
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने विभिन्न विशिष्ट अतिथियों से आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने, संसदीय परंपराओं को सुदृढ़ करने तथा विधायी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावशाली बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य नवनिर्वाचित विधायकों को संसदीय परंपराओं, विधानसभा की कार्यप्रणाली, विधायी दायित्वों, संसदीय मर्यादाओं और जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराना था। इस दौरान विशेषज्ञों एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में विधायकों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों से भेंट कर संसदीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी, संसदीय परंपराओं के सम्मान और जनहित के प्रति समर्पित कार्यशैली पर निर्भर करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम नवनिर्वाचित सदस्यों को अपने दायित्वों के बेहतर निर्वहन में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभाएं लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और यहां होने वाली सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा जनहित से जुड़े निर्णयों का आधार बनती है। जनप्रतिनिधियों को संविधान की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का निरंतर प्रयास करना चाहिए। संसदीय गरिमा, अनुशासन और सकारात्मक संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों एवं संसदीय मामलों के विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर विधायी प्रक्रियाओं में तकनीक के बढ़ते उपयोग, सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता, प्रभावी संवाद, जनभागीदारी तथा सुशासन जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजनों से जनप्रतिनिधियों को नई कार्यशैली, बेहतर संसदीय अभ्यास और जनसेवा के प्रभावी तरीकों को समझने का अवसर मिलता है, जिससे लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जहां संसदीय मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प दोहराया गया।
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