
फ्लाइट कैंसिलेशन और महंगाई के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
500 किमी से 1500 किमी के ऊपर तक की उड़ानों के लिए तय हुई अधिकतम सीमा
नई दिल्ली। देशभर में लगातार बढ़ रहे हवाई किरायों और उड़ान रद्द होने से उत्पन्न अव्यवस्था के बीच केंद्र सरकार ने आम यात्रियों को बड़ी राहत दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) द्वारा जारी आदेश क्रमांक 01/2025 (दिनांक 6 दिसंबर 2025) के तहत अब देशभर की सभी घरेलू अनुसूचित एयरलाइंस अपने यात्रियों से निर्धारित सीमा से अधिक किराया नहीं वसूल सकेंगी।
यह फैसला उस समय आया है जब देश की एक प्रमुख एयरलाइन की उड़ान सेवाओं में व्यवधान के कारण बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन, सीटों की कमी और किरायों में असामान्य वृद्धि देखी जा रही थी। इसी को देखते हुए सरकार ने जनहित में हस्तक्षेप करते हुए किराया नियंत्रण लागू किया है।
अब दूरी के अनुसार तय होगा अधिकतम हवाई किराया
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब घरेलू उड़ानों के लिए अधिकतम किराया इस प्रकार तय किया गया है—
यात्रा दूरी (स्टेज लेंथ)| अधिकतम किराया
500 किमी तक| ₹7,500
500–1000 किमी| ₹12,000
1000–1500 किमी| ₹15,000
1500 किमी से अधिक| ₹18,000
यह स्पष्ट किया गया है कि यह किराया सीमा UDF, PSF और सभी लागू करों (Taxes) से अलग होगी। यानी यात्री को इसके अतिरिक्त एयरपोर्ट शुल्क और टैक्स देना होगा।
बिजनेस क्लास और RCS उड़ानों को छूट
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि—
– यह किराया सीमा बिजनेस क्लास पर लागू नहीं होगी
– साथ ही RCS उड़ान योजना (उड़ान-UDAN) के तहत संचालित फ्लाइट्स पर यह प्रतिबंध लागू नहीं रहेगा
अर्थात यह निर्णय मुख्य रूप से इकोनॉमी क्लास के आम यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है।
क्यों पड़ा सरकार को हस्तक्षेप करना?
केंद्रीय सरकार के संज्ञान में यह बात आई थी कि—
– एक प्रमुख एयरलाइन के संचालन में भारी व्यवधान
– लगातार उड़ानों का निरस्त होना
– कई मार्गों पर क्षमता में गिरावट
– और इसके चलते टिकट किरायों में अचानक तेज उछाल
देखने को मिल रहा था। इन परिस्थितियों में आम यात्री बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे। मजबूरी में यात्रियों को कई गुना अधिक कीमत पर टिकट खरीदनी पड़ रही थी।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
«“जनहित सर्वोपरि है और यात्रियों से अनुचित किराया वसूली किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”»
ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग पर एक समान नियम
इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि—
– यह किराया सीमा हर प्रकार की बुकिंग पर लागू होगी
– चाहे टिकट एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट से खरीदा गया हो
– या फिर उसे ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसी (OTA) के माध्यम से बुक किया गया हो
यानी अब किसी भी प्लेटफॉर्म पर किराया निर्धारित सीमा से ज्यादा नहीं वसूला जा सकेगा।
एयरलाइंस को क्षमता बढ़ाने के निर्देश
सरकार ने एयरलाइंस को यह भी निर्देश दिए हैं कि—
– सभी किराया श्रेणियों (Fare Buckets) में टिकटों की उपलब्धता बनाए रखें
– जिन सेक्टर्स पर मांग ज्यादा है, वहां फ्लाइट की संख्या और सीटों की क्षमता बढ़ाई जाए
इसका सीधा उद्देश्य यह है कि—
– यात्रियों को समय पर टिकट मिल सके
– और कृत्रिम कमी के बहाने किराया न बढ़ाया जा सके
कब तक लागू रहेंगे ये नियम?
सरकारी आदेश में कहा गया है कि—
«“यह किराया सीमा तब तक लागू रहेगी, जब तक हवाई किराए स्थिर नहीं हो जाते या अगली समीक्षा नहीं कर ली जाती।”»
अर्थात यह एक अस्थायी लेकिन सख्त नियंत्रण व्यवस्था है, जिसे बाजार की स्थिति सामान्य होने तक जारी रखा जाएगा।
यात्रियों में राहत, एयरलाइंस में हलचल
इस फैसले के बाद—
– यात्रियों में राहत
– ट्रैवल एजेंसियों में हलचल
– और एयरलाइंस की रणनीतियों में बदलाव
देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर आम लोग इस फैसले को “हवाई किराए पर ऐतिहासिक लगाम” बता रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
विमानन क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि—
– यह फैसला अल्पकालीन राहत जरूर देगा
– लेकिन दीर्घकालीन समाधान के लिए फ्लीट विस्तार, स्लॉट मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार जरूरी हैं
हालांकि मौजूदा हालात में यह कदम आम यात्रियों के लिए जीवन रेखा साबित होगा।
सरकार के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि—
– हवाई यात्रा अब केवल अमीरों की नहीं रहेगी
– आम नागरिक भी अब सीमित बजट में सुरक्षित एयर ट्रैवल कर सकेगा
– और एयरलाइंस को मनमानी से रोका जाएगा
यह आदेश न केवल यात्रियों के हित में है, बल्कि उड़ान उद्योग में संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।








