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ग्वालियर में 12 से 21 सितंबर तक सजेगा ‘विराट पुस्तक मेला’, साहित्य और संस्कृति का होगा संगम

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कला वीथिका, पड़ाव में दस दिवसीय आयोजन, पुस्तक प्रदर्शनी के साथ प्रतिदिन होगी सांस्कृतिक संध्या; 3200 से अधिक शीर्षकों की पुस्तकों का रहेगा आकर्षण
ग्वालियर। शहर में साहित्य, संस्कृति, अध्यात्म और पुस्तक प्रेम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘विराट पुस्तक मेला’ का आयोजन 12 से 21 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। दस दिवसीय यह आयोजन कला वीथिका, पड़ाव, ग्वालियर में आयोजित होगा। आयोजन में 3200 से अधिक शीर्षकों वाली पुस्तकों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण रहेगी। पुस्तक मेले के साथ प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें भजन, गीत, संगीत, नृत्य, नाटिका, आध्यात्मिक काव्य और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। आयोजकों की ओर से परिवार सहित पुस्तक मेले में पहुंचने का आमंत्रण दिया गया है। कार्यक्रम का समय प्रतिदिन शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। ‘मातृशक्ति एवं अखंड दीप जन्म शताब्दी वर्ष 2026’ की थीम से जुड़े इस आयोजन में पुस्तक और संस्कृति को एक साथ मंच प्रदान किया गया है। पुस्तक मेला केवल पुस्तकों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से शहरवासियों को साहित्य, संगीत, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। आयोजन की रूपरेखा में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और साहित्य एवं संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए विविध कार्यक्रम शामिल किए गए हैं। दस दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में प्रत्येक दिन अलग विषय पर सांस्कृतिक प्रस्तुति निर्धारित की गई है। इस प्रकार ग्वालियर में सितंबर माह के दौरान पुस्तक प्रेमियों और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है।
पुस्तक मेले में 3200 से अधिक शीर्षकों का आकर्षण — ‘विराट पुस्तक मेला’ की सबसे प्रमुख विशेषता यहां उपलब्ध पुस्तकों की व्यापक विविधता रहेगी। आयोजन की जानकारी के अनुसार मेले में 3200 से अधिक शीर्षकों की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। अलग-अलग विषयों पर पुस्तकों की मौजूदगी से विद्यार्थियों, युवाओं, साहित्य प्रेमियों, अध्यात्म में रुचि रखने वाले पाठकों और सामान्य पाठकों को अपनी पसंद की सामग्री तलाशने का अवसर मिलेगा। वर्तमान डिजिटल दौर में पुस्तकों के प्रति रुचि बनाए रखना और पाठकों को पुस्तकें सहज रूप से उपलब्ध कराना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। पुस्तक मेले जैसे आयोजन पाठकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों की पुस्तकों से परिचित होने का अवसर देते हैं। विद्यार्थी अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित सामग्री तलाश सकते हैं, वहीं साहित्य प्रेमियों को कविता, कहानी, उपन्यास और अन्य रचनात्मक साहित्य की पुस्तकें देखने का अवसर मिल सकता है। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी विभिन्न प्रकार की सामग्री उपलब्ध रहने की संभावना है। पुस्तक खरीदने के साथ पाठकों को नई पुस्तकों के बारे में जानकारी प्राप्त करने और अपनी रुचि के अनुसार सामग्री चुनने का अवसर मिलेगा। आयोजकों की ओर से मेले को परिवार सहित आने योग्य आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे बच्चों और युवाओं में भी पुस्तक पढ़ने की रुचि विकसित करने का अवसर मिल सकता है। पुस्तक मेले में आने वाले लोगों के लिए पुस्तकों का अवलोकन करना और अपनी आवश्यकता के अनुसार चयन करना कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहेगा। दस दिवसीय आयोजन होने के कारण शहरवासियों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग दिनों में मेले में आने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार पुस्तक प्रदर्शनी आयोजन का केंद्रीय आकर्षण रहेगी और 3200 से अधिक शीर्षकों की उपलब्धता इसे व्यापक स्वरूप प्रदान करेगी।
सांस्कृतिक संध्याओं में संगीत, भक्ति और कला की प्रस्तुतियां — पुस्तक मेले के साथ आयोजित होने वाली सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम की दूसरी प्रमुख विशेषता होगी। 12 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर तक प्रत्येक दिन अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां निर्धारित की गई हैं। पहले दिन शनिवार, 12 सितंबर को ‘एक शाम गुरुवर के नाम’ कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें श्री संतोष तोमर और श्री के.पी. शर्मा, गायत्री परिवार ग्वालियर से जुड़े कार्यक्रम की प्रस्तुति होगी। रविवार, 13 सितंबर को ‘भक्ति एवं राष्ट्र स्वांजलि’ शीर्षक से कार्यक्रम होगा, जिसमें श्री पियूष ताम्र एवं आराध्या ग्वालियर की शान से जुड़ी प्रस्तुति निर्धारित है। सोमवार, 14 सितंबर को ‘गणेश वंदना, राष्ट्रीय व स्वच्छता संदेश के गीत’ कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें अंकिता अनूप केलासिया तथा राज्यस्तरीय समन्वय गायिका, स्वच्छ भारत अभियान गीत व भक्ति गायन से जुड़ी प्रस्तुति होगी। मंगलवार, 15 सितंबर को ‘संस्कार से संस्कृति का पुनर्जीवन एवं संस्कारी सभा नाटिका’ कार्यक्रम निर्धारित है, जिसमें स्कूल एवं संस्कार पब्लिक स्कूल की ओर से प्रस्तुति होगी। बुधवार, 16 सितंबर को भजनों की प्रस्तुति रखी गई है, जिसमें पायल चौहान तथा तानसेन स्वर स्मृति की गायिका की प्रस्तुति होगी। गुरुवार, 17 सितंबर को ‘रामधुन—भक्ति में डूब जाएं’ कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें श्री उपेंद्र, राघवेंद्र शिरोमणि और आजा महाराज राम मंदिर से जुड़े कलाकार प्रस्तुति देंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पुस्तक मेले को साहित्यिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रंग प्रदान किया जाएगा। अलग-अलग विधाओं की प्रस्तुतियां दर्शकों को विविध सांस्कृतिक अनुभव देने का माध्यम बनेंगी।
नृत्य, गायन और संगीत के साथ आगे बढ़ेगा आयोजन — सांस्कृतिक संध्या के अगले कार्यक्रमों में भी कला की विभिन्न विधाओं को स्थान दिया गया है। शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को ‘कथक नृत्य एवं ‘आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी’ नाटिका’ प्रस्तुत की जाएगी। इसमें मोक्षी-ऋतंभरा महिला मंडल, गायत्री परिवार ग्वालियर से जुड़ी प्रस्तुति निर्धारित है। शनिवार, 19 सितंबर को ‘गायन भजन प्रस्तुति एवं सितार वादन’ का कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें श्रीमती शपली गोयल तथा माधव संगीत महाविद्यालय, संध्या बापट से जुड़ी प्रस्तुति होगी। रविवार, 20 सितंबर को ‘गायत्री दीप महायज्ञ एवं सत्संकल्प’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें गायत्री परिवार ग्वालियर से जुड़े परिवारों की सहभागिता रहेगी। इस कार्यक्रम में बच्चों की सहभागिता भी आयोजन सामग्री में दर्शाई गई है। अंतिम दिन सोमवार, 21 सितंबर को ‘आध्यात्मिक कवि संगोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्री अनिल श्रीवास्तव, श्री राजकिशोर वाजपेयी ‘अमर’ और श्री अनंगपाल सिंह ‘अनंग’ की सहभागिता निर्धारित है। इस प्रकार दस दिनों की सांस्कृतिक संध्या में भक्ति संगीत से लेकर कथक नृत्य, नाटिका, सितार वादन और काव्य संगोष्ठी तक विभिन्न विधाओं को शामिल किया गया है। कार्यक्रमों की यह विविधता पुस्तक मेले को केवल पुस्तक प्रदर्शनी के रूप में नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के संयुक्त आयोजन के रूप में प्रस्तुत करती है। शहर के लोगों को प्रत्येक दिन अलग प्रकार की प्रस्तुति देखने और भारतीय संस्कृति की विभिन्न विधाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। बच्चों और युवाओं की भागीदारी से सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिलेगा। इस तरह आयोजन में पुस्तक, संगीत, नृत्य, भक्ति और साहित्य को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया गया है।
परिवार सहित पहुंचने का आमंत्रण, बच्चों और युवाओं के लिए भी अवसर — आयोजकों ने ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों से परिवार सहित पुस्तक मेले में शामिल होने का आग्रह किया है। पुस्तक मेले में बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक और रुचिकर पुस्तकों से परिचित होने का अवसर रहेगा, जबकि युवा वर्ग विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकों का अवलोकन कर सकता है। परिवार के साथ पुस्तक मेले में आने से बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि विकसित करने और पढ़ने की आदत को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। वहीं सांस्कृतिक संध्या में बच्चों और युवाओं को भारतीय संगीत, नृत्य, भक्ति, नाट्य और साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। आयोजन में विभिन्न दिनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम रखे जाने से लोगों को अपनी रुचि के अनुसार सांस्कृतिक संध्या में शामिल होने की सुविधा मिलेगी। शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को पुस्तक मेले की गतिविधियों के साथ जोड़ा गया है। पुस्तक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का यह संयोजन शहरवासियों के लिए ज्ञान और मनोरंजन दोनों का अवसर उपलब्ध करा सकता है। आयोजन स्थल कला वीथिका, पड़ाव होने के कारण ग्वालियर शहर के लोगों के लिए यहां पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता की जा सकेगी। आयोजकों का उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों को पुस्तक और संस्कृति से जोड़ना है। पुस्तक पढ़ने की आदत समाज में ज्ञान और विचार के विस्तार का माध्यम बनती है, जबकि सांस्कृतिक गतिविधियां सामाजिक एवं पारिवारिक जुड़ाव को मजबूत करती हैं। इसी भावना के साथ दस दिवसीय कार्यक्रम में दोनों क्षेत्रों को एक साथ जोड़ा गया है। कार्यक्रम में आने वाले लोग पुस्तक प्रदर्शनी का अवलोकन करने के साथ निर्धारित समय पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद भी ले सकेंगे। इससे पुस्तक मेले का अनुभव अधिक व्यापक और विविधतापूर्ण होगा।
मातृशक्ति एवं अखंड दीप जन्म शताब्दी वर्ष 2026 से जुड़ा आयोजन — ‘विराट पुस्तक मेला’ को मातृशक्ति एवं अखंड दीप जन्म शताब्दी वर्ष 2026 से जोड़ा गया है। आयोजन सामग्री में अखिल विश्व गायत्री परिवार का उल्लेख प्रमुखता से किया गया है। कार्यक्रम में पुस्तक प्रदर्शनी के साथ गायत्री परिवार से जुड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों को भी स्थान दिया गया है। ‘एक शाम गुरुवर के नाम’, भक्ति कार्यक्रम, गायत्री दीप महायज्ञ एवं सत्संकल्प और आध्यात्मिक कवि संगोष्ठी जैसे कार्यक्रम इसी व्यापक स्वरूप का हिस्सा हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से साहित्य, आध्यात्मिक चिंतन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक मेले में आने वाले लोगों के लिए यह आयोजन पुस्तकों के साथ विचार, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करेगा। दस दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए विविध गतिविधियां रखी गई हैं। बच्चों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पुस्तकें, युवाओं के लिए अध्ययन एवं साहित्यिक सामग्री तथा परिवारों के लिए सामूहिक सांस्कृतिक सहभागिता का अवसर उपलब्ध होगा। महिलाओं की सहभागिता को भी कार्यक्रम में स्थान दिया गया है। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में महिला कलाकारों और महिला मंडलों की भूमिका निर्धारित है। इससे आयोजन में व्यापक सामाजिक सहभागिता की संभावना बनती है। पुस्तक मेला ज्ञान और संस्कृति के बीच संवाद स्थापित करने वाला मंच बन सकता है। वहीं सांस्कृतिक संध्याओं के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं और विभिन्न कला विधाओं को प्रस्तुति का अवसर मिलेगा। ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शहर में इस प्रकार का दस दिवसीय आयोजन साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ सामने लाने का अवसर प्रदान करेगा।
21 सितंबर को आध्यात्मिक कवि संगोष्ठी के साथ होगा समापन — 12 सितंबर से प्रारंभ होने वाला दस दिवसीय ‘विराट पुस्तक मेला’ 21 सितंबर 2026 तक चलेगा। अंतिम दिन आध्यात्मिक कवि संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसके साथ सांस्कृतिक संध्याओं की श्रृंखला का समापन होगा। पूरे आयोजन के दौरान 3200 से अधिक शीर्षकों वाली पुस्तकों की प्रदर्शनी और प्रतिदिन निर्धारित सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेंगे। पुस्तक मेले का उद्देश्य पाठकों को पुस्तकों से जोड़ने के साथ समाज में साहित्य, संस्कृति और सकारात्मक रचनात्मक गतिविधियों के लिए वातावरण तैयार करना है। दस दिनों की अवधि में अलग-अलग विषयों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों को भारतीय परंपराओं और कलाओं से परिचित कराने का अवसर देंगी। कार्यक्रम में भक्ति संगीत, राष्ट्र एवं स्वच्छता संदेश, नाटिका, कथक, भजन, सितार वादन, दीप महायज्ञ और काव्य संगोष्ठी जैसी विविध गतिविधियां शामिल हैं। आयोजकों ने शहरवासियों से परिवार और मित्रों सहित आयोजन में पहुंचने का आग्रह किया है। शाम 4:30 से 5:30 बजे तक होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं के माध्यम से पुस्तक मेले को अतिरिक्त आकर्षण प्रदान किया गया है। पुस्तक प्रेमियों के लिए जहां अलग-अलग विषयों की पुस्तकों का अवलोकन और चयन करने का अवसर होगा, वहीं कला एवं संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए प्रतिदिन नई प्रस्तुति देखने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार कला वीथिका, पड़ाव, ग्वालियर में आयोजित होने वाला यह दस दिवसीय विराट पुस्तक मेला साहित्य, पुस्तक, संगीत, नृत्य, अध्यात्म और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का साझा मंच बनने जा रहा है। आयोजन के माध्यम से पाठकों और परिवारों को पुस्तकों के करीब लाने, बच्चों एवं युवाओं में अध्ययन की रुचि बढ़ाने और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी विभिन्न विधाओं को मंच देने का प्रयास किया गया है। 12 से 21 सितंबर तक चलने वाला यह आयोजन ग्वालियर में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में सामने आएगा।
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