
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में प्रदेश में संचालित प्रमुख विकास परियोजनाओं, जनकल्याणकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं का लाभ निर्धारित समयसीमा में आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए और किसी भी परियोजना में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में भूमि अधिग्रहण, निविदा प्रक्रिया, विभागीय समन्वय तथा विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों को विकास कार्यों की गति में बाधा नहीं बनने देने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करते हुए उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे, उद्योग, निवेश, रोजगार और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को एक-दूसरे से जोड़कर आगे बढ़ाना आवश्यक है। सरकार की प्राथमिकता विकास के साथ आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की स्थिति, उनके सामने आ रही चुनौतियों और समाधान के उपायों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाएं केवल निर्माण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके माध्यम से रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलनी चाहिए। इसी सोच के अनुरूप एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक्स हब, खेल अधोसंरचना, डिजिटल शिक्षा, विद्युत व्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और गरीब परिवारों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
एक्सप्रेसवे बनेंगे उद्योग, निवेश और रोजगार के विकास कॉरिडोर: मुख्यमंत्री ने प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को केवल आवागमन की सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले आर्थिक कॉरिडोर के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने फर्रुखाबाद लिंक, झांसी लिंक, जेवर लिंक सहित अन्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों का नियमानुसार और समयबद्ध समाधान किया जाए, ताकि निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो। एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और अन्य आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध विकास पर जोर दिया गया। नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब समेत अन्य प्रमुख परियोजनाओं को भी गति देने के निर्देश दिए गए। सरकार की सोच है कि बेहतर सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से प्रदेश में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और उद्योगों के लिए परिवहन एवं माल ढुलाई की सुविधाएं अधिक प्रभावी होंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क को औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने से छोटे और मध्यम उद्यमों को भी बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से परियोजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करने और जहां भी विभागीय समन्वय की आवश्यकता हो, वहां संबंधित विभागों के बीच तत्काल तालमेल स्थापित करने को कहा। भूमि अधिग्रहण, निविदा और निर्माण से जुड़े सभी चरणों को निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में तैयार हो रहा आधुनिक परिवहन ढांचा निवेशकों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करे और उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्रों में और मजबूत स्थान दिलाए।
बिजली चोरी और लाइन लॉस पर सख्ती, बिलिंग एवं वसूली व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश: बैठक में विद्युत व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण करने और इसके कारणों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर समीक्षा करने के बजाय प्रत्येक क्षेत्र में लाइन लॉस के वास्तविक कारणों को समझकर प्रभावी समाधान लागू किया जाना चाहिए। बिजली चोरी, खराब बिलिंग व्यवस्था, कमजोर वसूली तथा अन्य तकनीकी या प्रशासनिक कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए। विद्युत क्षेत्र में बेहतर आपूर्ति व्यवस्था के लिए वितरण तंत्र को मजबूत करना और राजस्व संग्रहण को प्रभावी बनाना आवश्यक है। अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर निगरानी और तकनीकी उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया गया। सरकार की प्राथमिकता उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति देने के साथ विद्युत वितरण व्यवस्था को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ ईमानदार उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता और शिकायतों के त्वरित समाधान पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बिजली क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और आधुनिक निगरानी व्यवस्था का प्रभावी उपयोग कर नुकसान को कम किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्रवार समीक्षा कर ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए जहां लाइन लॉस लगातार अधिक है। इन क्षेत्रों में जिम्मेदारी तय करते हुए सुधार की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। विद्युत व्यवस्था की मजबूती का सीधा संबंध उद्योग, व्यापार, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं की सुविधा से है। इसलिए सरकार बिजली वितरण तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दे रही है।
30 सितंबर तक डिजिटल पुस्तकालय पूरे करने के निर्देश, ग्रामीण युवाओं को मिलेगा अध्ययन का आधुनिक मंच: मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्थापित किए जा रहे डिजिटल पुस्तकालयों की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि सभी डिजिटल पुस्तकालयों को 30 सितंबर तक पूर्ण कर उन्हें ग्रामीण युवाओं के अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। डिजिटल युग में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंटरनेट, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और डिजिटल संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवाओं को यदि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सुविधा उपलब्ध हो, तो उन्हें पढ़ाई के लिए बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। डिजिटल पुस्तकालयों को केवल कंप्यूटर या इंटरनेट सुविधा तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अध्ययन, ज्ञान और कौशल विकास के उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, ई-पुस्तकों और अन्य शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराना इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य हो सकता है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समयसीमा में कार्य पूरा करने के साथ सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को भी कहा। ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल संसाधनों तक समान पहुंच सामाजिक और आर्थिक अवसरों के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे केंद्र विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने और डिजिटल साक्षरता बढ़ाने में भी उपयोगी हो सकते हैं। सरकार की मंशा है कि गांवों में रहने वाले युवा भी आधुनिक शिक्षा और ज्ञान के संसाधनों का उपयोग कर सकें तथा अपनी प्रतिभा को बेहतर अवसरों से जोड़ सकें। डिजिटल पुस्तकालयों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक उपकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, अध्ययन सामग्री और रखरखाव की व्यवस्था पर भी ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूर्ण कर इन केंद्रों को सक्रिय रूप से उपयोगी बनाने के निर्देश दिए।
‘जीरो पावर्टी’ अभियान के तहत पात्र परिवारों को योजनाओं का लाभ और रोजगार से जोड़ने पर जोर: मुख्यमंत्री ने ‘जीरो पावर्टी’ अभियान की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि पात्र परिवारों को आवास, राशन, आयुष्मान कार्ड और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन का उद्देश्य केवल तत्काल सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि परिवारों को दीर्घकालिक रूप से आर्थिक रूप से सक्षम बनाना होना चाहिए। इसी दृष्टि से प्रत्येक पात्र परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया। कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से परिवार की आय में स्थायी वृद्धि की संभावना बनती है और सरकारी सहायता पर निर्भरता कम की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र परिवारों की पहचान और योजनाओं के लाभ से उन्हें जोड़ने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। जिन परिवारों को आवास, खाद्यान्न सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा अथवा अन्य आवश्यक सहायता की जरूरत है, उन्हें संबंधित योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। इसके साथ परिवार के सदस्यों की योग्यता और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के लेबर अड्डों पर भी सम्मानजनक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इनमें पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, चिकित्सा और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता पर विशेष जोर दिया गया। श्रमिक प्रदेश की अर्थव्यवस्था और निर्माण गतिविधियों की महत्वपूर्ण शक्ति हैं, इसलिए उनके कार्यस्थलों और प्रतीक्षा स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सरकार की कल्याणकारी सोच में गरीब परिवारों को केवल सहायता प्रदान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के अवसर उपलब्ध कराना भी शामिल है। ‘जीरो पावर्टी’ अभियान के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा और रोजगार को एक साथ जोड़कर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
राजस्व मामलों में पारदर्शिता और सार्वजनिक परियोजनाओं में सुरक्षा-गुणवत्ता पर विशेष जोर: मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान विरासत और पैमाइश से जुड़े मामलों के पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों का सीधा संबंध आम नागरिकों की संपत्ति और अधिकारों से होता है, इसलिए इनका निस्तारण निष्पक्षता और निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जाना चाहिए। प्रयागराज में निरस्त किए गए विरासत संबंधी आवेदनों की जांच कराने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह मेरिट के आधार पर हुई हो। उन्होंने अधिकारियों को प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाने पर जोर दिया। इसके साथ स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर फायर सेफ्टी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सार्वजनिक भवनों में अग्नि सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की नियमित जांच और कमियों का समयबद्ध निराकरण आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में सीवर लाइन और मैनहोल से गुजर रहे विद्युत एवं OFC केबलों को निर्धारित मानकों के अनुसार शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए, ताकि सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके और संबंधित अधोसंरचना व्यवस्थित हो। वहीं गोरखपुर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम और मेरठ स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध पूरा करने पर जोर दिया गया। इन परियोजनाओं की निगरानी में निर्माण की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और निर्धारित समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने के साथ उनकी गुणवत्ता और उपयोगिता भी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बैठक में सामने आई विभिन्न प्राथमिकताओं से यह स्पष्ट है कि सरकार बुनियादी ढांचे, उद्योग, रोजगार, बिजली, शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, राजस्व व्यवस्था, स्वास्थ्य सुरक्षा और खेल अधोसंरचना को एक समन्वित विकास मॉडल के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। समयबद्ध क्रियान्वयन, जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ इन योजनाओं को धरातल पर उतारने से प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।