
कोहिमा। भारतीय सेना की पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल वी.एम.बी. कृष्णन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम ने गुरुवार को कोहिमा स्थित लोक भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास तथा विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से सकारात्मक चर्चा हुई।
बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने तथा नागरिकों की सुविधाओं में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयासों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के पूरक हैं तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार देश की सामरिक क्षमता को भी सुदृढ़ करता है।
चर्चा के दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के महत्व पर विशेष बल दिया गया। कहा गया कि सीमाओं पर रहने वाले नागरिक देश की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए निरंतर विकास कार्य किए जाना आवश्यक है। बेहतर आधारभूत संरचना न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधाजनक होती है, बल्कि सुरक्षा बलों की आवाजाही और आपदा प्रबंधन जैसी परिस्थितियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
बैठक में क्षेत्र की वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों, सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। भारतीय सेना द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में निभाई जा रही भूमिका और नागरिक प्रशासन के साथ उसके समन्वय की सराहना की गई।

लेफ्टिनेंट जनरल वी.एम.बी. कृष्णन ने पूर्वी क्षेत्र में भारतीय सेना की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे विभिन्न विकासात्मक प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि सेना राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन और नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर क्षेत्र के विकास में भी सहयोग देती रही है।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि पूर्वोत्तर भारत का रणनीतिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता राष्ट्रीय हितों की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।
दोनों पक्षों ने समसामयिक राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय विषयों पर भी विचार साझा किए। बैठक में क्षेत्र में शांति, सामाजिक सौहार्द, विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही यह विश्वास व्यक्त किया गया कि आपसी सहयोग और समन्वित प्रयासों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।
शिष्टाचार भेंट के अंत में राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने, सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को गति देने तथा नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर समन्वय बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। यह बैठक सुरक्षा और विकास के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।









