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राज कपूर से सीखा सिनेमा, अजय देवगन के बने ‘लॉन्चपैड’! 8 फिल्मों तक सीमित नहीं था कुकू कोहली का सफर

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मुंबई। हिंदी सिनेमा की दुनिया में कुछ फिल्मकार ऐसे रहे हैं जिनका फिल्मी सफर संख्या के लिहाज से भले ही बहुत लंबा न रहा हो, लेकिन उनकी रचनात्मक पहचान और फिल्मों से जुड़ा योगदान लंबे समय तक याद किया जाता है। कुकू कोहली भी ऐसे ही फिल्मकारों में शामिल रहे, जिन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम फिल्में बनाईं, लेकिन उनके करियर में ऐसे पड़ाव आए जिन्होंने उन्हें हिंदी फिल्म इतिहास में अलग पहचान दिलाई। उनका नाम विशेष रूप से अभिनेता अजय देवगन की पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ से जुड़ा है। 1991 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अजय देवगन को हिंदी सिनेमा में प्रभावशाली शुरुआत दिलाई और कुकू कोहली के निर्देशन करियर को भी एक महत्वपूर्ण पहचान मिली। हालांकि उनकी पहचान केवल आठ फिल्मों के निर्देशन तक सीमित नहीं थी। उन्होंने अपने फिल्मी जीवन में सिनेमा के अलग-अलग पक्षों को करीब से समझा और कई बड़े फिल्मकारों तथा कलाकारों के साथ काम किया। कुकू कोहली के करियर की एक दिलचस्प कड़ी महान फिल्मकार और अभिनेता राज कपूर से जुड़ी रही। राज कपूर के साथ समय बिताने और उनके कामकाज को करीब से देखने का अवसर कुकू कोहली के लिए किसी फिल्म स्कूल से कम नहीं माना जाता। राज कपूर जिस तरह कहानी, कलाकार, संगीत, भावनाओं और दर्शकों की नब्ज को एक साथ समझते थे, उससे कुकू कोहली ने सिनेमा की बारीकियां सीखीं। यही अनुभव आगे चलकर उनके फिल्मी दृष्टिकोण का आधार बना। फिल्म निर्माण के शुरुआती दौर में किसी बड़े फिल्मकार के साथ काम करना केवल तकनीकी जानकारी हासिल करने का माध्यम नहीं होता, बल्कि उससे सिनेमा की भाषा, सेट पर काम करने की शैली, कलाकारों के साथ संवाद, कहानी को पर्दे पर उतारने का तरीका और दर्शकों की पसंद को समझने का अवसर मिलता है। कुकू कोहली ने भी इसी अनुभव को अपने करियर में आगे बढ़ाया। उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि फिल्म उद्योग में सफलता केवल निर्देशित फिल्मों की संख्या से तय नहीं होती। किसी कलाकार या फिल्मकार का वास्तविक योगदान उन अवसरों और काम से भी मापा जाता है, जिनसे उसने सिनेमा की अगली पीढ़ी को प्रभावित किया। अजय देवगन जैसे अभिनेता को उनकी पहली फिल्म के माध्यम से मंच देना कुकू कोहली के करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में रहा। ‘फूल और कांटे’ में अजय देवगन की शैली, एक्शन और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया और फिल्म ने उन्हें एक नए अभिनेता के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुकू कोहली का नाम इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अपने सीमित निर्देशन कार्य के बावजूद हिंदी फिल्म उद्योग में कई महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए और ऐसे कलाकारों के साथ काम किया जिनका प्रभाव आगे लंबे समय तक बना रहा।
कुकू कोहली के लिए राज कपूर के साथ बिताया समय सिनेमा की अनौपचारिक पाठशाला जैसा रहा। राज कपूर भारतीय सिनेमा के उन दिग्गजों में शामिल थे जिन्होंने अभिनय, निर्देशन और निर्माण तीनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनके सिनेमा में मनोरंजन के साथ सामाजिक संवेदनशीलता, भावनात्मक कहानी, संगीत और आम दर्शक से सीधा जुड़ाव देखने को मिलता था। उनके साथ रहकर काम करने का अवसर किसी भी युवा फिल्मकर्मी के लिए बेहद महत्वपूर्ण अनुभव हो सकता था। कुकू कोहली ने भी राज कपूर से सिनेमा के उस दौर की कार्यप्रणाली को करीब से समझा। फिल्म का दृश्य किस तरह तैयार किया जाए, कलाकार से किस प्रकार काम लिया जाए, कैमरे के सामने भावनाओं को किस तरह प्रस्तुत किया जाए और कहानी को दर्शकों के मन तक कैसे पहुंचाया जाए—ये सभी बातें केवल किताबों से नहीं सीखी जा सकतीं। इन्हें सेट पर काम करते हुए अनुभव किया जाता है। राज कपूर के काम करने का तरीका अपने समय में विशिष्ट था और उनके साथ काम करने वाले अनेक लोगों ने फिल्म निर्माण के अलग-अलग पहलुओं को समझा। कुकू कोहली के लिए भी यह अनुभव आगे के फिल्मी जीवन में उपयोगी साबित हुआ। उन्होंने सिनेमा को केवल कैमरा और निर्देशन तक सीमित नहीं समझा, बल्कि उसे कलाकार, तकनीक, संगीत, कहानी और दर्शकों के बीच सामंजस्य की प्रक्रिया के रूप में देखा। यही कारण है कि उनका बाद का काम केवल एक निर्देशक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे फिल्मकर्मी के रूप में देखा जाता है जिसने उद्योग के विभिन्न स्तरों को करीब से समझा था। फिल्म उद्योग में संघर्ष का दौर किसी भी नए व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। पहचान बनाने से पहले लंबे समय तक छोटे-बड़े काम करने पड़ते हैं और सेट पर अलग-अलग जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। कुकू कोहली का सफर भी इसी तरह के अनुभवों से गुजरकर आगे बढ़ा। बड़े फिल्मकारों के साथ काम करने से उन्हें उद्योग की व्यावहारिक समझ मिली। उन्होंने यह जाना कि एक फिल्म केवल निर्देशक की कल्पना से नहीं बनती, बल्कि सैकड़ों लोगों की मेहनत, अनुशासन और आपसी तालमेल से तैयार होती है। राज कपूर जैसे दिग्गज के साथ समय बिताने से उन्हें रचनात्मक दृष्टि के साथ-साथ फिल्म निर्माण की व्यावहारिक दुनिया को समझने का अवसर मिला। बाद में जब उन्होंने स्वयं निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली, तो उनके पास उद्योग के अनुभवों का एक व्यापक आधार मौजूद था। इसी आधार ने उन्हें कलाकारों के साथ काम करने और कहानी को व्यावसायिक सिनेमा की जरूरतों के अनुसार प्रस्तुत करने में मदद की।
अजय देवगन के करियर की शुरुआत से जुड़ी ‘फूल और कांटे’ कुकू कोहली की सबसे चर्चित उपलब्धियों में रही। 1991 में रिलीज हुई इस फिल्म में अजय देवगन ने मुख्य भूमिका निभाई और फिल्म ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म के एक्शन दृश्यों और खासकर अजय देवगन की मोटरसाइकिल पर दो पैरों के साथ खड़े होकर एंट्री वाले दृश्य ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। यह दृश्य बाद में उनकी शुरुआती पहचान का हिस्सा बन गया। अजय देवगन आगे चलकर हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल हुए और उन्होंने एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी तथा गंभीर भूमिकाओं सहित विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए। लेकिन उनके फिल्मी सफर की शुरुआत की चर्चा होती है तो ‘फूल और कांटे’ का उल्लेख स्वाभाविक रूप से सामने आता है। इस फिल्म के निर्देशक कुकू कोहली थे और इसी कारण अजय देवगन के लॉन्च से उनका नाम स्थायी रूप से जुड़ गया। किसी नए अभिनेता को पहली फिल्म में इस तरह प्रस्तुत करना कि दर्शकों के बीच उसकी अलग पहचान बने, निर्देशक के लिए बड़ी चुनौती होती है। कुकू कोहली ने अजय देवगन की स्क्रीन इमेज को ध्यान में रखते हुए फिल्म में एक्शन और युवा ऊर्जा को प्रमुखता दी। फिल्म के माध्यम से अजय देवगन को उस समय के लोकप्रिय हिंदी सिनेमा के अनुरूप एक मजबूत नायक की छवि मिली। ‘फूल और कांटे’ की सफलता ने अजय देवगन को आगे की फिल्मों के लिए मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए अपनी पहचान मजबूत की और राष्ट्रीय पुरस्कार सहित कई महत्वपूर्ण सम्मान हासिल किए। कुकू कोहली के लिए यह फिल्म इसलिए भी विशेष रही क्योंकि उनके निर्देशन में एक ऐसा अभिनेता हिंदी सिनेमा में आया जिसने आगे चलकर कई दशकों तक अपनी उपस्थिति बनाए रखी। किसी निर्देशक की फिल्मों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन यदि उसके काम से किसी बड़े कलाकार के करियर को दिशा मिलती है तो उसका प्रभाव बहुत व्यापक हो सकता है। इसी दृष्टि से कुकू कोहली का नाम ‘फूल और कांटे’ और अजय देवगन की शुरुआत के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा। यह उनके निर्देशन करियर का वह पड़ाव था जिसने उन्हें दर्शकों और फिल्म उद्योग दोनों के बीच अलग पहचान दिलाई।
कुकू कोहली का सफर केवल निर्देशक के रूप में बनाई गई आठ फिल्मों तक सीमित नहीं था। फिल्म उद्योग में किसी व्यक्ति के योगदान को समझने के लिए केवल उसके नाम से जुड़ी फिल्मों की सूची देखना पर्याप्त नहीं होता। पर्दे के पीछे किए गए काम, विभिन्न फिल्मकारों के साथ अनुभव, निर्माण प्रक्रिया की समझ और सेट पर निभाई गई अलग-अलग जिम्मेदारियां भी किसी फिल्मकर्मी के करियर का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। कुकू कोहली ने भी अपने करियर में विभिन्न बड़े प्रोजेक्ट्स के सेट पर काम किया और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखा। यह अनुभव उन्हें अलग-अलग प्रकार के सिनेमा को समझने में मदद करता रहा। फिल्म उद्योग में काम करने वाले फिल्मकारों के लिए यह अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि प्रत्येक फिल्म का निर्माण अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आता है। किसी फिल्म का बजट, कलाकार, लोकेशन, कहानी, तकनीक और दर्शकों की अपेक्षाएं अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे में एक फिल्मकर्मी जितने अधिक विविध अनुभवों से गुजरता है, उसकी रचनात्मक समझ उतनी व्यापक होती जाती है। कुकू कोहली ने अपने करियर में इसी तरह के अनुभव हासिल किए। निर्देशन के क्षेत्र में आने के बाद भी उन्होंने सिनेमा की व्यावसायिक जरूरतों और दर्शकों की पसंद को समझने पर जोर दिया। उनका काम उस दौर के हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय शैली से जुड़ा रहा, जिसमें कहानी के साथ एक्शन, रोमांस, संगीत और भावनात्मक तत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। उनकी फिल्मों में मनोरंजन को प्रमुखता दी गई और यही उस दौर के मुख्यधारा के दर्शकों की अपेक्षा भी थी। हालांकि उनके निर्देशन की फिल्मोग्राफी बहुत लंबी नहीं रही, लेकिन जिन फिल्मों से उनका नाम जुड़ा, उनमें कुछ ऐसी कड़ियां थीं जिनका हिंदी फिल्म उद्योग पर अलग प्रभाव पड़ा। खासतौर पर अजय देवगन को लॉन्च करना उनकी विरासत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके करियर की कहानी यह भी बताती है कि फिल्म उद्योग में लंबे समय तक सक्रिय रहने का अर्थ केवल लगातार फिल्में बनाते रहना नहीं है। कई बार कुछ चुनिंदा प्रोजेक्ट ही फिल्मकार की पहचान तय कर देते हैं। कुकू कोहली के मामले में ‘फूल और कांटे’ ऐसी ही फिल्म साबित हुई। वहीं राज कपूर से प्राप्त अनुभव ने उनके फिल्मी दृष्टिकोण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कुकू कोहली की कहानी संघर्ष, सीख और सही अवसरों के महत्व को सामने लाती है। हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाना आसान नहीं रहा है। विशेष रूप से उस दौर में जब फिल्म उद्योग में स्थापित परिवारों और अनुभवी फिल्मकारों का प्रभाव मजबूत था, नए लोगों को अपनी पहचान बनाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ता था। कुकू कोहली ने भी फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम किया और धीरे-धीरे निर्देशन तक पहुंचे। उनके लिए राज कपूर जैसे दिग्गज के साथ काम करना एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन उस अवसर को सीख में बदलना उनकी अपनी मेहनत और लगन का हिस्सा था। फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने के बाद उन्होंने अपने निर्देशन में उस अनुभव का इस्तेमाल किया। अजय देवगन को लॉन्च करने का अवसर भी उनके करियर में निर्णायक मोड़ बनकर आया। एक नए अभिनेता को लेकर फिल्म बनाना उस समय भी जोखिम भरा काम था, लेकिन ‘फूल और कांटे’ ने इस जोखिम को सफलता में बदल दिया। फिल्म की सफलता ने अजय देवगन के साथ-साथ कुकू कोहली को भी पहचान दिलाई। अजय देवगन का आगे का करियर जितना बड़ा हुआ, उनकी पहली फिल्म का महत्व भी उतना ही बढ़ता गया। यही कारण है कि कुकू कोहली का नाम आज भी अजय देवगन के शुरुआती सफर के संदर्भ में लिया जाता है। उनके करियर की खासियत यह रही कि उन्होंने कम फिल्मों के बावजूद सिनेमा में कुछ ऐसे योगदान किए जिनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। फिल्मी इतिहास में ऐसे कई निर्देशक और तकनीशियन रहे हैं जिनकी फिल्मोग्राफी बहुत बड़ी नहीं रही, लेकिन उनका कोई एक काम या किसी कलाकार के करियर में उनकी भूमिका उन्हें यादगार बना देती है। कुकू कोहली भी इसी श्रेणी में आते हैं। उनका सफर यह दिखाता है कि सिनेमा में पहचान केवल संख्या से नहीं, बल्कि अनुभव, रचनात्मक दृष्टि और सही समय पर किए गए महत्वपूर्ण काम से बनती है। राज कपूर से मिली सीख और अजय देवगन के करियर की शुरुआत से जुड़ी उनकी भूमिका उनके फिल्मी जीवन के दो ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, जिन्होंने उनके नाम को हिंदी सिनेमा की कहानी में स्थायी स्थान दिया।
कुकू कोहली की फिल्मी यात्रा को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि उन्होंने सिनेमा की एक पीढ़ी से सीख लेकर अगली पीढ़ी के कलाकार को मंच दिया। राज कपूर के साथ काम करके उन्होंने उस दौर के सिनेमा की कार्यप्रणाली और रचनात्मक दृष्टि को करीब से समझा। इसके बाद अपने निर्देशन करियर में उन्होंने मुख्यधारा के दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए फिल्में बनाईं और अजय देवगन जैसे अभिनेता को पहली फिल्म में अवसर दिया। ‘फूल और कांटे’ के बाद अजय देवगन ने अपने अभिनय और विविध भूमिकाओं के माध्यम से लंबा सफर तय किया। आज उनके करियर को पीछे मुड़कर देखने पर उनकी शुरुआत और उस शुरुआत को आकार देने वाले लोगों का महत्व और स्पष्ट दिखाई देता है। कुकू कोहली की भूमिका इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक नए चेहरे में संभावनाएं पहचानीं और उसे बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया। दूसरी ओर, उनका अपना सफर यह बताता है कि फिल्म उद्योग में पर्दे के पीछे किए गए काम और अनुभव भी किसी फिल्मकार की पहचान को आकार देते हैं। भले ही निर्देशन की उनकी फिल्में संख्या में सीमित रहीं, लेकिन उनका फिल्मी सफर इससे कहीं बड़ा था। उन्होंने विभिन्न सेटों पर काम करते हुए सिनेमा को समझा, अनुभवी लोगों से सीखा और फिर अपनी रचनात्मक क्षमता के अनुसार निर्देशन किया। कुकू कोहली की कहानी इस बात की याद दिलाती है कि सिनेमा में किसी व्यक्ति की विरासत केवल उसकी बनाई फिल्मों की गिनती से तय नहीं होती। कभी कोई निर्देशक किसी अभिनेता को पहला बड़ा अवसर देकर इतिहास का हिस्सा बन जाता है, तो कभी किसी महान फिल्मकार से मिली सीख उसके पूरे रचनात्मक सफर की दिशा तय करती है। राज कपूर से मिली सीख और अजय देवगन को ‘फूल और कांटे’ के जरिए लॉन्च करने की उनकी भूमिका कुकू कोहली की फिल्मी यात्रा के दो सबसे उल्लेखनीय अध्याय हैं। इस लिहाज से उनका सफर आठ फिल्मों की संख्या से कहीं अधिक व्यापक है—यह संघर्ष, सीख, अनुभव और प्रतिभा को अवसर देने की कहानी है, जिसने हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपनी अलग छाप छोड़ी।
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