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नई दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से आत्मीय भेंट, कृषि एवं ग्रामीण विकास को नई गति देने पर हुआ व्यापक मंथन

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नई दिल्ली।

नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू से आत्मीय भेंट हुई। इस अवसर पर कृषि, किसान कल्याण, ग्रामीण विकास तथा पूर्वोत्तर राज्यों में कृषि क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत एवं सार्थक चर्चा की गई। बैठक में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

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भेंट के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश के करोड़ों किसानों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में कृषि क्षेत्र को अधिक आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में वृद्धि करने तथा प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई।

चर्चा के दौरान आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया। कहा गया कि आज के समय में वैज्ञानिक खेती, उन्नत बीजों का उपयोग, आधुनिक सिंचाई प्रणाली, कृषि यंत्रीकरण तथा डिजिटल तकनीकों के प्रयोग से खेती को अधिक उत्पादक बनाया जा सकता है। किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर उनकी लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है। इस संबंध में राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान और सफल मॉडलों को साझा करने पर भी विचार किया गया।

बैठक में किसान कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। किसानों को समय पर कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना, गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना तथा कृषि आधारित उद्योगों के विकास के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष बल दिया गया। यह भी कहा गया कि किसानों को बाजार से बेहतर जोड़ने और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।

ग्रामीण विकास के संदर्भ में चर्चा करते हुए दोनों नेताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि आधारभूत सुविधाओं, सड़क, पेयजल, आवास, आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से ही गांवों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलती है और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

बैठक में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए स्व-सहायता समूहों को कृषि, डेयरी, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु उद्योगों से जोड़ना आवश्यक है। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में विशेष रूप से प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और बागवानी की अपार संभावनाओं पर चर्चा हुई। अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से समृद्ध है। ऐसे में वहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया गया। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने के लिए बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

बैठक में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए कृषि क्षेत्र में ऐसी तकनीकों को अपनाना आवश्यक है, जिनसे पानी की बचत हो, भूमि की उर्वरता बनी रहे और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ भविष्य की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।

कृषि अनुसंधान और नवाचार पर भी विचार-विमर्श हुआ। आधुनिक अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के सहयोग से किसानों तक नई तकनीकें और उन्नत कृषि पद्धतियाँ पहुँचाने पर बल दिया गया। साथ ही कृषि विस्तार सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने तथा किसानों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

ग्रामीण अवसंरचना के विकास को लेकर भी व्यापक विचार-विमर्श किया गया। ग्रामीण सड़कों, भंडारण सुविधाओं, कोल्ड चेन, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के विस्तार को ग्रामीण विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। कहा गया कि बेहतर अवसंरचना उपलब्ध होने से कृषि उत्पादों का विपणन आसान होगा और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त होगा।

बैठक में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार की विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए राज्यों के साथ निरंतर समन्वय आवश्यक है। योजनाओं की नियमित समीक्षा, पारदर्शी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित निगरानी से विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इससे किसानों और ग्रामीण समुदायों को समय पर योजनाओं का लाभ मिलेगा।

दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत के निर्माण में कृषि और ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि किसानों की आय में वृद्धि होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाएँ मजबूत होंगी और आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यापक उपयोग होगा, तो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। इसी उद्देश्य से कृषि क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान और तकनीक आधारित विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भेंट के दौरान सहयोग और समन्वय की भावना को और अधिक मजबूत बनाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास से जुड़े अनुभवों के आदान-प्रदान, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के माध्यम से विकास की नई संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि समन्वित प्रयासों से किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और कृषि क्षेत्र देश के विकास का और अधिक मजबूत आधार बनेगा।

नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में हुई यह आत्मीय भेंट केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सहयोग, समन्वय और साझा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवाद साबित हुई। बैठक में हुए विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों की समृद्धि, कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही हैं। आने वाले समय में इन प्रयासों से कृषि उत्पादन, किसानों की आय और ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद व्यक्त की गई।

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