
दूध को अमृत तुल्य माना जाता है क्योकि इसमें सभी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में पाए जाते है ,दूध में कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन A, D, और B12 प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की हड्डियों, दाँतों और मांसपेशियों को मजबूत करते हैं। दूध बच्चो से लेकर बुजुर्गो, महिलाओ , गर्भ वती स्त्रियों आदि सभी के पोषण का अभिन्न हिस्सा मन जाता है , स्वच्छ दुग्ध (Clean Milk) स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी होता है, परन्तु यदि दूध में किसी भी प्रकार की अशुद्धियां जैसे जीवाणुओं / सूक्ष्म जीव और रासायनिक पदार्थ जैसे कीट नाशक , खाद या दवाओं के अवयव हो तो इसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पद सकता है , यदि दूध स्वच्छता से निकाला और संग्रहित किया गया है, तो यह अधिक समय तक खराब नहीं होता। दूषित दूध के सेवन से टायफॉइड, टी.बी., ब्रूसीलोसिस , फूड पॉइज़निंग जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। दूध को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ महत्व पूर्ण बिंदु इस प्रकार है-
* दुधारू पशुओ का स्वास्थ्य –
यदि दूध स्वस्थ्य पशु से लिया गया है तो वह शत प्रतिशत सुरक्षित होगा, इसलिए पशुओ के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए इसके लिए विभिन्न बीमारियों का टीकाकरण , पशु आवास का उचित प्रवंधन -साफ सफाई रख रखाव जरुरी है l पशु को दिया जाने वाला आहार भी साफ एवं किसी भी तरह के रासायनिक या अन्य तत्वों जैसे किसी भी तरह के कीटनाशक या खेती में उपयोग की गई दवाइयों या राशन से मुक्त होना चाहिए, यह कवक/ फफूंद द्वारा संक्रमित भी नहीं होना चाहिए अन्यथा यह पशु शरीर से होते हुए उसके दूध में पहुंच कर दूध को भी विषाक्त कर देते है ,आज इन्ही सब करने से कैंसर आदि का खतरा बाद रहा है , हमें दूध की गुणवक्ता बढ़ाने हेतु बीमार पशुओ के दूध को स्वस्थ्य पशु के दूध के साथ मिलाना चाहिए क्योकि रोगी पशु को दी जाने वाली दवाइयों के अवयव इस तरह दूध में पहुंच सकते है , इस तरत सूक्ष्म जीवो की प्रतिरोधक क्षमता धीरे धीरे बढ़ जाती है जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहते है l जानवरो का आवास भी साफ सुथरा ,सूखा, नमी रहित , हवादार रौशनी युक्त होना चाहिए , इससे साँस एवं पैरो सम्वन्धित बीमारियों एवं किलनी जो आदि की संशय काम होती है , पशु आवास में मच्छर – मक्खी , कुत्ते बिल्ली आदि की पहुंच भी नहीं होनी चाहिए इसके लिए जाली का उपयोग कर सकते है पशुओं को दिया जाने वाला पानी भी साफ होना चाहिए l पशुओ की नाद जिसमे भोजन -पानी दिया जाता है उसकी भी साफ़ सफाई बहुत महत्वपूर्ण है l
दुहने से पहले गाय/भैंस के थन और हाथों की सफाई-पशुओ के थानों में किसी भी प्रकार की मिट्टी या गोबर आदि नहीं लगा होना चाहिए , दूध दोहने वाले व्यक्ति के हाथ भी साफ हेने चाहिए , दूध दोहते समय आस पास थूकना , ताम्बाखू आदि का सेवन नहीं करना चाहिए l
साफ बर्तन में दूध एकत्र करना- दूध को साफ बर्तन में ढक उचित तापमान पर संग्रहित करना ,क्यों की हमारे यहाँ का तापमान गर्म है जिससे इसमें सुक्ष जीवो की बृध्दि से इसके ख़राब होने की संभावना बाद जाती है अतः दूध को ५ डिग्री से नीचे संगृहीत करना चाहिए l
मिलावट से बचना-
कभी कभी लाभ को बढ़ाने के लिए कुछ लोग दूध में कई तरह की मिलावट करते है जिससे दूध की गुणवक्ता घटती है अतः इससे बचना चाहिए l
स्वच्छ दुग्ध न केवल उपभोक्ता के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह डेयरी उद्योग की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उत्पादकता को भी बढ़ाता है। इसलिए, हर व्यक्ति को स्वच्छ दूध के महत्व को समझकर इसका उपयोग करना चाहिए।









