Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

हादसों पर सख्त रुख – सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान और जवाबदेही की नई मिसाल

Author Image
Written by
HQ Report

देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने हालिया दिनों में हुई अनेक घातक सड़क दुर्घटनाओं पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से दो हफ्तों के भीतर दुर्घटनाओं के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति बढ़ती लापरवाही पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की एक नई मिसाल भी है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी — “जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता”

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि “देश में हर दिन सैकड़ों निर्दोष लोग सड़कों पर जान गंवा रहे हैं। यह स्थिति अस्वीकार्य है।सड़कें विकास का प्रतीक हैं, लेकिन सुरक्षा के बिना विकास अधूरा है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक प्रशासनिक उत्तरदायित्व है — जिसमें परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण और शहरी विकास विभागों की समान भूमिका है।

Advertisement Box

हर साल लाखों जानें जाती हैं सड़कों पर

भारत विश्व में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में शीर्ष देशों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं, जबकि तीन लाख से अधिक गंभीर रूप से घायल होते हैं। इनमें से अधिकांश हादसे लापरवाही, ओवरस्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने, खराब सड़कों और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर चिंता जताते हुए कहा कि “यदि देश में हर घंटे 15 से 20 लोग सड़कों पर मर रहे हैं, तो यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी है।”

सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

अदालत ने सड़क निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और लोक निर्माण विभागों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाया है। कई राज्यों में हाल के महीनों में नवनिर्मित सड़कों के धंसने, पुलों के गिरने और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क निर्माण के मानकों में गड़बड़ी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

राज्यों से मांगा गया विस्तृत जवाब

अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निर्देश दिया है कि वे अगले दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए —

  1. हाल के पांच वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं के आँकड़े।

  2. दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण।

  3. सड़क सुरक्षा के लिए उठाए गए ठोस कदम।

  4. हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे नियमों के पालन की स्थिति।

  5. दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता और मुआवजे की व्यवस्था।

सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की सिफारिशें भी लागू हों

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ही “सड़क सुरक्षा पर स्थायी समिति” का गठन किया था, जिसने विभिन्न स्तरों पर कई ठोस सुझाव दिए थे —

  • ट्रैफिक पुलिस को आधुनिक उपकरणों से लैस करना

  • सड़क किनारे एंबुलेंस नेटवर्क का विस्तार

  • ब्लैक स्पॉट्स की पहचान और सुधार

  • स्कूली वाहनों की सुरक्षा जांच

  • जनजागरूकता अभियान

अदालत ने अब राज्यों से यह भी पूछा है कि इन सिफारिशों में से कितनी लागू की गईं और कितनी केवल कागजों में सिमटकर रह गईं।

जवाबदेही तय करने की जरूरत

यह स्वत: संज्ञान केवल प्रशासनिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वास्तविक सुधार तभी संभव है, जब जवाबदेही तय हो — चाहे वह सड़क निर्माण एजेंसी की हो या यातायात विभाग की। हर हादसा सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि कहीं न कहीं नीतियों और क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है।

जनजागरूकता और नागरिक जिम्मेदारी भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में नागरिकों को भी चेताया है कि सड़क सुरक्षा केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का प्रयोग, ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट क्रॉसिंग जैसी आदतें सड़क हादसों को न्योता देती हैं। यदि हम स्वयं नियमों का पालन करें, तो दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

केंद्र सरकार की भूमिका — राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति का पुनर्मूल्यांकन

केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति लागू की थी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह नीति अब तकनीकी रूप से पुरानी हो चुकी है। नई परिस्थितियों, बढ़ते वाहनों और शहरी विस्तार को देखते हुए इसे अद्यतन करना आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश इस दिशा में केंद्र को सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर देता है।

हादसों से अर्थव्यवस्था को भी बड़ा नुकसान

सड़क दुर्घटनाएं केवल मानवीय नहीं, बल्कि आर्थिक संकट भी पैदा करती हैं। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क हादसों के कारण भारत को हर साल लगभग GDP का 3% तक नुकसान होता है। यह नुकसान केवल स्वास्थ्य व्यय या मुआवजे के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादनशील श्रमबल के ह्रास के रूप में होता है।

न्यायपालिका का सक्रिय हस्तक्षेप आवश्यक था

सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि यह उस संवेदनशीलता का प्रमाण है जो न्यायपालिका के भीतर आज भी जीवित है। जहाँ कार्यपालिका कभी-कभी प्रशासनिक ढिलाई से जूझती है, वहाँ न्यायालय का यह हस्तक्षेप जनहित और शासन-सुधार दोनों के लिए प्रेरक है। हादसों की रोकथाम के लिए यह जरूरी है कि नीतियां केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर प्रभावी बदलाव लाएँ।

Employees’ Provident Fund Organisation ने 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी
आज फोकस में

Employees’ Provident Fund Organisation ने 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल
आज फोकस में

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव
आज फोकस में

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट
आज फोकस में

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप
आज फोकस में

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित
आज फोकस में

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
Advertisement Box