
विद्यालय परिसर की सफाई कर स्वच्छता को जीवनशैली बनाने का लिया संकल्प, स्वच्छ वातावरण को बेहतर शिक्षा और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला बताया
भोपाल। विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, व्यवहारिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित बैगलेस डे के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में “स्वच्छ शौचालय–स्वस्थ बचपन” थीम पर विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के तहत विद्यार्थियों ने पुस्तकों और पारंपरिक कक्षाओं से अलग हटकर स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यवहारिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों ने विद्यालय परिसर, कक्षाओं, खेल मैदान, उद्यान तथा शौचालयों की साफ-सफाई कर श्रमदान किया और स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि अपनी दैनिक आदत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। बैगलेस डे का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, सामाजिक उत्तरदायित्व और जीवन कौशल से जोड़ना है। इसी उद्देश्य के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और यह संदेश दिया कि स्वच्छता प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। विद्यालय परिसर में स्वच्छता रैली, जागरूकता अभियान, श्रमदान, समूह चर्चा, चित्रकला, पोस्टर निर्माण और स्वच्छता शपथ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को बताया कि स्वच्छ विद्यालय स्वस्थ और सुरक्षित शिक्षा वातावरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है। यदि विद्यालय का वातावरण स्वच्छ रहेगा तो विद्यार्थियों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बीमारियों का खतरा कम होगा और पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल तैयार होगा। विशेष रूप से स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालयों की उपलब्धता बच्चों के स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और नियमित विद्यालय उपस्थिति के लिए अत्यंत आवश्यक है। “स्वच्छ शौचालय–स्वस्थ बचपन” विषय पर आयोजित जागरूकता सत्र में विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने की सही विधि, शौचालयों का उचित उपयोग, जल संरक्षण, कचरा पृथक्करण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों की जानकारी दी गई। शिक्षकों ने बताया कि स्वच्छ शौचालय केवल सुविधा नहीं बल्कि बच्चों के स्वस्थ जीवन और गरिमामय शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विद्यालयों में स्वच्छता की अच्छी व्यवस्था होने से विद्यार्थियों में अनुशासन, जिम्मेदारी और स्वच्छ जीवनशैली की आदत विकसित होती है। विद्यार्थियों ने स्वयं झाड़ू लगाकर, कक्षाओं की सफाई कर, पौधों के आसपास की घास हटाकर तथा विद्यालय परिसर को साफ-सुथरा बनाकर श्रमदान किया। बच्चों ने कचरे को गीले और सूखे अपशिष्ट में अलग-अलग एकत्रित किया तथा प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभावों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर उन्हें बताया गया कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें समाज में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।
विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। जब विद्यार्थी स्वयं स्वच्छता अभियान में भाग लेते हैं तो उनमें श्रम का सम्मान, सामूहिक कार्य की भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास होता है। यही बच्चे आगे चलकर अपने परिवार और समाज में स्वच्छता के दूत बनते हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वच्छता से जुड़े प्रेरक नारे भी लगाए, जिनमें “स्वच्छ विद्यालय–स्वस्थ विद्यार्थी”, “स्वच्छ शौचालय हमारी पहचान”, “स्वच्छता अपनाएं, बीमारियां भगाएं”, “कचरा डस्टबिन में डालें”, “स्वच्छ भारत–स्वस्थ भारत” और “आज का संकल्प, स्वच्छ रहे हर स्कूल और हर घर” जैसे संदेश प्रमुख रहे। इन नारों के माध्यम से बच्चों ने स्वच्छता के प्रति समाज को जागरूक करने का प्रयास किया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि स्वच्छता केवल विद्यालय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। घर, मोहल्ला, सार्वजनिक स्थल, सड़क, पार्क और आसपास का वातावरण भी स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार बने तो पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे अपने परिवार के सदस्यों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करें और अपने घरों में भी स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहयोग दें। कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया। विद्यार्थियों को एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से होने वाले नुकसान, जल संरक्षण के महत्व, पौधारोपण, जैविक कचरे के प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। शिक्षकों ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। यदि हम पर्यावरण को स्वच्छ रखेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य प्रदान कर सकेंगे। विद्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि श्रमदान करने से उन्हें स्वच्छता के महत्व को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं सफाई करते हैं तो सार्वजनिक स्थलों को गंदा करने से भी बचते हैं। बच्चों ने यह भी कहा कि अब वे अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में भी स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास करेंगे।
विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और सेवा भावना का विकास करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों में समय-समय पर इस प्रकार के व्यवहारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशील बनें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस अवसर पर बताया कि बच्चों में होने वाली अनेक संक्रामक बीमारियां स्वच्छता के अभाव के कारण फैलती हैं। यदि विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, साफ शौचालय, नियमित हाथ धोने की व्यवस्था और स्वच्छ परिसर सुनिश्चित किया जाए तो बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ विद्यालय, स्वस्थ विद्यार्थी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। बैगलेस डे के दौरान आयोजित इस विशेष अभियान ने विद्यार्थियों को यह सीख दी कि स्वच्छता केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। बच्चों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे विद्यालय, घर और समाज में स्वच्छता बनाए रखने का हर संभव प्रयास करेंगे, कचरा इधर-उधर नहीं फेंकेंगे, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करेंगे तथा दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करेंगे। कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और सहयोगी कर्मचारियों के सक्रिय सहयोग की सराहना की। यह विश्वास व्यक्त किया गया कि बैगलेस डे पर आयोजित “स्वच्छ शौचालय–स्वस्थ बचपन” अभियान केवल एक दिन की गतिविधि नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में स्वच्छता, स्वास्थ्य, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की स्थायी भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगा। इस पहल से बच्चों में स्वच्छ भारत के निर्माण की सोच मजबूत होगी और वे भविष्य में एक जिम्मेदार, जागरूक तथा संवेदनशील नागरिक के रूप में समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।