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पचनद संगम बनेगा नदी संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश केंद्र, पाँच अंतर्राज्यीय नदियों की प्रतिमाओं की होगी स्थापना

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जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन के लिए 12 जुलाई को होगा विशेष आयोजन, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित अनेक गणमान्य होंगे शामिल

जालौन/इटावा। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक धरोहर स्थल पचनद संगम पर 12 जुलाई 2026 को जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को समर्पित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। देश के इस अद्वितीय संगम स्थल पर, जहाँ चंबल, सिंध, कुंवारी, पहुंज और यमुना जैसी पाँच अंतर्राज्यीय नदियाँ एक साथ मिलती हैं, इन पाँचों नदियों के सम्मान और संरक्षण के उद्देश्य से उनकी प्रतीकात्मक प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। पर्यावरणीय चेतना और नदी संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए विशेष महत्व रखता है। पचनद संगम को देश का एकमात्र ऐसा स्थल माना जाता है जहाँ पाँच अंतर्राज्यीय नदियों का संगम होता है। सदियों से यह स्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से श्रद्धा एवं आकर्षण का केंद्र रहा है। अब यहाँ नदियों की प्रतिमाओं की स्थापना के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण, प्राकृतिक संतुलन और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जनजागरूकता को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का शुभारंभ 12 जुलाई 2026 को अपराह्न 3:00 बजे होगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके साथ विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पर्यावरणविद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतिमाओं की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि नदियों के संरक्षण और उनके प्रति समाज में जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की नदियाँ केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, कृषि और आर्थिक विकास की आधारशिला हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, नदी स्वच्छता, पर्यावरण संतुलन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। पर्यावरण विशेषज्ञ नदियों के बदलते स्वरूप, प्रदूषण की चुनौतियों और भविष्य की जल आवश्यकताओं के संबंध में अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही आमजन को नदियों की स्वच्छता बनाए रखने तथा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया जाएगा। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम की तिथि अल्प समय में निर्धारित होने के कारण सभी लोगों तक व्यक्तिगत आमंत्रण पत्र पहुँचाना संभव नहीं हो सका है। इसलिए क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवा वर्ग, विद्यार्थियों, पर्यावरण प्रेमियों और नदी संरक्षण के प्रति संवेदनशील सभी लोगों से आग्रह किया गया है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इसे सफल बनाएँ।

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स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पचनद संगम क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम है। यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुँचते हैं। पाँच नदियों की प्रतिमाओं की स्थापना से इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और अधिक मजबूत होगी तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी व्यापक स्तर पर प्रसारित होगा। जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, घटते जल स्रोत और बढ़ते प्रदूषण के कारण नदियों के संरक्षण की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ लोगों को प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का भी एहसास कराते हैं। पचनद संगम पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जल, पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनेगा। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि यदि वर्तमान पीढ़ी नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति सजग रहेगी, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल, स्वस्थ पर्यावरण और समृद्ध प्राकृतिक धरोहर उपलब्ध हो सकेगी। आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर पर अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए जल संरक्षण और नदी संवर्धन के इस जनआंदोलन का हिस्सा बनें तथा प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लें।

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