Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

सोमवती अमावस्या पर माँ नर्मदा के चरणों में श्रद्धा का समर्पण, प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए की प्रार्थना

Author Image
Written by
HQ Report

नर्मदापुरम। पवित्र सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर नर्मदापुरम स्थित माँ नर्मदा के पावन तट पर आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की। इसी क्रम में जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी माँ नर्मदा के चरणों में नमन करते हुए चुनरी अर्पित की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि तथा उत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की।

सोमवती अमावस्या का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन नदियों में स्नान, दान-पुण्य, जप-तप और भगवान शिव की आराधना को विशेष फलदायी माना गया है। माँ नर्मदा को भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक माना जाता है और उनके दर्शन मात्र से पुण्य की प्राप्ति का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। यही कारण है कि सोमवती अमावस्या के अवसर पर नर्मदापुरम के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

Advertisement Box

प्रातःकाल से ही माँ नर्मदा के तट पर धार्मिक वातावरण दिखाई दिया। घाटों पर वैदिक मंत्रोच्चार, घंटियों की मधुर ध्वनि और भजन-कीर्तन की स्वर लहरियों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु परिवार सहित घाटों पर पहुंचे और माँ नर्मदा के पवित्र जल में स्नान कर अपने जीवन को धन्य बनाने का प्रयास किया। अनेक श्रद्धालुओं ने व्रत, पूजन और दान-पुण्य के माध्यम से अपने धार्मिक कर्तव्यों का निर्वहन किया।

इस अवसर पर माँ नर्मदा को चुनरी अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यता है कि माँ नर्मदा को चुनरी अर्पित करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर आरती उतारी और प्रदेश तथा देश के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूजन के दौरान “नमामि देवि नर्मदे” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

माँ नर्मदा के प्रति लोगों की श्रद्धा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नदी मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और जीवनदायिनी शक्ति का भी प्रतीक है। प्रदेश के लाखों लोगों की आजीविका, कृषि और पेयजल व्यवस्था सीधे तौर पर नर्मदा नदी पर निर्भर है। इसलिए माँ नर्मदा के प्रति लोगों का भाव केवल पूजा का नहीं बल्कि कृतज्ञता और सम्मान का भी है। सोमवती अमावस्या जैसे अवसर लोगों को प्रकृति और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण कराते हैं।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि सोमवती अमावस्या पर नर्मदा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए दान, जप और तप का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु नर्मदापुरम पहुंचकर माँ नर्मदा के दर्शन और पूजन का लाभ प्राप्त करते हैं। कई श्रद्धालु इस अवसर पर अपने परिवार की सुख-शांति, संतान की उन्नति, स्वास्थ्य लाभ और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष अनुष्ठान भी कराते हैं।

पूजन-अर्चना के दौरान प्रदेश और देशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की गई। यह प्रार्थना की गई कि माँ नर्मदा की कृपा सभी नागरिकों पर बनी रहे तथा समाज में शांति, सद्भाव, भाईचारा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। साथ ही प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़े और प्रत्येक नागरिक के जीवन में खुशहाली आए।

नर्मदापुरम में आयोजित इस धार्मिक अवसर ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं बल्कि जीवन, आस्था और सभ्यता की आधारशिला हैं। माँ नर्मदा के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव पीढ़ियों से चला आ रहा है और आज भी उतनी ही मजबूती से समाज को जोड़ने का कार्य कर रहा है। सोमवती अमावस्या के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सशक्त रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा की आरती में सहभागिता कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। अनेक लोगों ने अपने परिवार के साथ पूजा-अर्चना कर जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की कामना की। घाटों पर सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस अवसर पर पचोर मंडल अध्यक्ष श्री विकास दीक्षित सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मप्रेमी नागरिक और श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। सभी ने माँ नर्मदा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए प्रदेश की उन्नति और जनकल्याण की मंगलकामना की।

सोमवती अमावस्या के इस पावन अवसर पर माँ नर्मदा के चरणों में समर्पित श्रद्धा, भक्ति और विश्वास का यह अद्भुत दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज को एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश भी देता रहा। माँ नर्मदा की अविरल कृपा से प्रदेश और देश निरंतर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हो तथा प्रत्येक नागरिक का जीवन सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण हो, यही इस पावन अवसर की सबसे बड़ी कामना रही।

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें