
भोपाल। आज भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं में प्राप्त आवंटन के विरुद्ध चालू तिमाही के दौरान किए गए वित्तीय व्यय की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित कार्यों की स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
समीक्षा के दौरान यह सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों का समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी उपयोग हो, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंच सके। बैठक में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत राशि, व्यय की वर्तमान स्थिति तथा निर्धारित लक्ष्यों की तुलना में उपलब्धियों का बिंदुवार परीक्षण किया गया।
बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिन क्षेत्रों अथवा योजनाओं में व्यय की गति अपेक्षाकृत धीमी है, वहां विशेष कार्ययोजना बनाकर तेजी से कार्य किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो तथा स्वीकृत योजनाओं का लाभ निर्धारित समयसीमा के भीतर ग्रामीण नागरिकों तक पहुंचे। अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग एवं फील्ड स्तर पर सतत समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को समय रहते दूर किया जा सके।
साथ ही भारत सरकार से संबंधित लंबित विषयों एवं प्रकरणों पर निरंतर फॉलो-अप करते हुए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में कहा गया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से विकास योजनाओं को अधिक गति दी जा सकती है। इसलिए सभी लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश प्रदान किए गए।
बैठक में विभागीय कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, जवाबदेह एवं परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से विभागीय संरचना के पुनर्गठन पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। इस दौरान कार्यों के विकेंद्रीकरण, जवाबदेही निर्धारण, निगरानी तंत्र को मजबूत करने तथा तकनीक आधारित प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
विभागीय पुनर्गठन के संदर्भ में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी भेदभाव और बिना किसी अनावश्यक बाधा के पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
बैठक में यह भी कहा गया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग केवल योजनाओं के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास, रोजगार सृजन, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इसलिए विभागीय अधिकारी और कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता तथा प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
सुशासन की अवधारणा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए विभागीय स्तर पर निगरानी एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा कार्यों की प्रगति से संबंधित सूचनाओं को समय-समय पर अद्यतन रखा जाए। इससे न केवल कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि संसाधनों के बेहतर उपयोग को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि विभागीय पुनर्गठन, प्रभावी वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शी कार्यप्रणाली और सतत निगरानी के माध्यम से ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार आएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी तथा आमजन को शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ प्राप्त होगा।
ग्रामीण विकास, सुशासन और पारदर्शिता के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग निरंतर सक्रिय है तथा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे।









