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विद्युत उपभोक्ताओं को अधिकारों और शिकायत निवारण प्रक्रिया की दी गई विस्तृत जानकारी

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उपभोक्ता जागरूकता कार्यशाला में सेवा गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध समाधान पर दिया गया विशेष जोर
जशपुर, 24 जुलाई। बिजली उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों, विद्युत सेवाओं के निर्धारित मानकों तथा शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की प्रक्रिया के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से जशपुर में आयोजित उपभोक्ता जागरूकता कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित सेवा गुणवत्ता मानकों एवं उपभोक्ता अधिकारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम, अंबिकापुर तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को विद्युत सेवाओं से जुड़े विभिन्न नियमों, अधिकारों और शिकायतों के समाधान की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। कार्यक्रम में घरेलू एवं गैर-घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी व्यवस्था की सफलता तभी संभव है जब उपभोक्ता अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने दायित्वों के प्रति भी पूरी तरह जागरूक हों। इसी उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में बिजली सेवाओं की गुणवत्ता, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, सेवा मानकों, बिल संबंधी समस्याओं, मीटर परीक्षण, नए कनेक्शन, लोड वृद्धि, विद्युत आपूर्ति और अन्य तकनीकी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला का शुभारंभ उपभोक्ताओं का स्वागत करते हुए किया गया। अधिकारियों ने कहा कि विद्युत वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और उपभोक्ता-केंद्रित बनाने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं और विभाग के बीच विश्वास एवं संवाद को मजबूत करना भी है। कार्यक्रम के दौरान विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम के अध्यक्ष डॉ. के. सेनी ने उपभोक्ताओं को शिकायत निवारण प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी उपभोक्ता को बिजली बिल, मीटर रीडिंग, मीटर खराबी, नए कनेक्शन, लोड परिवर्तन, विद्युत आपूर्ति में व्यवधान या अन्य किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो उसके समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है। उपभोक्ता सबसे पहले संबंधित कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं और यदि निर्धारित समय-सीमा में समाधान नहीं होता है, तो वे उच्च स्तर पर भी अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न सेवा मानक निर्धारित किए हैं। इन मानकों के अनुसार बिजली वितरण कंपनी को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश सेवाओं में विलंब होता है या गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार प्राप्त है। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि प्रत्येक उपभोक्ता को सही और पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था प्राप्त करने का अधिकार है। यदि किसी उपभोक्ता को बिजली बिल में त्रुटि दिखाई देती है, मीटर रीडिंग में अंतर होता है या बिल अपेक्षा से अधिक प्राप्त होता है, तो वह संबंधित कार्यालय में आवेदन देकर जांच की मांग कर सकता है। आवश्यकता पड़ने पर मीटर परीक्षण भी कराया जा सकता है और जांच में त्रुटि पाए जाने पर नियमानुसार आवश्यक सुधार किए जाते हैं। विशेषज्ञों ने मीटर संबंधी शिकायतों पर विशेष जानकारी देते हुए कहा कि मीटर की तकनीकी खराबी, मीटर बंद होना, मीटर की सटीकता को लेकर संदेह या मीटर परिवर्तन जैसी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित है। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई कि किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में स्वयं छेड़छाड़ करने के बजाय तत्काल विद्युत विभाग को सूचित करें, ताकि सुरक्षित एवं नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। कार्यक्रम में नए विद्युत कनेक्शन, अस्थायी कनेक्शन, नामांतरण, भार वृद्धि एवं भार कमी की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश सेवाएं सरल और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उपभोक्ताओं को आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई की जाती है।
ऊर्जा संरक्षण को लेकर भी कार्यशाला में विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा की बचत केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि प्रत्येक उपभोक्ता आवश्यकता के अनुसार बिजली का उपयोग करे, ऊर्जा दक्ष उपकरण अपनाए और अनावश्यक बिजली की खपत से बचे, तो विद्युत संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। कार्यशाला में एलईडी प्रकाश व्यवस्था, ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग तथा अनावश्यक विद्युत खपत कम करने के उपायों की भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान बिजली सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बिजली से जुड़े कार्यों में लापरवाही गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। इसलिए टूटे हुए तारों, क्षतिग्रस्त विद्युत उपकरणों, खुले ट्रांसफार्मरों तथा अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों की जानकारी तुरंत विभाग को देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बच्चों को विद्युत उपकरणों से दूर रखने तथा बारिश के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की भी सलाह दी। उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से उपभोक्ता घर बैठे बिजली बिल का भुगतान, शिकायत दर्ज करना, शिकायत की स्थिति देखना, नए कनेक्शन के लिए आवेदन करना तथा अन्य अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल सेवाओं से पारदर्शिता बढ़ी है और उपभोक्ताओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम हुई है। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने उपभोक्ताओं द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। बिजली बिलों में संशोधन, मीटर परीक्षण, सेवा गुणवत्ता, विद्युत आपूर्ति, शिकायतों के समाधान तथा विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़े अनेक विषयों पर खुलकर चर्चा की गई। इससे उपभोक्ताओं की अनेक जिज्ञासाओं का समाधान हुआ और उन्हें अपने अधिकारों तथा उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी प्राप्त हुई।
जशपुर विद्युत विभाग के अधीक्षण यंत्री सत्य प्रकाश कुमार, कार्यपालन यंत्री विनोद पंडिता सहित विभाग के अन्य अधिकारियों ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विभाग उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा तथा सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि विद्युत उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को त्वरित एवं निष्पक्ष समाधान उपलब्ध कराना है। यदि किसी उपभोक्ता को विभागीय स्तर पर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फोरम के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत कर सकता है। फोरम द्वारा शिकायतों की सुनवाई कर नियमानुसार निर्णय लिया जाता है। विद्युत सेवाओं की गुणवत्ता केवल विभागीय प्रयासों से नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से भी बेहतर बन सकती है। समय पर बिल भुगतान, ऊर्जा संरक्षण, बिजली चोरी की रोकथाम, सुरक्षित विद्युत उपयोग तथा विभाग के साथ सहयोगात्मक व्यवहार विद्युत व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि बिजली चोरी न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे विद्युत व्यवस्था पर अतिरिक्त भार पड़ता है और ईमानदार उपभोक्ताओं पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। इसलिए सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे वैध विद्युत कनेक्शन का ही उपयोग करें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी विभाग को दें।
उपस्थित उपभोक्ताओं ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को उपयोगी बताते हुए कहा कि उन्हें पहली बार विस्तार से यह जानकारी मिली कि बिजली सेवाओं से संबंधित शिकायतें किस प्रकार दर्ज कराई जाती हैं, उनका समाधान किस समय-सीमा में होना चाहिए तथा उपभोक्ताओं को किन-किन अधिकारों का संरक्षण प्राप्त है। प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि उपभोक्ता जागरूकता ही बेहतर विद्युत सेवाओं की सबसे मजबूत आधारशिला है। जब उपभोक्ता अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और उपलब्ध व्यवस्थाओं के प्रति पूरी तरह जागरूक होंगे, तब शिकायतों का समाधान भी अधिक प्रभावी होगा और विभाग एवं नागरिकों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी। यह कार्यशाला केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उपभोक्ताओं को यह विश्वास भी दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा, समयबद्ध शिकायत निवारण, सुरक्षित बिजली उपयोग और ऊर्जा संरक्षण—इन चारों स्तंभों पर ही एक आधुनिक, विश्वसनीय और जनहितैषी विद्युत व्यवस्था का निर्माण संभव है। ऐसे आयोजन उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ शासन, विद्युत वितरण कंपनी और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सुशासन एवं जनसेवा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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