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केंद्र सरकार ने जीपीआरए आवासों का लाइसेंस शुल्क संशोधित किया, 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी नई दरें

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सभी प्रकार के जनरल पूल आवासों के लिए नई फ्लैट दरें जारी, छोटे आवास का शुल्क 230 रुपये और उच्च श्रेणी के आवास का शुल्क 6070 रुपये प्रतिमाह निर्धारित
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर में स्थित जनरल पूल रेजिडेंशियल एकॉमोडेशन (General Pool Residential Accommodation-GPRA) के लाइसेंस शुल्क (License Fee) में संशोधन करते हुए नई फ्लैट दरें जारी कर दी हैं। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (Ministry of Housing and Urban Affairs) के अंतर्गत डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार संशोधित दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों तथा संबंधित संस्थानों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि उनके नियंत्रणाधीन आवासों पर नई दरों के अनुसार लाइसेंस शुल्क की वसूली सुनिश्चित की जाए। जारी आदेश में कहा गया है कि सेंट्रल गवर्नमेंट जनरल पूल रेजिडेंशियल एकॉमोडेशन रूल्स-2017 के नियम 74 के तहत सरकार ने देशभर में उपलब्ध जीपीआरए तथा विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के विभागीय आवासों के लाइसेंस शुल्क में संशोधन करने का निर्णय लिया है। हालांकि यह संशोधन रक्षा मंत्रालय के कुछ विशेष वर्गीकृत एवं अवर्गीकृत सेवा आवासों तथा रेलवे मंत्रालय के नियंत्रणाधीन आवासों पर लागू नहीं होगा। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य लंबे समय से प्रचलित लाइसेंस शुल्क संरचना को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अद्यतन करना तथा सभी प्रकार के सरकारी आवासों के लिए एक समान और व्यावहारिक शुल्क व्यवस्था लागू करना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संशोधित शुल्क की गणना फ्लैट रेट के आधार पर की जाएगी और राशि को निकटतम दस रुपये तक गोल (Rounded Off) किया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार सबसे छोटे श्रेणी के टाइप-I सरकारी आवास, जिनका निर्मित आवासीय क्षेत्र 30 वर्गमीटर तक है, उनके लिए मासिक लाइसेंस शुल्क 230 रुपये निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार टाइप-II (26.5 से 50 वर्गमीटर) के लिए 490 रुपये, टाइप-III (44 से 65 वर्गमीटर) के लिए 740 रुपये, टाइप-IV (59 से 91.5 वर्गमीटर) के लिए 980 रुपये तथा टाइप-IV स्पेशल के लिए 1040 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किए गए हैं।
इसके अलावा बड़े आवासों के लिए भी संशोधित शुल्क लागू किया गया है। टाइप-VA (106 वर्गमीटर तक) के लिए 1850 रुपये, टाइप-VB (106 वर्गमीटर से अधिक) के लिए 1960 रुपये, टाइप-VIA (159.5 वर्गमीटर तक) के लिए 2430 रुपये, टाइप-VIB (159.5 वर्गमीटर से अधिक) के लिए 2900 रुपये, टाइप-VII (189.5 से 224.5 वर्गमीटर) के लिए 3400 रुपये, जबकि सबसे उच्च श्रेणी टाइप-VIII (243 से 522 वर्गमीटर) के लिए 6070 रुपये प्रतिमाह का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमित सरकारी आवास से पृथक आवंटित सर्वेंट क्वार्टर एवं गैरेज के लिए भी अलग से शुल्क लिया जाएगा। संशोधित व्यवस्था के अनुसार सर्वेंट क्वार्टर के लिए 100 रुपये प्रतिमाह तथा गैरेज के लिए 70 रुपये प्रतिमाह लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। सरकार ने हॉस्टल आवासों के लिए भी नई शुल्क संरचना लागू की है। इसके अनुसार बिना रसोई वाले सिंगल रूम (21.5 से 30 वर्गमीटर) का मासिक शुल्क 620 रुपये, रसोई सहित सिंगल रूम (30.5 से 39.5 वर्गमीटर) का शुल्क 870 रुपये, जबकि डबल रूम (47.5 से 60 वर्गमीटर) के लिए 1200 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों तक इस आदेश की जानकारी तत्काल पहुंचाएं तथा नई दरों के अनुसार लाइसेंस शुल्क की वसूली प्रारंभ करें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जिन विभागों के पास विभागीय आवास हैं, वे भी अपने यहां संशोधित शुल्क व्यवस्था लागू करें। कार्यालय ज्ञापन की प्रतियां भारत सरकार के सभी मंत्रालयों एवं विभागों, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों एवं प्रशासकों, लोकसभा एवं राज्यसभा सचिवालय, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD), एनबीसीसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) तथा अन्य संबंधित संस्थानों को भेजी गई हैं। सीपीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया गया है कि वह अपने सर्विस सेंटरों के माध्यम से सभी आवंटियों तक संशोधित आदेश की जानकारी पहुंचाए।
एनबीसीसी को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने माध्यम से जीपीआरए आवंटियों को नई शुल्क व्यवस्था से अवगत कराए। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) से कहा गया है कि संशोधित आदेश को डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि सभी हितधारक इसे आसानी से देख सकें। मंत्रालय ने यह भी निर्देशित किया है कि डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स के सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इस आदेश की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं तथा संबंधित एस्टेट मैनेजरों के माध्यम से इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। हिंदी अनुभाग को इस कार्यालय ज्ञापन का अधिकृत हिंदी संस्करण तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आदेश में उल्लेख किया गया है कि यह निर्णय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के एकीकृत वित्त प्रभाग (Integrated Finance Wing) की सहमति के बाद लिया गया है। वित्तीय अनुमोदन 7 जुलाई 2026 को प्रदान किया गया था, जिसके उपरांत संशोधित लाइसेंस शुल्क की अधिसूचना जारी की गई। नई शुल्क संरचना से सरकारी आवासों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता आएगी तथा सभी प्रकार के आवासों के लिए एक समान शुल्क व्यवस्था लागू होगी। इससे विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में शुल्क निर्धारण संबंधी असमानता समाप्त होगी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी सरल बनेगी।
सरकारी कर्मचारियों के लिए यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 1 जुलाई 2026 से उन्हें संशोधित लाइसेंस शुल्क के अनुसार भुगतान करना होगा। संबंधित विभागों के लेखा एवं प्रशासनिक अनुभाग अब नई दरों के आधार पर वेतन से लाइसेंस शुल्क की कटौती सुनिश्चित करेंगे। सरकार का कहना है कि समय-समय पर सरकारी आवासों के रखरखाव, प्रशासनिक व्यय तथा अन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लाइसेंस शुल्क की समीक्षा की जाती है। इसी क्रम में वर्ष 2026 की संशोधित दरें लागू की गई हैं, जिससे आवास प्रबंधन प्रणाली को अधिक व्यवस्थित एवं अद्यतन बनाया जा सके। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद देशभर में जनरल पूल रेजिडेंशियल एकॉमोडेशन के सभी पात्र आवंटियों पर संशोधित शुल्क लागू होगा और संबंधित विभागों को इसकी अनुपालना सुनिश्चित करनी होगी। सरकार को उम्मीद है कि इस निर्णय से सरकारी आवासों की शुल्क व्यवस्था अधिक पारदर्शी, समान और प्रशासनिक दृष्टि से प्रभावी बनेगी।
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