
नोएडा। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नोएडा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए कंपनी डायरेक्टर समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कॉल सेंटर देश-विदेश के लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था और लंबे समय से गुप्त रूप से संचालित हो रहा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सेक्टर क्षेत्र में एक निजी कार्यालय से संचालित इस कॉल सेंटर की गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना के आधार पर साइबर क्राइम टीम और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से छापा मारकर कार्रवाई की, जिसमें मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, हेडसेट, फर्जी दस्तावेज और स्क्रिप्ट बरामद की गईं।
ऐसे फंसाते थे शिकार
जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को बड़ी आईटी कंपनियों, बैंक, टेक्निकल सपोर्ट या सरकारी एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे। कॉल करने वाले एजेंटों को बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती थी और उन्हें एक तय स्क्रिप्ट दी जाती थी, ताकि वे पीड़ितों को भरोसे में ले सकें।
आरोपी पीड़ितों को बताते थे कि उनके कंप्यूटर या बैंक अकाउंट में गंभीर तकनीकी समस्या या सुरक्षा खतरा है। डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर उनसे रिमोट एक्सेस लेने या लिंक भेजकर जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद फर्जी चार्ज, सर्विस फीस या पेनल्टी के नाम पर उनसे पैसे ट्रांसफर करा लिए जाते थे।
कंपनी डायरेक्टर की भूमिका
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कॉल सेंटर का संचालन कंपनी डायरेक्टर की देखरेख में किया जा रहा था। डायरेक्टर ही कर्मचारियों की भर्ती, ट्रेनिंग, स्क्रिप्ट तैयार करने और ठगी से प्राप्त रकम के बंटवारे की व्यवस्था करता था। गिरफ्तार आरोपियों में कॉल एजेंट, सुपरवाइजर और तकनीकी सहायता देने वाले लोग शामिल हैं।
करोड़ों की ठगी की आशंका
पुलिस को आशंका है कि इस फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लाखों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। कई बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से रकम को इधर-उधर किया जाता था, ताकि पुलिस तक सीधा सुराग न पहुंचे। पुलिस अब सभी बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन की गहन जांच कर रही है।
पुलिस की अपील
नोएडा पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, ईमेल या मैसेज पर अपनी व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा न करें। कोई भी बैंक या सरकारी एजेंसी फोन पर पासवर्ड, ओटीपी या रिमोट एक्सेस नहीं मांगती। ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में दें।
जांच जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग या गिरोह भी सक्रिय हैं या नहीं। जरूरत पड़ने पर आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
कुल मिलाकर, नोएडा में एक और फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश होना यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच से ऐसे गिरोहों पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।









