
परमवीर चक्र विजेता के बलिदान दिवस पर शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति को किया स्मरण; ‘ये दिल मांगे मोर’ का उद्घोष आज भी युवाओं को देता है देशसेवा की प्रेरणा
नई दिल्ली। कारगिल युद्ध के अमर नायक, परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा के बलिदान दिवस पर पूरे देश ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्र ने उनके अदम्य साहस, वीरता, सर्वोच्च बलिदान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण को नमन करते हुए उन्हें कृतज्ञतापूर्वक स्मरण किया। देशभर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां लोगों ने पुष्प अर्पित कर भारत माता के इस वीर सपूत को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कैप्टन विक्रम बत्रा भारतीय सेना के उन वीर योद्धाओं में शामिल हैं, जिन्होंने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मनों के कब्जे से महत्वपूर्ण चोटियों को मुक्त कराने में निर्णायक भूमिका निभाई। युद्ध के दौरान उनका प्रसिद्ध उद्घोष “ये दिल मांगे मोर” केवल विजय का प्रतीक नहीं बना, बल्कि भारतीय सेना के अदम्य साहस, आत्मविश्वास और अटूट राष्ट्रभक्ति का अमर संदेश बन गया। आज भी यह वाक्य देश के युवाओं को राष्ट्रहित में समर्पण और कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित करता है। कारगिल की दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कैप्टन विक्रम बत्रा ने अद्वितीय नेतृत्व क्षमता, रणकौशल और वीरता का परिचय दिया। उन्होंने अपने साथियों का मनोबल बढ़ाते हुए अनेक कठिन सैन्य अभियानों का सफल नेतृत्व किया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अद्वितीय शौर्य के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत किया। बलिदान दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कैप्टन विक्रम बत्रा का जीवन प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और यह सिद्ध कर दिया कि देश की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। उनका जीवन साहस, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग और राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण है।
देशभर में आयोजित कार्यक्रमों में युवाओं से आह्वान किया गया कि वे कैप्टन विक्रम बत्रा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न संस्थानों में उनके शौर्यगाथा का स्मरण करते हुए देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम आयोजित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों के कारण ही भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और देश गर्व के साथ आगे बढ़ रहा है। कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरगाथा भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। उनका जीवन संदेश देता है कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान भी छोटा होता है। उनका साहस और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। राष्ट्र ने एक स्वर में इस अमर वीर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कैप्टन विक्रम बत्रा का शौर्य, त्याग और बलिदान सदैव भारतवासियों के हृदय में अमर रहेगा। मातृभूमि के प्रति उनका सर्वोच्च समर्पण हर भारतीय को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।









