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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम, नॉर्थ टेक संगोष्ठी में रक्षा मंत्री ने तकनीकी नवाचार पर दिया जोर

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प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 का शुभारंभ सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान तथा सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देशभर से रक्षा विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, उद्योगपति, स्टार्टअप प्रतिनिधि, सैन्य अधिकारी और तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों को बढ़ावा देना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए देश को तैयार करना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और युद्ध का स्वरूप भी पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां युद्ध टैंक, मिसाइल और भारी हथियारों तक सीमित थे, वहीं अब ड्रोन, सेंसर, साइबर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना होगा और इसके लिए अनुसंधान एवं नवाचार पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के समय में केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि प्रो-एक्टिव रणनीति की आवश्यकता है। हमें ऐसी तकनीकी क्षमता विकसित करनी होगी जिससे दुश्मन को आश्चर्यचकित किया जा सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में सरप्राइज एलिमेंट बहुत महत्वपूर्ण होता है और भारत को इस दिशा में मजबूत तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने दुनिया को भारत की सामरिक शक्ति और तकनीकी क्षमता का परिचय कराया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में लगातार बड़े कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य और मजबूत रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि इस सफलता में निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और एमएसएमई की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार द्वारा रक्षा अनुसंधान और उत्पादन में निजी भागीदारी को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ अब अकेले कार्य नहीं कर रहा, बल्कि देश के उद्योगों और नवाचार संस्थानों के साथ मिलकर नई तकनीकों का विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ ने अपने पेटेंट उद्योगों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने की नीति शुरू की है ताकि भारतीय कंपनियां तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बन सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि डीआरडीओ की परीक्षण सुविधाएं भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं और हर वर्ष सैकड़ों उद्योग इन सुविधाओं का उपयोग अनुसंधान एवं विकास के लिए कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, अंतरिक्ष सुरक्षा और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत को तेजी से आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने कहा कि आज की दुनिया में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है। भविष्य के युद्ध प्रयोगशालाओं में तय हो रहे हैं और जो देश तकनीकी बदलावों को तेजी से अपनाएगा वही आने वाले समय में निर्णायक बढ़त हासिल करेगा। उन्होंने युवाओं, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप्स से रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। नॉर्थ टेक संगोष्ठी की थीम “रक्षा त्रिवेणी संगम — जहां प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक कौशल का संगम होता है” रखी गई है। इस आयोजन में 284 कंपनियां भाग ले रही हैं जिनमें एमएसएमई, रक्षा कंपनियां, स्टार्टअप्स और तकनीकी संस्थान शामिल हैं। इन कंपनियों द्वारा अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों और उपकरणों का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक, निगरानी प्रणाली, स्मार्ट हथियार, साइबर सुरक्षा समाधान और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर विशेष आकर्षण देखा गया।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत को डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर भी विकसित करना चाहिए ताकि अनुसंधान, उद्योग और शिक्षा के बीच मजबूत समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को रक्षा अनुसंधान से जोड़ना समय की मांग है। इससे युवाओं को नई दिशा मिलेगी और देश को उन्नत तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में युद्ध की तकनीक में बड़ा बदलाव आया है। अब ड्रोन और सेंसर जैसी तकनीकें युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले उपकरण भी आधुनिक युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं। उन्होंने लेबनान और सीरिया में हुए पेजर हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने आधुनिक युद्ध प्रणाली के नए आयाम सामने रखे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना लगातार नई तकनीकों को अपनाने और अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने सेना की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सैनिक हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उनकी ताकत और बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठा रही है। कार्यक्रम में मौजूद सैन्य अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप लगातार नवाचार कर रही है। संगोष्ठी के दौरान कई तकनीकी सत्र, प्रदर्शनियां और विचार-विमर्श आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें सेना की भविष्य की आवश्यकताओं और तकनीकी समाधानों पर चर्चा की जा रही है। रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन भारत को आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे न केवल घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि देश की सुरक्षा क्षमता भी मजबूत होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं बल्कि निर्यातक राष्ट्र के रूप में भी उभर रहा है।

कार्यक्रम में युवाओं और स्टार्टअप्स की भागीदारी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कई युवा उद्यमियों ने ड्रोन, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा और स्मार्ट निगरानी प्रणालियों से जुड़े नवाचार प्रस्तुत किए। रक्षा विशेषज्ञों ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में युवा तकनीकी शक्ति ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि देश की सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार से मजबूत होती है। उन्होंने सभी संस्थानों, उद्योगों और युवाओं से मिलकर भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत आने वाले समय में रक्षा तकनीक के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होगा। नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 को रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। यह संगोष्ठी भारतीय रक्षा उद्योग, सेना और तकनीकी संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।

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