Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता के लिए टीकमगढ़ पुलिस की जनहित अपील, सुरक्षित डिजिटल जीवन के लिए नागरिकों को सतर्क रहने का संदेश

Author Image
Written by
HQ Report
“सुरक्षित रहें, सजग रहें, साइबर अपराध से बचें” — मजबूत पासवर्ड, ओटीपी की गोपनीयता, संदिग्ध लिंक से दूरी और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा नहीं करने की सलाह; साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करने की अपील
टीकमगढ़। डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ जहां मोबाइल फोन, इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को सुविधाजनक बनाया है, वहीं इनके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से टीकमगढ़ पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा एवं जागरूकता के लिए जनहित में महत्वपूर्ण संदेश जारी किया गया है। पुलिस की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि वे डिजिटल दुनिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सतर्कता को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बनाएं। जनजागरूकता संदेश में विशेष रूप से कहा गया है कि “सुरक्षित रहें, सजग रहें, साइबर अपराध से बचें”। कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जारी इस जागरूकता संदेश के माध्यम से नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण के अन्याय और अधर्म के विरुद्ध विजय के संदेश की तरह डिजिटल जीवन में भी सजगता, सतर्कता और सही आदतों के माध्यम से साइबर अपराधों से बचाव किया जा सकता है। पुलिस के अनुसार इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय उपयोगकर्ता को यह ध्यान रखना चाहिए कि सामने आने वाली प्रत्येक सूचना, लिंक, फोन कॉल, संदेश या ऑनलाइन प्रस्ताव वास्तविक हो, यह जरूरी नहीं है। साइबर अपराधी विभिन्न तरीकों से लोगों को भ्रमित कर उनके बैंक खाते, व्यक्तिगत जानकारी, सोशल मीडिया खाते अथवा डिजिटल संसाधनों तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति पर ऑनलाइन भरोसा करने, संदिग्ध लिंक खोलने, गोपनीय जानकारी साझा करने या जल्दबाजी में कोई डिजिटल लेन-देन करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। पुलिस के जागरूकता संदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी है। नागरिक यदि स्वयं जागरूक रहें, अपने परिवार के सदस्यों को भी साइबर सुरक्षा के नियमों की जानकारी दें और किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल उचित माध्यम से सूचना दें, तो साइबर अपराधों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी भावना के साथ टीकमगढ़ पुलिस ने जनहित में साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियों को अपनाने का संदेश दिया है, ताकि आम नागरिक डिजिटल सुविधाओं का लाभ सुरक्षित तरीके से उठा सकें और साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें।
मजबूत पासवर्ड और सुरक्षित डिजिटल आदतों पर जोर — जागरूकता संदेश में सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना बताया गया है। पुलिस की ओर से नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने मोबाइल, ई-मेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल खातों के लिए मजबूत तथा अलग-अलग पासवर्ड रखें। ऐसा पासवर्ड रखने से बचना चाहिए जिसे कोई व्यक्ति आसानी से अनुमान लगा सके। जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, नाम, लगातार आने वाले अंकों या बहुत सामान्य शब्दों को पासवर्ड के रूप में इस्तेमाल करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। महत्वपूर्ण डिजिटल खातों के लिए समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और जहां संभव हो वहां अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग करना भी उपयोगी हो सकता है। जागरूकता संदेश में सार्वजनिक या अनजान वाई-फाई नेटवर्क के इस्तेमाल के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय बैंकिंग या अत्यंत संवेदनशील लेन-देन से बचना चाहिए, क्योंकि उपयोगकर्ता को हमेशा यह जानकारी नहीं होती कि नेटवर्क कितना सुरक्षित है। इसी प्रकार किसी अनजान स्रोत से प्राप्त लिंक को खोलने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है। कई बार साइबर अपराधी आकर्षक संदेश, इनाम, नौकरी, बैंक खाते से संबंधित सूचना, केवाईसी अपडेट, डिलीवरी, पुरस्कार अथवा किसी अन्य बहाने से लिंक भेजते हैं और उपयोगकर्ता को उस पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे लिंक पर क्लिक करने के बाद फर्जी वेबसाइट खुल सकती है, जहां उपयोगकर्ता से व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी मांगी जा सकती है। इसलिए किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसके स्रोत और विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। पुलिस ने यह भी संदेश दिया है कि मोबाइल फोन में किसी भी अनजान या संदिग्ध एप्लीकेशन को डाउनलोड और इंस्टॉल करने से बचें। एप्लीकेशन डाउनलोड करते समय उसके स्रोत, अनुमति और विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए। अनजान एप्लीकेशन को आवश्यकता से अधिक अनुमति देना भी सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। इसी तरह मोबाइल और कंप्यूटर में उपलब्ध महत्वपूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखना, समय-समय पर आवश्यक अपडेट करना तथा डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना नागरिकों के लिए उपयोगी सावधानियां हैं। साइबर सुरक्षा का मूल उद्देश्य केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की संभावना को पहले ही कम करना है। इसलिए छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर नागरिक अपने डिजिटल जीवन को अधिक सुरक्षित बना सकते हैं। पुलिस के इस जागरूकता संदेश का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें यह समझाना है कि डिजिटल सुविधाओं का उपयोग करते समय जागरूकता और जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हैं।
ओटीपी, पिन और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें — साइबर अपराधों से बचाव के लिए टीकमगढ़ पुलिस ने विशेष रूप से बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से संबंधित गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने पर जोर दिया है। आम नागरिकों को यह समझना जरूरी है कि ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड, कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी तथा अन्य संवेदनशील विवरण किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं किए जाने चाहिए। कई बार साइबर अपराधी स्वयं को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी, कंपनी प्रतिनिधि, परिचित व्यक्ति अथवा किसी सेवा प्रदाता के रूप में प्रस्तुत कर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सामने वाले व्यक्ति की बातों पर तत्काल विश्वास करने के बजाय संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना अधिक सुरक्षित तरीका है। किसी व्यक्ति द्वारा फोन पर जल्दबाजी पैदा की जाए, खाते के बंद होने की बात कही जाए, इनाम या पुरस्कार मिलने का लालच दिया जाए अथवा किसी प्रकार का दबाव बनाया जाए, तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। डिजिटल भुगतान करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भुगतान किस व्यक्ति या संस्था को किया जा रहा है और राशि भेजने से पहले प्राप्तकर्ता का विवरण सही है। यूपीआई से संबंधित लेन-देन में भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि सामान्यतः पैसा प्राप्त करने के लिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर जाकर अपना यूपीआई पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती। इसी प्रकार स्क्रीन शेयरिंग, रिमोट एक्सेस अथवा अनजान एप्लीकेशन के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को अपने मोबाइल की गतिविधियों तक पहुंच देना भी जोखिमपूर्ण हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। पुलिस के जागरूकता संदेश में नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पहचान संबंधी दस्तावेज, मोबाइल नंबर, पता, पारिवारिक जानकारी, यात्रा संबंधी विवरण अथवा ऐसी अन्य संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करने से बचें, जिसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से साइबर सुरक्षा की जानकारी देना भी आवश्यक है, क्योंकि कई बार साइबर अपराधी अनुभव की कमी या तकनीकी जानकारी के अभाव का फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। परिवार में बच्चों, अभिभावकों और बुजुर्गों के बीच डिजिटल सुरक्षा को लेकर नियमित बातचीत की जाए तो संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचाना जा सकता है। पुलिस का यह संदेश है कि साइबर सुरक्षा में सावधानी की शुरुआत स्वयं से होती है। किसी भी व्यक्ति को अपनी गोपनीय डिजिटल जानकारी केवल इसलिए साझा नहीं करनी चाहिए क्योंकि सामने वाला व्यक्ति स्वयं को किसी संस्था का अधिकारी बताता है। सत्यापन, धैर्य और सावधानी डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण आधार हैं।
साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों को पहचानना जरूरी — टीकमगढ़ पुलिस के जनजागरूकता संदेश में नागरिकों को विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता बताई गई है। वर्तमान समय में साइबर अपराध केवल बैंक खाते से संबंधित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके अनेक रूप सामने आ सकते हैं। इनमें ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, स्मिशिंग और विशिंग, ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, सोशल मीडिया हैकिंग, क्रेडिट या डेबिट कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी, रैंसमवेयर और मैलवेयर, डेटा चोरी तथा अन्य डिजिटल ठगी शामिल हो सकती है। फिशिंग में साइबर अपराधी फर्जी ई-मेल या वेबसाइट के माध्यम से जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं, जबकि संदेश अथवा फोन कॉल के माध्यम से भी लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर किसी परिचित व्यक्ति के नाम या फोटो का इस्तेमाल करके पैसे मांगने जैसी घटनाओं से भी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। कई बार अपराधी भावनात्मक परिस्थितियों का लाभ उठाकर तत्काल सहायता या भुगतान की मांग कर सकते हैं। ऐसे में यदि किसी परिचित के नाम से भी असामान्य संदेश आए तो सीधे फोन करके या किसी दूसरे विश्वसनीय माध्यम से उसकी पुष्टि करना बेहतर है। रैंसमवेयर अथवा अन्य हानिकारक सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल उपकरणों या फाइलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है। इसी तरह डेटा चोरी की स्थिति में व्यक्तिगत या व्यावसायिक जानकारी का दुरुपयोग हो सकता है। इसलिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक नागरिक वह है जो केवल अपने साथ होने वाली ठगी से ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी सतर्क करता है। स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, बाजार, सामाजिक संस्थाओं और परिवारों में साइबर सुरक्षा पर चर्चा होने से डिजिटल जागरूकता को मजबूत किया जा सकता है। विशेष रूप से युवाओं के लिए यह जरूरी है कि वे सोशल मीडिया, गेमिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, डिजिटल भुगतान और अन्य इंटरनेट सेवाओं का उपयोग करते समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा करें। पुलिस द्वारा जारी संदेश इसी व्यापक जागरूकता की दिशा में एक जनहित पहल के रूप में देखा जा सकता है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को साइबर अपराधों के सामान्य तरीकों की पहचान कराना और उन्हें सावधान बनाना है। डिजिटल दुनिया में अपराधी अक्सर व्यक्ति की जल्दबाजी, लालच, भय या भरोसे का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य परिस्थिति में कुछ क्षण रुककर सत्यापन करना और जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराएं नहीं, तत्काल सूचना दें — टीकमगढ़ पुलिस के जागरूकता संदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि यदि कोई नागरिक साइबर अपराध का शिकार हो जाए तो उसे घबराने के बजाय तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए। साइबर अपराध की स्थिति में समय बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो गई है, तो वह तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करे और उपलब्ध जानकारी के आधार पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करे। पुलिस ने नागरिकों को यह भी सलाह दी है कि घटना से संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। संदिग्ध मोबाइल नंबर, संदेश, ई-मेल, लिंक, लेन-देन का विवरण, स्क्रीनशॉट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक संबंधी सूचना अथवा अन्य उपलब्ध डिजिटल प्रमाणों को सुरक्षित रखना जांच में उपयोगी हो सकता है। घटना के बाद संदिग्ध संदेशों को तुरंत मिटा देने के बजाय पहले उनका रिकॉर्ड सुरक्षित करना चाहिए। यदि बैंक खाते या डिजिटल भुगतान से संबंधित धोखाधड़ी हुई है, तो संबंधित बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को भी तत्काल सूचना देना आवश्यक हो सकता है, ताकि उपलब्ध सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सके। जागरूकता संदेश में स्थानीय स्तर पर पुलिस तथा जिला मुख्यालय स्थित साइबर सेल से संपर्क करने की व्यवस्था की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। साइबर अपराध की सूचना जितनी जल्दी संबंधित एजेंसी तक पहुंचती है, उतनी ही जल्दी उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू की जा सकती है। नागरिकों को यह समझना चाहिए कि साइबर अपराध होने के बाद शर्म या संकोच के कारण जानकारी छिपाना समस्या को और बढ़ा सकता है। किसी भी प्रकार की डिजिटल ठगी होने पर समय गंवाने के बजाय उचित माध्यम से शिकायत करना आवश्यक है। परिवार के सदस्यों को भी ऐसी घटना की जानकारी देने से सहायता मिल सकती है। विशेषकर बुजुर्ग या तकनीकी जानकारी कम रखने वाले व्यक्ति यदि किसी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि में फंस जाएं, तो उन्हें डांटने या दोष देने के बजाय तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साइबर सुरक्षा का उद्देश्य केवल अपराध को रोकना ही नहीं, बल्कि घटना होने के बाद पीड़ित को उचित सहायता तक पहुंचाना भी है। टीकमगढ़ पुलिस की जनहित अपील इसी दृष्टिकोण के साथ नागरिकों को सजग रहने और आवश्यकता पड़ने पर समय पर सूचना देने के लिए प्रेरित करती है। 1930 हेल्पलाइन का नंबर नागरिकों को याद रखना चाहिए, ताकि वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में वे बिना अनावश्यक देरी के संबंधित सहायता तंत्र तक पहुंच सकें।
“सोच समझकर क्लिक करें, एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ें” — टीकमगढ़ पुलिस के साइबर जागरूकता संदेश का मूल उद्देश्य डिजिटल सुविधाओं का उपयोग बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से अपनाने के लिए नागरिकों को प्रेरित करना है। आज मोबाइल फोन और इंटरनेट शिक्षा, रोजगार, व्यापार, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार और मनोरंजन सहित जीवन के अनेक क्षेत्रों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में डिजिटल माध्यमों से दूरी बनाना व्यावहारिक समाधान नहीं है; आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक व्यक्ति डिजिटल सुरक्षा के सामान्य नियमों को समझे और उनका पालन करे। पुलिस की ओर से नागरिकों को याद रखने योग्य संदेश दिया गया है कि अपनी ऑनलाइन पहचान को सुरक्षित रखें, सतर्क रहें, जागरूकता को साइबर सुरक्षा की पहली सीढ़ी मानें और सुरक्षित इंटरनेट का उपयोग करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें, संदिग्ध कॉल पर जानकारी साझा करने से बचें, ओटीपी और पिन को गोपनीय रखें, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें, अनजान एप्लीकेशन डाउनलोड न करें और डिजिटल लेन-देन करते समय हर चरण पर सावधानी बरतें। माता-पिता अपने बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के नियम समझाएं और बच्चों को यह बताएं कि किसी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया या गेमिंग प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। विद्यालयों और महाविद्यालयों में भी विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि युवा तकनीक के उपयोग के साथ उसकी जिम्मेदारियों को भी समझ सकें। इसी तरह व्यापारी, कर्मचारी, छोटे व्यवसायी और वरिष्ठ नागरिक भी डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करते समय आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाएं। साइबर सुरक्षा का सबसे मजबूत आधार जागरूक नागरिक ही हैं। जब कोई व्यक्ति संदिग्ध लिंक को खोलने से पहले जांच करता है, किसी अनजान कॉल पर ओटीपी साझा नहीं करता, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखता है, अनजान एप्लीकेशन से बचता है और साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल 1930 पर सूचना देता है, तो वह केवल स्वयं को ही सुरक्षित नहीं करता बल्कि अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित बनाने में योगदान देता है। टीकमगढ़ पुलिस द्वारा जनहित में जारी यह जागरूकता संदेश इसी सामूहिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान आकर्षित करता है। “सुरक्षित रहें, सजग रहें, साइबर अपराध से बचें” का संदेश प्रत्येक डिजिटल उपयोगकर्ता के लिए उपयोगी है। डिजिटल युग में तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से नागरिकों की साइबर समझ भी मजबूत होना आवश्यक है। जागरूकता, सावधानी, सत्यापन और समय पर सूचना—इन चार बातों को अपनी डिजिटल दिनचर्या का हिस्सा बनाकर नागरिक साइबर अपराध के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। टीकमगढ़ पुलिस की ओर से जारी यह जनहित संदेश नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल जीवन की ओर प्रेरित करता है और यह स्पष्ट करता है कि एक क्लिक करने से पहले सोचना, अपनी गोपनीय जानकारी की रक्षा करना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देना ही साइबर सुरक्षा की सबसे महत्वपूर्ण आदतों में शामिल है।
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू
आज फोकस में

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत
आज फोकस में

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
आज फोकस में

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान
आज फोकस में

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर
आज फोकस में

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान
आज फोकस में

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें