
मंडला । मध्यप्रदेश के मंडला जिले में खनन क्षेत्र में जब भी महिला नेतृत्व की चर्चा होती है, तो सबसे पहले **”माइंस क्वीन ऑफ मंडला”** के नाम से पहचान बना चुकी **श्रीमती शील देवी झा** का नाम सामने आता है। पुरुष प्रधान माने जाने वाले खनन उद्योग में अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और कुशल प्रबंधन से उन्होंने न केवल अलग पहचान बनाई, बल्कि यह भी साबित किया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए कठिन नहीं होता। आज श्रीमती शील देवी झा प्रदेश की उन चुनिंदा महिला उद्यमियों में शामिल हैं, जिन्होंने डोलोमाइट खनन उद्योग में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी खदान से निकलने वाला उच्च गुणवत्ता का खनिज सीधे बाजार में मांग के अनुसार बिक जाता है। यही कारण है कि उन्हें विपणन की कोई परेशानी नहीं होती और उनका अधिकांश माल **स्पॉट पर ही तत्काल बिक जाता है**, जो उनकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रमाण माना जाता है।
राजनीति से जनसेवा तक का सफर
श्रीमती शील देवी झा का सार्वजनिक जीवन वर्ष 1997 में शुरू हुआ, जब उन्होंने बिछिया से जनपद पंचायत चुनाव लड़ा। उस समय अधिकांश सीटें आरक्षित थीं और केवल एक सीट सामान्य वर्ग के लिए थी। उन्होंने उस सीट से चुनाव लड़कर निर्विरोध जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने जनप्रतिनिधि के रूप में विकास कार्यों को नई गति दी और अपने कार्यकाल में जनपद क्षेत्र में अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कराया। लगातार 26 वर्षों तक जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक विकास और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे मध्यप्रदेश राज्य समाज कल्याण बोर्ड की सदस्य भी रहीं तथा मध्यप्रदेश बाल समाज कल्याण बोर्ड की आजीवन सदस्य हैं। वर्तमान में वे प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी निभा रही हैं।
खनन उद्योग में बनाई अलग पहचान
राजनीतिक और सामाजिक जीवन के साथ-साथ श्रीमती शील देवी झा ने खनन उद्योग में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की। डोलोमाइट खदानों के संचालन में उन्होंने पारदर्शिता, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी। यही वजह है कि आज उनकी पहचान केवल एक सफल व्यवसायी के रूप में नहीं, बल्कि जिम्मेदार खनन प्रबंधन की मिसाल के रूप में भी होती है। वे कहती हैं कि उनकी खदान में उत्पादित खनिज की गुणवत्ता इतनी बेहतर है कि “हमें अपने माल की बिक्री की कोई चिंता नहीं रहती। हमारा अधिकांश माल खदान से निकलते ही स्पॉट पर बिक जाता है।” इससे उनके व्यवसाय की विश्वसनीयता और बाजार में मजबूत मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पर्यावरण संरक्षण को दी प्राथमिकता
श्रीमती झा का मानना है कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने खनन कार्यों में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया। सतत खनन, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें अनेक पुरस्कार एवं सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। पर्यावरण जागरूकता और जिम्मेदार खनन के लिए उन्हें विशेष पहचान मिली है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
एक ओर उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई, तो दूसरी ओर खनन जैसे चुनौतीपूर्ण उद्योग में भी सफलता हासिल कर यह साबित किया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। उनकी सफलता आज प्रदेश की हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
विकास और रोजगार की नई पहचान
श्रीमती शील देवी झा का मानना है कि खनन उद्योग केवल खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उनके द्वारा संचालित खनन कार्यों से अनेक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। मंडला की “माइंस क्वीन” के रूप में पहचान बना चुकी श्रीमती शील देवी झा आज संघर्ष, नेतृत्व, गुणवत्ता और सफल प्रबंधन का ऐसा उदाहरण हैं, जिन्होंने जनसेवा और उद्योग—दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग छाप छोड़ी है।









