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भारतीय पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में नई जिम्मेदारी: डॉ. कविता राव बनीं इंडियन टूरिज्म ब्रांड एंबेसडर

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दबदबा न्यूज | आपकी आवाज, आपकी खबर
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, आध्यात्मिक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और विविध पर्यटन स्थलों को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी सक्रिय और समर्पित व्यक्तित्व डॉ. कविता राव को इंडियन टूरिज्म ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण दायित्व की जानकारी साझा करते हुए डॉ. कविता राव ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे भारत की पर्यटन क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर बताया।
डॉ. कविता राव की नियुक्ति को भारतीय पर्यटन के प्रचार-प्रसार, पर्यटन पेशेवरों के बीच बेहतर समन्वय तथा देश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विशेषताओं को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों तक पहुंचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। भारत केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि विविध सभ्यताओं, परंपराओं, भाषाओं, कलाओं, आस्थाओं और जीवन-शैलियों का अद्भुत संगम है। उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर दक्षिण के समुद्री तटों तक, पश्चिम के विशाल मरुस्थलों से लेकर पूर्वोत्तर के हरे-भरे प्राकृतिक क्षेत्रों तक भारत अपने भीतर अनगिनत पर्यटन अनुभव समेटे हुए है।
डॉ. कविता राव ने कहा कि इंडियन टूरिज्म ब्रांड एंबेसडर के रूप में यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान के साथ-साथ देश की पर्यटन पहचान को मजबूत बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। भारत की विविधता, सांस्कृतिक समृद्धि और अतिथि सत्कार की परंपरा को दुनिया के सामने प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना इस दायित्व का प्रमुख उद्देश्य रहेगा। उन्होंने भारतीय पर्यटन को एक साझा मंच के माध्यम से आगे बढ़ाने, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को जोड़ने और देश की विशिष्ट पर्यटन संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भारत की पहचान सदियों से अपनी अतिथि-सत्कार परंपरा के लिए रही है। “अतिथि देवो भवः” का भाव भारतीय जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश में आने वाले पर्यटक केवल ऐतिहासिक इमारतों या प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण नहीं करते, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, स्थानीय जीवन, भोजन, कला, संगीत, परंपराओं और लोगों के आत्मीय व्यवहार का भी अनुभव करते हैं। यही विशेषता भारत को विश्व के अन्य पर्यटन स्थलों से अलग पहचान प्रदान करती है।
डॉ. कविता राव की नई भूमिका का उद्देश्य भारत के पर्यटन क्षेत्र को एक व्यापक वैश्विक मंच से जोड़ना, पर्यटन से जुड़े पेशेवरों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना तथा देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पर्यटन विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है। भारत के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में पर्यटन की अपनी अलग पहचान और संभावनाएं हैं। प्रत्येक क्षेत्र की संस्कृति, भाषा, खानपान, लोककला, स्थापत्य, प्राकृतिक दृश्य और परंपराएं पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण रखती हैं।
भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की भी अत्यंत व्यापक संभावनाएं हैं। वाराणसी, उज्जैन, हरिद्वार, ऋषिकेश, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, अमृतसर, बोधगया, अजमेर, तिरुपति, द्वारका, रामेश्वरम और अनेक अन्य धार्मिक स्थल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भारत की आध्यात्मिक परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि योग, ध्यान, आयुर्वेद और जीवन के संतुलित दर्शन के माध्यम से विश्व समुदाय को एक सकारात्मक संदेश भी देती है।
पर्यटन के क्षेत्र में भारत की ऐतिहासिक धरोहरें भी विशेष महत्व रखती हैं। ताजमहल, कुतुब मीनार, लाल किला, अजंता-एलोरा की गुफाएं, खजुराहो के मंदिर, सांची स्तूप, कोणार्क सूर्य मंदिर, हम्पी, महाबलीपुरम और अनेक ऐतिहासिक स्थल भारत की प्राचीन कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक समृद्धि के साक्षी हैं। इन धरोहरों का संरक्षण और विश्व स्तर पर प्रचार भारत की पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत में प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाएं भी अत्यंत व्यापक हैं। हिमालयी क्षेत्र, पर्वतीय पर्यटन स्थल, समुद्री तट, वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, नदियां, झीलें, जलप्रपात और वन क्षेत्र पर्यटकों को विविध अनुभव प्रदान करते हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, केरल के बैकवाटर, गोवा के समुद्री तट, राजस्थान के मरुस्थलीय पर्यटन स्थल तथा मध्यप्रदेश के वन्यजीव और प्राकृतिक क्षेत्र देश की पर्यटन विविधता को प्रदर्शित करते हैं।
मध्यप्रदेश को “भारत का हृदय” कहा जाता है और यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। खजुराहो, सांची, भीमबेटका, उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, मांडू, पचमढ़ी, कान्हा, बांधवगढ़, पेंच और सतपुड़ा जैसे पर्यटन स्थल इतिहास, संस्कृति, आध्यात्मिकता और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन, विरासत पर्यटन, वन्यजीव पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यटन केवल मनोरंजन या यात्रा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण से भी जुड़ा हुआ क्षेत्र है। जब किसी क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ती है तो स्थानीय होटल, परिवहन, भोजनालय, हस्तशिल्प, गाइड सेवा, लोक कलाकारों और छोटे व्यापारियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। इस दृष्टि से पर्यटन स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और आर्थिक विकास को गति देने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
डॉ. कविता राव की नियुक्ति से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों, संस्थाओं और स्थानीय पर्यटन उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय की संभावना भी बढ़ेगी। पर्यटन के विकास के लिए केवल किसी एक संस्था या विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं होते। इसके लिए सरकार, पर्यटन उद्योग, स्थानीय समुदाय, होटल व्यवसाय, यात्रा एजेंसियों, परिवहन सेवाओं, सांस्कृतिक संगठनों और पर्यटन विशेषज्ञों के बीच सहयोग आवश्यक है। एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से पर्यटन स्थलों की जानकारी, सुविधाओं और विशेषताओं को व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
आज डिजिटल तकनीक ने पर्यटन के स्वरूप को तेजी से बदल दिया है। पर्यटक यात्रा से पहले इंटरनेट, सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों से पर्यटन स्थलों की जानकारी प्राप्त करते हैं। ऐसे समय में भारत की सकारात्मक और प्रामाणिक पर्यटन छवि को डिजिटल मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आवश्यक है। डॉ. कविता राव की भूमिका भारतीय पर्यटन की पहुंच को व्यापक बनाने और डिजिटल माध्यमों से वैश्विक दर्शकों तक देश की विविधता पहुंचाने में उपयोगी हो सकती है।
भारत में पर्यटन के प्रचार के साथ-साथ जिम्मेदार और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। प्राकृतिक स्थलों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति का सम्मान और ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा पर्यटन विकास के महत्वपूर्ण पहलू हैं। पर्यटकों को भी यह समझना होगा कि वे जिन स्थलों का भ्रमण कर रहे हैं, उनकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डॉ. कविता राव ने भारतीय पर्यटन को विश्व से जोड़ने और देश की विशिष्ट पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने की भावना व्यक्त की है। “भारत को पर्यटन के माध्यम से विश्व से जोड़ना” केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक शक्ति और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण लक्ष्य है। भारत की विविधता में एकता, प्राचीन परंपराएं और आधुनिक विकास की गति विश्वभर के पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
पर्यटन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व भी लगातार बढ़ रहा है। महिला पर्यटन उद्यमी, ट्रैवल विशेषज्ञ, गाइड, होटल प्रबंधक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि देश की पर्यटन पहचान को मजबूत बनाने में योगदान दे रही हैं। डॉ. कविता राव की नियुक्ति पर्यटन क्षेत्र में महिला नेतृत्व और सहभागिता को प्रोत्साहित करने वाली उपलब्धि के रूप में भी देखी जा रही है।
भारत की लोककला, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद पर्यटन से सीधे जुड़े हुए हैं। विभिन्न राज्यों के हस्तनिर्मित वस्त्र, चित्रकला, मूर्तिकला, आभूषण, मिट्टी कला और स्थानीय उत्पाद पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण रखते हैं। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार प्राप्त हो सकता है। इससे पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी बल मिलता है।
ग्रामीण पर्यटन भारत की एक महत्वपूर्ण संभावना है। देश के गांवों में स्थानीय जीवन, पारंपरिक कृषि, लोक संस्कृति, ग्रामीण भोजन और प्राकृतिक वातावरण को देखने के लिए देश-विदेश के पर्यटकों की रुचि बढ़ रही है। ग्रामीण पर्यटन से स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सकता है और गांवों की सांस्कृतिक पहचान को भी नई पहचान प्राप्त हो सकती है।
भारत में चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियां विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। भारत की स्वास्थ्य सेवाओं और पारंपरिक ज्ञान को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए पर्यटन क्षेत्र की प्रभावी भूमिका महत्वपूर्ण है।
पर्यटन विकास के लिए बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क के साथ स्वच्छता, सुरक्षा, आवास और डिजिटल जानकारी की उपलब्धता भी आवश्यक है। पर्यटकों को किसी स्थान तक पहुंचने, वहां ठहरने और स्थानीय स्थलों का भ्रमण करने में सुविधा मिले तो पर्यटन अनुभव अधिक सकारात्मक बनता है। पर्यटन से जुड़े सभी पक्षों के बीच समन्वय से देश की पर्यटन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
डॉ. कविता राव की नियुक्ति भारतीय पर्यटन के प्रचार और वैश्विक संपर्क को नई दिशा देने की संभावना रखती है। उनके माध्यम से भारत की पर्यटन क्षमता, सांस्कृतिक विविधता और विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यह भूमिका केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय पर्यटन को एक मजबूत वैश्विक पहचान दिलाने की सामूहिक यात्रा का हिस्सा है।
भारत की पर्यटन शक्ति उसकी विविधता में निहित है। यहां हर राज्य और हर क्षेत्र की अपनी अलग कहानी है। कहीं प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य कला है, कहीं ऐतिहासिक किलों की भव्यता, कहीं घने जंगल और वन्यजीव हैं, तो कहीं समुद्र और पर्वतों की प्राकृतिक सुंदरता। भारत की यही बहुरंगी पहचान विश्वभर के यात्रियों को आकर्षित करने की क्षमता रखती है।
डॉ. कविता राव की नई जिम्मेदारी से पर्यटन क्षेत्र में नए संवाद, साझेदारी और अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है। भारतीय पर्यटन को केवल लोकप्रिय स्थलों तक सीमित रखने के बजाय छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों, स्थानीय धरोहरों और कम चर्चित पर्यटन स्थलों को भी वैश्विक मंच पर स्थान दिलाना महत्वपूर्ण है। इससे पर्यटन का लाभ अधिक क्षेत्रों और समुदायों तक पहुंच सकेगा।
भारतीय पर्यटन का भविष्य आधुनिक तकनीक, बेहतर सुविधाओं, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के संतुलन पर आधारित होगा। देश की विरासत को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाए तो भारत विश्व के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में और मजबूत स्थान बना सकता है। इसके लिए पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का सहयोग और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
डॉ. कविता राव ने अपनी नियुक्ति को साझा करते हुए भारत के पर्यटन को ऊंचाइयों तक पहुंचाने, पर्यटन पेशेवरों को जोड़ने और देश की विविध पहचान को विश्वभर में प्रस्तुत करने की भावना व्यक्त की है। यह दायित्व भारत की पर्यटन शक्ति को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग और संपर्क बढ़ाने में भी सहायक हो सकता है।
दबदबा न्यूज डॉ. कविता राव को इंडियन टूरिज्म ब्रांड एंबेसडर नियुक्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता है। आशा है कि उनके नेतृत्व और प्रयासों से भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन विरासत को विश्व स्तर पर नई पहचान मिलेगी तथा भारतीय पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर और सकारात्मक संभावनाएं विकसित होंगी।
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