
भोपाल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश के दुग्ध उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और वर्तमान में राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी लगभग 12 प्रतिशत है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुँचाना है। इसके लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को नई गति देने, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों और पशुपालकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि के साथ-साथ पशुपालन और डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। इन क्षेत्रों के विकास से किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को गति मिलेगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित किया जाए और दुग्ध उत्पादन की पूरी श्रृंखला को अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पशुधन की समृद्ध परंपरा और प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करती है। यदि आधुनिक प्रबंधन, वैज्ञानिक पशुपालन, बेहतर नस्ल संवर्धन, संतुलित पशु आहार, समय पर टीकाकरण तथा गुणवत्तापूर्ण पशु स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए तो प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डेयरी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने, दुग्ध संग्रहण और शीत श्रृंखला (कोल्ड चेन) का विस्तार करने, प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने तथा किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इससे दुग्ध उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का विस्तार केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दुग्ध प्रसंस्करण, परिवहन, विपणन और मूल्य संवर्धन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं की बड़ी भागीदारी पशुपालन और डेयरी गतिविधियों में रहती है। ऐसे में इस क्षेत्र का विकास महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। डेयरी गतिविधियों के विस्तार से महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार पशुपालकों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, पशु चिकित्सा सुविधाएँ, कृत्रिम गर्भाधान सेवाएँ, बेहतर नस्ल विकास, चारे की उपलब्धता और वित्तीय सहायता जैसी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही पशुधन के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और रोग नियंत्रण कार्यक्रमों को भी प्रभावी बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्य बनाने के लिए सरकार, सहकारी संस्थाओं, निजी क्षेत्र और पशुपालकों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएंगे। आधुनिक डेयरी अवसंरचना, वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर विपणन व्यवस्था के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार की योजनाओं, किसानों और पशुपालकों की सक्रिय भागीदारी तथा आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग से मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल करेगा। राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य ग्रामीण समृद्धि, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।









