
भोपाल। राजधानी भोपाल को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और प्रदूषणमुक्त स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह मिश्रा ने संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) एवं यातायात पुलिस संयुक्त रूप से विशेष अभियान संचालित करें। अभियान के तहत निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले वाहनों में लगे प्रेशर हॉर्न, मॉडिफाइड साइलेंसर तथा अत्यधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले अन्य उपकरणों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर ने कहा कि भोपाल की पहचान एक स्मार्ट, स्वच्छ और रहने योग्य शहर के रूप में स्थापित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए केवल सड़कों, भवनों और आधारभूत सुविधाओं का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों को शांत, सुरक्षित और प्रदूषणमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। ध्वनि प्रदूषण आज शहरी क्षेत्रों की एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बन चुका है, जिसका सीधा प्रभाव लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करते हुए इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाएं।
बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शहर के प्रमुख चौराहों, व्यस्त बाजारों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों, आवासीय क्षेत्रों तथा संवेदनशील स्थानों पर नियमित जांच अभियान चलाए जाएं। विशेष रूप से ऐसे वाहनों की पहचान की जाए जिनमें अवैध प्रेशर हॉर्न, तेज आवाज वाले मॉडिफाइड साइलेंसर अथवा निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक शोर उत्पन्न करने वाले उपकरण लगाए गए हों। ऐसे सभी मामलों में मोटर वाहन अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रावधानों एवं अन्य लागू नियमों के तहत तत्काल चालानी एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, न्यायालय परिसरों, धार्मिक स्थलों एवं अन्य शांत क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर संयुक्त प्रवर्तन दल नियमित निरीक्षण करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि उसका वास्तविक प्रभाव भी दिखाई देना चाहिए। इसके लिए अभियान की नियमित समीक्षा कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से तनाव, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, सुनने की क्षमता में कमी तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है जितनी कि कानूनी कार्रवाई। प्रशासन द्वारा जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोगों को अनावश्यक हॉर्न का उपयोग न करने, वाहनों में अवैध संशोधन से बचने तथा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यातायात पुलिस एवं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी संयुक्त रूप से नियमित अभियान संचालित करें। अभियान के दौरान ध्वनि स्तर की जांच, नियमों के उल्लंघन की पहचान तथा मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक प्रावधानों का भी पालन किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
कलेक्टर ने कहा कि स्मार्ट सिटी की अवधारणा केवल आधुनिक तकनीक और बेहतर अधोसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर यातायात व्यवस्था, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और नागरिकों के लिए शांत वातावरण भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। प्रशासन का उद्देश्य भोपाल को ऐसा शहर बनाना है, जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें तथा नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाला जीवन उपलब्ध हो।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों से समन्वित कार्ययोजना बनाकर अभियान को निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही नागरिकों से भी अपील की कि वे यातायात नियमों का पालन करें, अनावश्यक हॉर्न का प्रयोग न करें, वाहनों में अवैध प्रेशर हॉर्न या मॉडिफाइड साइलेंसर न लगाएं तथा ध्वनि प्रदूषण रोकने के प्रयासों में प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन और नागरिकों की साझा भागीदारी से ही भोपाल को वास्तव में स्वच्छ, शांत, पर्यावरण-अनुकूल और आदर्श स्मार्ट सिटी बनाया जा सकेगा।









