
भोपाल। बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी रोकथाम तथा आमजन को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से थाना एम.पी. नगर पुलिस, भोपाल द्वारा “सेफ क्लिक अभियान 2.0” के अंतर्गत प्रगति हॉकर्स परिसर में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में व्यापारियों, कर्मचारियों, स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं को ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों की जानकारी देते हुए सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के प्रति सचेत करना तथा उन्हें ऐसे अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी देना था। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का जागरूक होना ही सबसे बड़ा बचाव है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फिशिंग लिंक, फर्जी केवाईसी अपडेट, यूपीआई धोखाधड़ी, ओटीपी शेयरिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी निवेश योजनाएं, लॉटरी एवं जॉब फ्रॉड, कस्टमर केयर स्कैम तथा अन्य साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि साइबर अपराधी किस प्रकार लोगों को झांसे में लेकर उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं।
विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराध के बारे में नागरिकों को सचेत किया गया। बताया गया कि अपराधी स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से डराते हैं और गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस प्रकार वीडियो कॉल पर पूछताछ कर धनराशि जमा कराने के निर्देश नहीं दिए जाते।
कार्यक्रम में नागरिकों को यह भी समझाया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी, यूपीआई पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड या अन्य बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी कभी साझा न करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अज्ञात मोबाइल एप डाउनलोड करने या बिना सत्यापन के केवाईसी अपडेट करने से बचने की सलाह दी गई।
एम.पी. नगर पुलिस ने सोशल मीडिया सुरक्षा पर भी विशेष जानकारी दी। नागरिकों को मजबूत पासवर्ड का उपयोग करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्षम करने, सोशल मीडिया प्रोफाइल की गोपनीयता सेटिंग्स की नियमित समीक्षा करने तथा किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार करने से पहले उसकी जांच करने की सलाह दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो वह बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करे तथा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज कराए। त्वरित शिकायत करने से कई मामलों में धोखाधड़ी की गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका पुलिस अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया। लोगों ने ऑनलाइन भुगतान की सुरक्षा, फर्जी निवेश एप, बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग, मोबाइल सुरक्षा और डिजिटल लेनदेन से जुड़े विषयों पर जानकारी प्राप्त की। पुलिस ने सभी को नियमित रूप से अपने मोबाइल और बैंकिंग एप अपडेट रखने तथा केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करने की सलाह दी।
एम.पी. नगर पुलिस ने नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनने के साथ-साथ अपने परिवार, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करें। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और डिजिटल माध्यम का सीमित उपयोग करने वाले लोगों को साइबर अपराधी आसानी से निशाना बनाते हैं, इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को डिजिटल सुरक्षा के मूल नियमों की जानकारी होना आवश्यक है।
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संचालित “सेफ क्लिक अभियान 2.0” का उद्देश्य प्रदेशभर में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना है। इस अभियान के अंतर्गत स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों, कार्यालयों, औद्योगिक संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाएं और साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।
कार्यक्रम के समापन पर एम.पी. नगर पुलिस ने सभी नागरिकों से सतर्क रहने, डिजिटल लेनदेन के दौरान सावधानी बरतने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधों के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं और जनभागीदारी के माध्यम से ही साइबर सुरक्षित मध्यप्रदेश का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।









