Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

और नहीं अब देर लगाना—भूले-बिसरे सपनों को फिर से सफर में साथ ले चलने का संदेश

Author Image
Written by
HQ Report
और अब देर से मत जाओ—भूले-बिसरे सपने को फिर से यात्रा में साथ ले चलने का संदेश
संजीव जैन की रचना में स्वप्न को केवल कल्पना नहीं, बल्कि लक्षण, कर्म, अनुभव और जीवन की दिशा से ग्रहण किया गया, परखने और साकार करने की प्रेरणा
जीवन की भागदौड़ में मनुष्य बार-बार अपने सपनों को पीछे छोड़ देता है, जिसमें कभी-कभी वह बड़े विश्वास और साहस के साथ देखता था। समय बीतता जाता है, जिम्मेदारियाँ भाग जाती हैं और कई इच्छाएँ धीरे-धीरे-धीरे-धीरे स्मृतियों के किसी कोने में रह जाती हैं। संजीव जैन की रचना “और नहीं अब देर से चलो” इसी मनःस्थिति को शब्द कहते हैं और पाठक अपने भूले-बिसरे ड्रीम की ओर से फिर से विचार करते हैं। कविता में स्वप्न को निर्जीव की कल्पना के रूप में नहीं, बल्कि अपने बेहद करीबी साथियों की तरह देखा गया है, जो इंसान के अंदर लगातार बने रहते हैं। रचना का केन्द्र भाव यह है कि यदि मन में कोई संदेह है, कोई इच्छा है, कोई उद्देश्य नहीं है या जीवन को लेकर कोई सार्थकता नहीं है तो उसे अनिश्चित समय तक टालते नहीं रहना चाहिए। सपने को गले लगाते हुए, उनके प्रतिनिधि ने बातचीत की, उनके हाथ से जीवन की यात्रा में साथ ले चलना और उन्हें मंजिल की दिशा की जरूरत है। कवि का आग्रह केवल सपने देखना तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सपने के साथ संवाद करना, उनकी वास्तविकता को समझना, अपनी क्षमता को समझना और उन्हें कर्म के माध्यम से आकार देना की बात करता है। इसी कारण “और अब देर नहीं हुई” केवल एक डबलई जाने वाली पंक्ति नहीं रह जाती, बल्कि पूरी रचना का प्रेरक सूत्र बन जाता है। इस पंक्ति के पाठक को स्वयं से मार्गदर्शक के लिए प्रेरणा मिलती है कि जिन उद्यमों, उद्देश्यों और लक्ष्यों को वह लंबे समय से टालता आ रहा है, अब उनके लिए पहला कदम उठाने का समय नहीं आया है।
भूले-बिसरे सपनों को फिर से पहचानने की जरूरत रचना के आरंभिक हिस्से का महत्वपूर्ण भाव है। कवि उन सपनों की कल्पना करता है जो अब भी इंतजार में बैठे हैं और जिन्हें समय के साथ मनुष्य भूल गया है। यह भाव जीवन के उस पक्ष को सामने लाता है जहां व्यक्ति वर्तमान की आवश्यकताओं में इतना उलझ जाता है कि अपने पुराने उद्देश्यों और आकांक्षाओं को याद करना भी छोड़ देता है। कविता कहती है कि कभी इन सपनों से मिलकर देखिए, तब पता चलेगा कि वे कितने अपने और कितने करीब हैं। यह आत्मसंवाद का सुंदर रूप है। सपनों को गले लगाने और उनका आभार व्यक्त करने का भाव बताता है कि मनुष्य के भीतर मौजूद इच्छाएं उसके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इसके बाद कवि सपनों की उंगली पकड़कर उन्हें सफर पर साथ ले जाने की बात करता है। यह प्रतीकात्मक रूप से बताता है कि सपना तभी सार्थक होता है जब उसे जीवन की वास्तविक यात्रा से जोड़ा जाए। केवल कल्पना में किसी मंजिल को देख लेना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसके लिए कदम बढ़ाना आवश्यक है। अपनी ही क्षमता पर विश्वास पैदा करना भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार मनुष्य का सबसे बड़ा अवरोध बाहरी परिस्थितियां नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर मौजूद संदेह होता है। इसलिए सपनों को राह दिखाने के साथ खुद को भी यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना संभव है। कविता का आग्रह इसी आत्मविश्वास को जगाने का प्रयास करता है और कहता है कि अवसर आने की प्रतीक्षा में जीवन को अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं रखना चाहिए।
कल के सपनों के साथ ईमानदार संवाद और पारदर्शी संबंध की आवश्यकता कविता के अगले हिस्से में दिखाई देती है। कवि कल्पना करता है कि पुराने सपने यात्रा में साथ चलेंगे तो वे बार-बार प्रश्न भी करेंगे। यदि उनकी अनदेखी की गई तो वे आहत होंगे, लेकिन जब तक संभव होगा, वे साथ चलने की कोशिश करते रहेंगे। यहां सपनों का मानवीकरण कविता को भावनात्मक गहराई देता है। मनुष्य के भीतर मौजूद इच्छाएं भी मानो उससे अपने अस्तित्व की स्वीकृति चाहती हैं। कवि सुझाव देता है कि अपने सपनों से साफ-साफ बात की जाए और उन्हें यह बताया जाए कि मंजिल कितनी दूर है। इसका अर्थ यह भी है कि व्यक्ति अपने लक्ष्य के बारे में वास्तविकता को स्वीकार करे। हर सपना तुरंत पूरा नहीं होता और हर इच्छा को पूरा करने के लिए समय, संसाधन और मेहनत की जरूरत होती है। इसलिए सपनों के साथ ईमानदार होना यानी अपनी सीमाओं को पहचानना, रास्ते की कठिनाइयों को समझना और लक्ष्य के प्रति स्पष्ट रहना आवश्यक है। कविता में सपनों के साथ पारदर्शी और मजबूत रिश्ता बनाने की बात इसी आत्ममंथन की ओर संकेत करती है। मनुष्य को अपने उद्देश्य के बारे में स्वयं से झूठ नहीं बोलना चाहिए। यदि किसी लक्ष्य के लिए अभी तैयारी अधूरी है तो उसे स्वीकार करके तैयारी बढ़ानी चाहिए। यदि दिशा बदलने की आवश्यकता है तो उस पर विचार करना चाहिए। इस तरह कविता सपनों को अंधी महत्वाकांक्षा के रूप में नहीं, बल्कि समझदारी और आत्मसंवाद से जुड़े जीवन-लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करती है।
सपनों का स्वभाव भी मनुष्य के जीवन की तरह विविध और परिवर्तनशील होता है। रचना में सपनों को शिशु, युवा और प्रौढ़ रूपों में देखा गया है। कुछ सपने कोमल होते हैं, कुछ विद्रोही और कुछ अनुभवों से परिपक्व। यह कल्पना बताती है कि हर सपना एक जैसा नहीं होता। कुछ इच्छाएं बचपन से मन में होती हैं, कुछ जीवन के अनुभवों से जन्म लेती हैं और कुछ परिस्थितियों के साथ अपना स्वरूप बदलती रहती हैं। इसलिए हर सपने के साथ अलग प्रकार का संवाद आवश्यक है। किसी छोटे और सरल सपने को पूरा करने के लिए एक प्रकार की तैयारी चाहिए, जबकि किसी बड़े लक्ष्य के लिए लंबे समय तक धैर्य और निरंतर प्रयास की जरूरत हो सकती है। कवि हर सपने से एक-एक करके सही-सही संवाद बनाने की बात करता है और उन्हें जरूरी हिम्मत देकर पंख लगाने का संदेश देता है। यह पंक्ति सपनों को आत्मविश्वास देने की प्रेरणा देती है। कई बार सपना इसलिए अधूरा रह जाता है क्योंकि व्यक्ति खुद उस पर विश्वास नहीं करता। परिस्थितियों की कठिनाई, असफलता का डर और दूसरों की राय मनुष्य के भीतर संकोच पैदा कर सकती है। ऐसे में अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है। कविता यह नहीं कहती कि हर सपना बिना किसी प्रयास के सच हो जाएगा, बल्कि वह व्यक्ति को अपने सपनों को समझने, उनकी क्षमता और सीमाओं को पहचानने तथा आवश्यक साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यही कारण है कि रचना का संदेश भावनात्मक होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी प्रतीत होता है।
नींद के सपनों से लेकर जागती आंखों के सपनों तक, मनुष्य का अंतर्मन अनेक संकेत देता है। कविता में नींद में आने वाले सपनों का भी उल्लेख है, जो कभी संकेतों में बात करते हैं और कभी खुली आंखों से दिखाई देने वाले सपने अबूझ पहेली जैसे लगते हैं। यह विचार मनुष्य के अंतर्मन की जटिलता को दर्शाता है। सपने केवल भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि कई बार मन में दबे भावों, इच्छाओं, स्मृतियों और अनुभवों की अभिव्यक्ति भी हो सकते हैं। जीवन की आपाधापी में व्यक्ति के पास स्वयं के साथ बैठने और अपने भीतर झांकने का समय कम होता जा रहा है। कविता इसी कमी की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए सपनों के साथ कुछ समय बिताने का आग्रह करती है। इशारों की भाषा समझने का अर्थ अपने भीतर की आवाज को सुनना भी हो सकता है। मनुष्य को यह समझने की जरूरत है कि वह वास्तव में क्या चाहता है और कौन-सी इच्छाएं उसके लिए महत्वपूर्ण हैं। हर सपना पूरा करना आवश्यक नहीं होता, लेकिन हर महत्वपूर्ण इच्छा को समझना जरूर आवश्यक हो सकता है। कई बार कोई सपना परिस्थितियों के कारण संभव नहीं होता, तो उसे स्वीकार करके नई दिशा चुनना भी जीवन का हिस्सा है। इस तरह कविता सपनों को लेकर भावुक होने के साथ-साथ आत्मचिंतन की जगह भी बनाती है। मनुष्य यदि कुछ समय अपने भीतर के विचारों, इच्छाओं और लक्ष्यों को समझने में लगाए, तो जीवन की दिशा अधिक स्पष्ट हो सकती है। कविता का आग्रह इसी आत्मसंवाद को समय देने का है।
सपनों की भीड़ में सही और भ्रमित सपनों को पहचानना भी उतना ही जरूरी है। रचना में टूटे-बिखरे, तन्हा, सच्चे, झूठे और भ्रमित सपनों की बात करते हुए कवि सावधानी का संदेश देता है। मनुष्य के भीतर अनेक इच्छाएं जन्म लेती हैं, लेकिन उनमें से प्रत्येक जीवन के लिए उपयोगी हो, यह आवश्यक नहीं। कुछ सपने वास्तविक आवश्यकता से जुड़े होते हैं, कुछ क्षणिक आकर्षण से और कुछ दूसरों को देखकर पैदा होते हैं। इसलिए किसी भी लक्ष्य को अपनाने से पहले उसकी वास्तविकता को समझना आवश्यक है। कविता में यह चेतावनी भी दी गई है कि सपनों की दुनिया में चिकनी-चुपड़ी बातें बहुत हो सकती हैं, लेकिन व्यक्ति को उनके कारण भटकना नहीं चाहिए। यहां ‘परख’ का भाव महत्वपूर्ण है। अपने सपनों को परखना और यह तय करना कि कौन-सा सपना वास्तव में जीवन की दिशा से जुड़ा है, एक परिपक्व निर्णय प्रक्रिया है। आगे बढ़ने से पहले तैयारी पर ध्यान देना इसी विचार को मजबूत करता है। कोई भी लक्ष्य केवल उत्साह से पूरा नहीं होता; उसके लिए ज्ञान, कौशल, संसाधन, समय और निरंतरता की आवश्यकता हो सकती है। यदि तैयारी नहीं है तो जल्दबाजी में उठाया गया कदम निराशा पैदा कर सकता है। इसलिए कविता का संदेश सपनों को छोड़ने का नहीं, बल्कि उन्हें समझदारी से चुनने और उनके लिए उचित तैयारी करने का है। यह दृष्टिकोण आज के समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जब सामाजिक माध्यमों और बाहरी प्रभावों के कारण अनेक प्रकार की आकांक्षाएं तेजी से मन में पैदा होती हैं। व्यक्ति को यह तय करना होता है कि उसके लिए वास्तविक प्राथमिकता क्या है।
सपनों के अलग-अलग रंग मनुष्य के भीतर मौजूद भावनाओं और अनुभवों का प्रतिबिंब हैं। कविता में कुछ सपनों को स्याह-सफेद और कुछ को रंगीन तथा निराले बताया गया है। कभी वे अमृत जैसे लगते हैं और कभी विष के प्याले जैसे। यह विरोधाभास जीवन के अनुभवों की जटिलता को दर्शाता है। हर सपना हमेशा सुखद परिणाम ही दे, ऐसा जरूरी नहीं। किसी लक्ष्य की ओर बढ़ते समय कठिनाइयां, असफलताएं और निराशाएं भी सामने आ सकती हैं। फिर भी सपनों में मनुष्य के अपने मन का अंश मौजूद रहता है। कवि सपनों के गुण-दोषों को भी मनुष्य जैसा ही बताता है। इस दृष्टि से सपना कोई पूर्ण और त्रुटिहीन विचार नहीं, बल्कि मनुष्य की सोच, भावनाओं और अनुभवों से निर्मित आकांक्षा है। कविता में मां जैसी ममता और पिता जैसा कर्तव्य निभाने की बात सपनों के प्रति जिम्मेदार रवैये का प्रतीक बनती है। सपनों को केवल चाहना नहीं, बल्कि उनका संरक्षण करना, उन्हें सही दिशा देना और उनके प्रति जिम्मेदारी निभाना आवश्यक है। यहां सपना एक बच्चे की तरह दिखाई देता है जिसे देखभाल, अनुशासन और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह रूपक कविता को पारिवारिक संवेदना से जोड़ता है। व्यक्ति यदि अपने सपनों के प्रति संवेदनशील रहेगा और साथ ही व्यावहारिक दृष्टि अपनाएगा, तो वह उन्हें जीवन के वास्तविक संदर्भ में बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकता है।
कुछ सपने मन की ताकत बनते हैं तो कुछ कमजोरियां भी सामने ला सकते हैं। कविता का यह पक्ष सपनों के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों को स्वीकार करता है। कुछ सपने व्यक्ति को ऊर्जा देते हैं, उसे कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस प्रदान करते हैं, जबकि कुछ इच्छाएं यदि नियंत्रण से बाहर हो जाएं तो मन को अस्थिर भी कर सकती हैं। इसलिए इच्छाओं के मानचित्र पर सोच-समझकर कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है। हर सपना तत्काल पूरा करना संभव नहीं होता और हर रास्ते पर रुकना भी जरूरी नहीं। जीवन में प्राथमिकताओं का निर्धारण करना और सही समय पर सही निर्णय लेना आवश्यक है। कविता में सपनों को अमली जामा पहनाने की बात इसी व्यावहारिक पक्ष को सामने लाती है। कल्पना और वास्तविकता के बीच की दूरी को कर्म ही कम करता है। कोई व्यक्ति किसी उपलब्धि का सपना देख सकता है, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए अध्ययन, प्रशिक्षण, मेहनत, धैर्य और निरंतरता की आवश्यकता होती है। यदि केवल सपना देखा जाए और प्रयास न किया जाए तो वह कल्पना बनकर रह जाता है। इसके विपरीत जब सपना स्पष्ट लक्ष्य में बदलता है और लक्ष्य के लिए कार्ययोजना बनती है, तब उसके साकार होने की संभावना बढ़ती है। कविता व्यक्ति को अपने मन के दृश्यों में खोए रहने के बजाय उन्हें वास्तविक जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है। यही वह बिंदु है जहां रचना कल्पना से कर्म की ओर बढ़ती है और पाठक को अपने सपनों के प्रति सक्रिय होने का संदेश देती है।
सपने यादों, भावनाओं और मौन प्रयासों का दर्पण भी हो सकते हैं। कविता के आठवें खंड में सपनों को संचित भावों की किरणों में यादों का दर्पण बताया गया है। कुछ सपने सहमे हुए हैं, कुछ ठहरे हुए और कुछ भटके हुए। इन्हें मृत इच्छाओं के तर्पण तथा मौन प्रयासों की पूर्ण आहुति जैसा रूप दिया गया है। यह हिस्सा कविता में गहरी आत्मचिंतनशील संवेदना पैदा करता है। मनुष्य के जीवन में अनेक इच्छाएं ऐसी होती हैं जो पूरी नहीं हो पातीं, लेकिन वे उसके अनुभवों का हिस्सा बनी रहती हैं। कोई सपना अधूरा रह जाने पर व्यक्ति के भीतर खालीपन पैदा हो सकता है। फिर भी उन अधूरे सपनों से सीख लेकर आगे बढ़ना संभव है। कवि केवल कल्पना के रंगों से सपनों के चित्र बनाने से सावधान करता है। इसका आशय यह है कि केवल कल्पनाशील होना पर्याप्त नहीं है। बुद्धि और विचार का उपयोग करते हुए यह समझना जरूरी है कि किसी सपने का वास्तविक अर्थ क्या है और उसे पूरा करने के लिए क्या करना होगा। मन को सपनों का अर्थ बताने की बात व्यक्ति को आत्ममंथन की ओर ले जाती है। यदि कोई सपना वास्तव में महत्वपूर्ण है तो उसके पीछे छिपी आवश्यकता, इच्छा या मूल्य को समझना चाहिए। हो सकता है कि मूल सपना परिस्थितियों के कारण संभव न हो, लेकिन उसके पीछे की मूल आकांक्षा किसी दूसरे रास्ते से पूरी की जा सकती है। इस प्रकार अधूरे सपनों को अंत नहीं, बल्कि नई समझ का आधार बनाया जा सकता है।
एक सपना समाप्त होने के बाद भी जीवन रुकता नहीं, बल्कि नए सपनों की शुरुआत होती है। कविता में कहा गया है कि हर सपने के मर जाने से एक रिक्तता जरूर आती है, लेकिन नए स्वप्न की अंगड़ाई के साथ मन फिर आशा से भर जाता है। यह पंक्तियां असफलता और पुनः शुरुआत के बीच के संबंध को खूबसूरती से सामने रखती हैं। जीवन में कोई लक्ष्य पूरा न हो तो निराशा स्वाभाविक है, लेकिन उसी अनुभव से नया रास्ता भी निकल सकता है। मनुष्य यदि सपनों के विज्ञान को समझते हुए उन्हें जीवन के प्रयोगों से जोड़ता है, तो वह अपने अनुभवों का बेहतर उपयोग कर सकता है। समय से आगे जाकर सोचने और सपनों को रचनात्मक दिशा में इस्तेमाल करने की प्रेरणा भी इसी हिस्से में मिलती है। नई कल्पनाएं ही अक्सर समाज और दुनिया में बदलाव का आधार बनती हैं। विज्ञान, शिक्षा, तकनीक, कला, साहित्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियां कभी किसी व्यक्ति के सपने या कल्पना से ही शुरू हुई होंगी। लेकिन उन सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए वर्षों की मेहनत, प्रयोग और धैर्य की जरूरत पड़ी। कविता इसी प्रक्रिया की ओर संकेत करती है। जब व्यक्ति अपने सपने को लेकर गंभीर होता है तो उसे दूसरों के उपहास या संदेह से प्रभावित होने के बजाय अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हालांकि इसका अर्थ आलोचना को पूरी तरह नकारना नहीं है। उपयोगी सुझावों को समझना और अनावश्यक निराशा से बचना—दोनों के बीच संतुलन जरूरी है। इस तरह कविता आशा को कर्म से जोड़ती है और बताती है कि एक सपना समाप्त होने के बाद दूसरा सपना जीवन में नई ऊर्जा ला सकता है।
सपनों का इतिहास मनुष्य की प्रगति और सभ्यता के विकास की कहानी भी बताता है। कविता के अंतिम हिस्से में सपनों को अंतर्मन के रहस्य बताने वाला माध्यम और भविष्य की दिशा के संकेत के रूप में देखा गया है। कल के अंधेरे में कदमों के निशान दिखाने की कल्पना यह बताती है कि आज की उपलब्धियों के पीछे कभी किसी समय किसी ने भविष्य की कल्पना की होगी। दुनिया आज जहां पहुंची है, वहां तक आने में असंख्य विचारों, कल्पनाओं, प्रयोगों और प्रयासों की भूमिका रही है। किसी भी बड़ी उपलब्धि का आरंभ अक्सर एक विचार से होता है। वह विचार धीरे-धीरे सपना बनता है, फिर लक्ष्य का रूप लेता है और अंततः निरंतर प्रयासों के माध्यम से वास्तविकता में बदल सकता है। इस दृष्टि से सपनों का इतिहास केवल व्यक्तिगत जीवन का इतिहास नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की विकास यात्रा का भी हिस्सा है। कविता का अंतिम संदेश इसी विश्वास को मजबूत करता है कि सपने सच हो सकते हैं, लेकिन उनके सच होने के लिए मनुष्य को वर्तमान में दृढ़ निश्चय के साथ काम करना होगा। भविष्य की कल्पना तभी अर्थपूर्ण होती है जब वर्तमान के कर्म उससे जुड़े हों। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं कि सपना बड़ा है; उसके लिए आज क्या किया जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए रचना बार-बार एक ही आग्रह दोहराती है—“और नहीं अब देर लगाना।” यह आग्रह व्यक्ति को टालमटोल से बाहर आने, अपने मन की महत्वपूर्ण इच्छाओं को पहचानने, उनकी वास्तविकता को परखने और उन्हें पूरा करने के लिए पहला कदम उठाने की प्रेरणा देता है।
समग्र रूप से संजीव जैन की यह रचना स्वप्न को देखने से लेकर उन्हें आगे बढ़ाने और साकार करने की यात्रा प्रस्तुत करती है। कविता में सपनों को कभी अपनेपन से अलग दोस्त, कभी बच्चों को चुनौती देने वाले, कभी चुनौती देने वाले और कभी जीवन की ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन स्वप्नों के अलग-अलग सिद्धांतों के माध्यम से मनुष्य में मौजूद आशा, भय, स्मृति, कमजोरी, कमजोरी, कमजोरी और कर्म की भावनाओं को व्यक्त किया जाता है। रचना यह भी याद है कि हर सपना पूरा होना जरूरी नहीं है, लेकिन अपने महत्वपूर्ण सपने से संवाद करना जरूरी है। कुछ सपनों को शामिल किया जा सकता है, कुछ को फिर से प्रकाशित किया जा सकता है और कुछ को लंबे समय तक जारी रखा जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि निर्णय जागरूकता और जागरूकता के साथ लिया जाए। कविता का सबसे प्रभावशाली पक्ष उसका निरंतर आग्रह है – अब और देर से नहीं किया जा सकता। जो सपना सालों से मन में है, उसके बारे में जानना चाहिए; जो लक्ष्य महत्वपूर्ण है, उसकी दिशा तय करनी चाहिए; जहां तैयारी कम है, वहां तैयारी करनी चाहिए और जहां पहला कदम बाकी है, वहां कदम उठाना चाहिए। सपने को केवल नींद में आने वाली वास्तविकता तक सीमित न छोड़ें, उन्हें जीवन के उद्देश्य, कर्म और भविष्य की दिशा से जोड़कर इस रचना का मूल भाव है। अंततः यह कविता पाठक से एक आत्मीय प्रश्न उभर कर सामने आता है—क्या वे सपने हैं, जिनमें कभी हर किसी ने सोचा था, आज भी प्रतीक्षा कर रहे हैं? यदि उत्तर हां है, तो उन्हें फिर से यार्ड, उनके हाथ के सामान और अपनी जीवन-यात्रा में साथ लेकर आगे बढ़ने का समय चुकाना पड़ता है। क्योंकि सपने में जीवन की शक्ति निहित होती है, जब उन्हें देखने के साथ-साथ उनके लिए जगना और कर्म करना भी सीख लिया जाता है—और सिद्धांत, “और अब देर नहीं।”
जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू
आज फोकस में

जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे बने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश, बधाई संदेशों का सिलसिला शुरू

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत
आज फोकस में

भाद्रपद कृष्ण पक्ष षष्ठी, रांधण षष्ठी का पर्व; जन्माष्टमी से पहले जानें दिनभर के शुभ-अशुभ संकेत

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
आज फोकस में

‘बाघ-रक्षाबंधन’ से लगभग 10 हजार ग्रामीणों तक पहुंचा वन्यजीव संरक्षण का संदेश

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान
आज फोकस में

अशोक कुमार गोयल IPS-R ने दी हरियाली पर्व की शुभकामनाएं, पर्यावरण संरक्षण और लोकसंस्कृति के प्रति संकल्प का किया आह्वान

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर
आज फोकस में

अनुपम स्नेह, अटल विश्वास और समर्पण का पर्व है रक्षाबंधन : कृष्णा गौर

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान
आज फोकस में

रक्षाबंधन पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संदेश, प्रेम और भाईचारे के साथ महिला सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेने का आह्वान

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें