
भोपाल। प्रदेश में संचालित प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं और अभियानों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय से सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत बैठक की। इस दौरान उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान, पूर्ण हो चुके संकल्प से समाधान अभियान तथा राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को जनभागीदारी के साथ एक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिले में जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें आमजन की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि पंचायत स्तर तक जागरूकता अभियान चलाए जाएं और लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाए। समीक्षा बैठक में ‘संकल्प से समाधान अभियान’ के परिणामों का भी विश्लेषण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का निराकरण समयबद्ध और प्रभावी तरीके से किया गया है, जो प्रशासन की जवाबदेही को दर्शाता है। उन्होंने निर्देश दिए कि आगे भी जनसमस्याओं के समाधान में इसी प्रकार की सक्रियता बनाए रखी जाए और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं और कार्यक्रमों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी कलेक्टरों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड स्तर पर जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा में हो। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार से ही प्रदेश के समग्र विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए योजनाओं की मॉनिटरिंग की जाए, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में वृद्धि हो सके। उन्होंने अधिकारियों को नवाचार अपनाने और बेहतर कार्यप्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि जिलों में चल रहे कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए और प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत की जाए। साथ ही, जहां भी आवश्यक हो, वहां सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है, और इसके लिए सभी अधिकारियों को समर्पित भाव से कार्य करना होगा। उन्होंने कलेक्टरों से अपेक्षा की कि वे अपने-अपने जिलों में विकास कार्यों को गति दें और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरें। यह समीक्षा बैठक राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनहित में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।









