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HQ Report
भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक बनाने की दिशा में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के अंतर्गत व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना, वितरण तंत्र को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना, बिजली हानियों (AT&C Losses) में कमी लाना तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है। राज्य में बिजली वितरण नेटवर्क के विस्तार के लिए लगभग 24,170 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें केंद्र सरकार से 60 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। इन परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक लगभग 9,200 करोड़ रुपये के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं तथा 3,513 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण भी किए जा चुके हैं। योजना के माध्यम से शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को समान रूप से मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

RDSS योजना के अंतर्गत बिजली वितरण नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए राज्यभर में बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। इसके तहत 228 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों की स्थापना, 15,336 किलोमीटर 33/11 केवी लाइन निर्माण, 20,019 किलोमीटर एलटी लाइन निर्माण, 358 कृषि फीडरों का विभक्तिकरण, 1,848 कैपेसिटर बैंक की स्थापना तथा 10,365 नए वितरण ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इन कार्यों से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ वोल्टेज संबंधी समस्याओं में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिक स्थिर एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध हो सकेगी। कृषि उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए फीडर पृथक्करण तथा वितरण तंत्र के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है, जिससे किसानों को निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपलब्ध हो सके।

योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू स्मार्ट मीटरिंग एवं डिजिटल तकनीक का विस्तार भी है। प्रदेश में अब तक लगभग 28.50 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटरों के माध्यम से बिजली खपत की रीयल-टाइम निगरानी, सटीक बिलिंग, ऊर्जा प्रबंधन तथा उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही स्मार्ट मीटरिंग और सिस्टम मीटरिंग के विस्तार से वितरण कंपनियों को बिजली हानियों पर प्रभावी नियंत्रण रखने में सहायता मिल रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था के माध्यम से विद्युत आपूर्ति में आने वाली तकनीकी समस्याओं की शीघ्र पहचान कर उनका त्वरित समाधान किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं को शिकायतों के शीघ्र निराकरण, बेहतर सेवा गुणवत्ता और निर्बाध बिजली आपूर्ति का लाभ मिल रहा है। आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी आधारित नियंत्रण प्रणाली बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।










