
मुंबई।
हिंदी सिनेमा के शोमैन राज कपूर की जयंती पर उनसे जुड़ी कई दिलचस्प कहानियाँ एक बार फिर चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक किस्सा उस दौर की सबसे खूबसूरत और बोल्ड अभिनेत्रियों में शुमार ज़ीनत अमान से जुड़ा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ज़ीनत अमान को हिंदी सिनेमा में पहचान दिलाने वाले देव आनंद थे, लेकिन उनकी किस्मत चमकाने वाला ‘ब्लू-आइड बॉय’ कोई और नहीं बल्कि राज कपूर थे।
देव आनंद की खोज थीं ज़ीनत अमान
ज़ीनत अमान को पहली बार बड़े पर्दे पर लाने का श्रेय देव आनंद को जाता है। 1970 में आई फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ में देव आनंद ने ज़ीनत अमान को कास्ट किया। इस फिल्म में उनकी भूमिका ‘जेनिस’ के रूप में थी, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। इस किरदार के लिए ज़ीनत अमान को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला और वह बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं।
देव आनंद खुद मानते थे कि ज़ीनत अमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर की अपील है और वह हिंदी सिनेमा की सोच को बदल सकती हैं।
एंट्री राज कपूर की
ज़ीनत अमान की बढ़ती लोकप्रियता पर राज कपूर की नज़र पड़ी और उन्होंने तुरंत उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ (1978) के लिए साइन कर लिया। यह वही फिल्म थी जिसने ज़ीनत अमान की छवि को पूरी तरह बदल दिया।
राज कपूर, जिन्हें इंडस्ट्री में ‘शोमैन’ कहा जाता था, नई अभिनेत्रियों को बड़े कैनवास पर पेश करने के लिए मशहूर थे। उन्होंने ज़ीनत अमान को न सिर्फ एक साहसी भूमिका दी, बल्कि उन्हें सिनेमा की सबसे बोल्ड और ग्लैमरस अभिनेत्री के रूप में स्थापित कर दिया।
‘ब्लू-आइड बॉय’ क्यों कहलाए राज कपूर
राज कपूर को इंडस्ट्री में ‘ब्लू-आइड बॉय’ इसलिए कहा जाता था क्योंकि उनकी आंखों में भविष्य देखने की खास क्षमता मानी जाती थी। वह जानते थे कि कौन-सी अभिनेत्री किस तरह के रोल में चमक सकती है। ज़ीनत अमान के मामले में भी उनका अनुमान बिल्कुल सही साबित हुआ।
‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में ज़ीनत अमान का किरदार उस दौर में काफी विवादित रहा, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे बड़ी फीमेल स्टार्स में शामिल कर दिया।
देव आनंद और राज कपूर के रास्ते अलग
हालांकि ज़ीनत अमान की सफलता में देव आनंद की भूमिका अहम थी, लेकिन राज कपूर की फिल्म के बाद उनका करियर एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंच गया। इसके बाद ज़ीनत अमान ने लगातार बड़े बैनरों और निर्देशकों के साथ काम किया।
फिल्मी गलियारों में कहा जाता है कि देव आनंद को इस बात का अफसोस जरूर हुआ कि जिस अभिनेत्री को उन्होंने खोजा, वही राज कपूर के साथ जुड़कर ज्यादा बड़ी स्टार बन गई।
राज कपूर की विरासत
राज कपूर सिर्फ एक अभिनेता या निर्देशक नहीं थे, बल्कि वह ऐसे फिल्मकार थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। नरगिस से लेकर डिंपल कपाड़िया और ज़ीनत अमान तक, उन्होंने कई अभिनेत्रियों को नई पहचान दी।
जयंती पर यादें
राज कपूर की जयंती पर यह किस्सा एक बार फिर याद दिलाता है कि हिंदी सिनेमा में प्रतिभा के साथ-साथ सही मार्गदर्शन और सही मंच कितना अहम होता है। ज़ीनत अमान की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कैसे देव आनंद की खोज को राज कपूर ने एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया।
आज भी जब राज कपूर का नाम लिया जाता है, तो उनके साथ जुड़ी ऐसी कहानियाँ हिंदी सिनेमा की सुनहरी यादों को ताजा कर देती हैं।









