्को। भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इसी क्रम में रूस के एक वरिष्ठ मंत्री ने हालिया वक्तव्य में कहा कि उन्हें “उम्मीद है ऐसा नहीं होगा” कि किसी भी प्रकार का व्यापारिक समझौता वैश्विक संतुलन को प्रभावित करे या किसी तीसरे देश के हितों के प्रतिकूल सिद्ध हो। अपने बयान में उन्होंने अमेरिका की पूर्व व्यापार नीतियों और डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अपनाए गए दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए संकेत दिया कि एकतरफा प्रतिबंधों और संरक्षणवादी उपायों से वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

Advertisement Box

रूसी मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण को लेकर वार्ताएं चर्चा में हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि देखी गई है, और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। रूस ने इस संदर्भ में बहुपक्षीय और संतुलित व्यापार व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया है।

मंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था परस्पर निर्भरता पर आधारित है और किसी भी प्रकार की व्यापारिक व्यवस्था को व्यापक अंतरराष्ट्रीय नियमों और संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अतीत में लगाए गए प्रतिबंधों और टैरिफ ने कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित किया। उनके अनुसार, व्यापार को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह बयान उसके व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है। रूस लंबे समय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और वैकल्पिक आर्थिक मंचों की वकालत करता रहा है। भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक सहयोग के मजबूत संबंध रहे हैं। ऐसे में रूस स्वाभाविक रूप से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी नई व्यापारिक संरचना से उसके दीर्घकालिक हित प्रभावित न हों।

डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए रूसी मंत्री ने कहा कि उस अवधि में वैश्विक व्यापार में संरक्षणवादी प्रवृत्तियां बढ़ीं। हालांकि उन्होंने किसी विशेष प्रस्ताव पर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन यह संकेत दिया कि एकतरफा आर्थिक कदमों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को ठेस पहुंच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह टिप्पणी वैश्विक व्यापार में पारदर्शिता और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर देने के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की बात करें तो दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में व्यापारिक आदान-प्रदान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा, ऊर्जा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं। भारत ने भी विविधीकृत व्यापारिक साझेदारियों पर जोर दिया है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो और आर्थिक विकास को गति मिले।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है that किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते का उद्देश्य पारस्परिक लाभ होना चाहिए। यदि समझौते में पारदर्शिता और संतुलन हो, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक हो सकता है। वहीं यदि किसी समझौते से अन्य देशों के साथ व्यापारिक संबंध प्रभावित होते हैं, तो उससे व्यापक आर्थिक समीकरण बदल सकते हैं।

रूस की प्रतिक्रिया को वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। यूक्रेन संकट और पश्चिमी देशों के साथ तनाव के बाद रूस ने एशियाई देशों, विशेषकर भारत और चीन, के साथ आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर बल दिया है। ऐसे में भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा पर रूस की नजर स्वाभाविक मानी जा रही है।

भारतीय नीति विशेषज्ञों का मत है कि भारत अपनी विदेश और व्यापार नीति में रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देता है। भारत विभिन्न देशों के साथ सहयोग को संतुलित रूप से आगे बढ़ाता है और बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाता है। इसलिए किसी भी द्विपक्षीय समझौते को व्यापक राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही अंतिम रूप दिया जाता है।

समापन में कहा जा सकता है कि भारत-अमेरिका संभावित ट्रेड डील पर रूसी मंत्री का बयान वैश्विक व्यापारिक समीकरणों की जटिलता को रेखांकित करता है। उन्होंने संरक्षणवाद और एकतरफा नीतियों के प्रति सावधानी बरतने की आवश्यकता जताई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ताएं किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और वैश्विक स्तर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस विषय पर बनी हुई है, जबकि सभी पक्ष संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं।

Employees’ Provident Fund Organisation ने 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी
आज फोकस में

Employees’ Provident Fund Organisation ने 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल
आज फोकस में

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव
आज फोकस में

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट
आज फोकस में

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप
आज फोकस में

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित
आज फोकस में

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
Advertisement Box