
हर साल राज्य सरकारें भिन्न-भिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए आवेदन आमंत्रित करती हैं जिनकी तिथियां अलग-अलग होती हैं। इन पदों की नियुक्ति के लिए राज्यों के अभ्यार्थी एक दुसरे राज्यों में आवेदन प्रस्तुत करते हैं। प्रायः एक से अधिक राज्यों के रिक्त पदों के लिए एक अभ्यार्थी आवेदन देकर परीक्षा देता है। इससे आवेदनों की संख्या अधिक हो जाती है। इससे उस राज्य के युवाओं को उचित मौका नहीं मिल पाता है। राष्ट्र एक विभाग पर परीक्षाएँ होने से युवाओं में असंतोष नहीं पनपेगा। सबका भला होगा। हर राज्य के युवाओं को उचित अवसर प्रदान होगा। यह प्रथा भिन्न-भिन्न विभागों में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए अपनाई जावेगी तभी बेरोजगारी कम होगी। उचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। प्रायः एक राज्य के मूल निवासी उस परीक्षाओं में सफलता नहीं प्राप्त कर पाते हैं और अन्य राज्यों के अभ्यार्थी चयन कर लिए जाते हैं। इस कारण एक राज्य के मूल निवासियों को अवसर न मिलने से हताश होते हैं। बेरोजगारी बढ़ जाती है। कभी-कभी आयु भी अधिक होने से परीक्षाओं में बैठने की पात्रता समाप्त हो जाती है।इसी प्रकार एसएससी की परीक्षाओं में भी यही स्थिति पैदा होती है। इस समस्या के हल के लिए एक उपाय करना…के अभ्यतथी दूसरे राज्य में आवेदन नहीं कर पाऐगें। उससे स्थानीय (मूल राज्य) के युवकों को अधिक सफलता अधिक मिलेगी। बेरोज़गारी कम होगी असन्तोष कम होगा वर्तमान में विभिन्न तारीखों पर आवेदन आमन्त्रित. करने से (यू.पी. बिहार, क्स। कुछ अन्य राज्यों द्वारा हेतु आवेदन करके) अन्य राज्यो में भी हेतु सवेदन प्रस्तुत करते है। म.प्र. के युवक यू.पी या अन्य राज्यों में भर्ती हेतु आवेदन प्रस्तुत करते है और काफी हद तक सफल हो जाते है।ठीक होगा) पूरे भारत वर्ष में हर साल सब राज्य व केंद्र शासित प्रदेश एक बोर्ड का गठन करे।जिसमें विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिये एक ही तारीख आवेदन आमन्त्रित करने व एक ही तारीख परीक्षा लेने की नियत करे। प्रश्न पत्र अपने अपने राज्य के अनुसार तैयार करे। इस प्रकार की प्रणाली से अपने अपने राज्य के मूल अभ्यर्थियों को अवसर मिलेगा।
संपादक— मुरारी लाल गोयल — बी.ए./बी.काम/ए.एल.बी








